बंगाल में अब गुंडों-दंगाइयों की खैर नहीं, विधानसभा से एंटी सोशल बिल पास, 1 साल तक 'हिरासत', संपत्ति जब्ती के प्रावधान
बंगाल में अब सार्वजनिक, सामाजिक और आम लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों की खैर नहीं. बंगाल विधानसभा से एक ऐसा बिल पास हुआ है जिसके बाद ऐसे अपराधियों को ना सिर्फ शक के आधार पर एक साल तक हिरासत में रखा जाएगा बल्कि संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण बिल, 2026 बहुमत से पास कर दिया गया है. इस बिल का मकसद राज्य में भ्रष्टाचार, असामाजिक और उपद्रवी गतिविधियों को रोकना है. सत्ताधारी भाजपा खेमे से 176 विधायकों ने बिल के पक्ष में वोट किया. 41 विधायकों ने बिल के खिलाफ वोट किया, जबकि बाकी 20 विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
बंगाल में अब अपराधियों की खैर नहीं!
जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखने के मकसद से लाए गए इस बिल की खासियत यह है कि यह असामाजिक गतिविधियों से निपटने वाले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के अलग-अलग प्रावधानों से दो मुख्य बातों में अलग है.
बंगाल विधानसभा से सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण बिल पास
पहली बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति को जनता की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो कानून बनने के बाद यह बिल उसे एक साल तक के लिए 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) में रखने की इजाजत देगा. दूसरी बात यह है कि यह राज्य सरकार को ऐसे अपराध में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है, जिसके लिए बीएनएस के संबंधित प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक साल तक एहतियाती डिटेंशन का प्रावधान
पहले प्रावधान यानी 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' को लागू करने के लिए एक एडवाइजरी बोर्ड बनाया जाएगा. यह बोर्ड तय करेगा कि किसी खास व्यक्ति को हिरासत में रखना सही है या नहीं. एडवाइजरी बोर्ड 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' के औचित्य की जांच करेगा. हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के सामने अपना पक्ष रखने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होगा. एडवाइजरी बोर्ड के प्रमुख कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा या पूर्व जज होंगे. इसमें दो अन्य सदस्य भी होंगे जो हाईकोर्ट के जज बनने की योग्यता रखते हों.
नया कानून पुलिस को यह अधिकार भी देगा कि अगर उन्हें शक हो कि कोई व्यक्ति अशांति फैला सकता है, तो वे उसे किसी खास इलाके से निकाल सकते हैं या वहां आने से रोक सकते हैं. यह कानून इसे लागू करने में शामिल पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी सुरक्षा देगा. इतना कड़ा बिल लाने की जरूरत पर बात करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सदन में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली और तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान हुई गुंडागर्दी और हिंसा की घटनाओं का जिक्र किया.
'सज्जन को न्याय, अपराधियों पर कार्रवाई'
उन्होंने 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' को लेकर जताई जा रही चिंताओं को भी दूर किया और कहा कि यह प्रावधान 'सज्जन लोगों' के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है.
वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा से पास प्रस्तावित गुंडा विधेयक पर अब सियासत गर्म हो गई है. इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित प्रवक्ता रिजु दत्ता ने दोनों विधेयकों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार का समर्थन किया. साथ ही, उन्होंने टीएमसी पार्षदों और नेताओं की संपत्तियों की ऑडिट कराने और बड़े नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की.
VIDEO | West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari says the West Bengal Public Safety and Control of Anti-social Activities Bill is aimed at preventing riots and other forms of violence, and will not be misused.
Source: Third party pic.twitter.com/13VzjCaPXD— Press Trust of India (@PTI_News) June 29, 2026Advertisement
पहले ही आ जाना चाहिए था बिल: रिजु दत्ता
रिजु दत्ता ने कहा कि विधानसभा में लाया जा रहा गुंडा विधेयक समय की जरूरत है. यह कानून काफी पहले ही लागू हो जाना चाहिए था. पिछले कई वर्षों में पश्चिम बंगाल में गुंडागर्दी और बाहुबलियों की संस्कृति बढ़ी है, जिस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है. राज्य में ऐसे कई लोग राजनीतिक दलों के बैनर तले रहकर बाहुबली की तरह काम करते हैं, गरीबों और महिलाओं पर अत्याचार करते हैं और कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए.
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "आज जब विधानसभा का सत्र चल रहा था, तो कुछ विधायकों ने 'पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर' के ज़रिए विधायक हुमायूँ कबीर के दो जगहों पर दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई। उन्होंने इन बयानों को आपत्तिजनक, सांप्रदायिक और समाज व राज्य के लिए… pic.twitter.com/iLU2vxcQCo
— IANS Hindi (@IANSKhabar) June 29, 2026
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं होना चाहिए. यदि विपक्ष का कोई नेता सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहा हो तो उसके खिलाफ इस कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. इस एक आशंका को छोड़कर वह इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि वर्षों से गरीबों और महिलाओं पर अत्याचार करने वाले बाहुबलियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले.
TMC नेताओं की संपत्ति की हो जांच
रिजु दत्ता ने टीएमसी के पार्षदों और नेताओं की संपत्ति की जांच की भी मांग उठाई. उन्होंने कहा कि सीएम सुवेंदु अधिकारी को भी इस मुद्दे को उठाना चाहिए और तृणमूल कांग्रेस के सभी पार्षदों की संपत्तियों का ऑडिट कराया जाना चाहिए. यह जांच होनी चाहिए कि पार्षद बनने से पहले उनकी संपत्ति कितनी थी और पद संभालने के बाद उसमें कितना इजाफा हुआ. उनका तर्क है कि पार्षद का वेतन सीमित होता है, फिर भी कई लोगों के पास आलीशान इमारतें और महंगी गाड़ियां कैसे आ गईं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
'केवल छोटी मछली पकड़ने से काम नहीं चलेगा'
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले छोटे-मोटे कारोबार करते थे, लेकिन आज कई लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं. यदि उनकी आय का कोई वैध स्रोत है तो वह ऑडिट में सामने आ जाएगा, लेकिन जनता को पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए. दत्ता ने आगे कहा कि हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल मुख्यमंत्री से मिल लेने या उनके पैर छू लेने से किसी को छूट नहीं मिलती. हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पिछली सरकारों की तरह इस बार भी केवल छोटे स्तर के लोगों पर ही कार्रवाई होगी. बंगाल की जनता यह देखना चाहती है कि जिन बड़े नेताओं के संरक्षण में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियां चलती रहीं, उनके खिलाफ कब कार्रवाई होगी.
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उन्होंने कहा कि केवल छोटी मछलियों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा. जनता यह देखना चाहती है कि बड़ी मछलियों और प्रभावशाली नेताओं पर भी समान रूप से कानून का शिकंजा कसा जाए.