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बांग्लादेश से मालदीव तक...जो कल थे भारत के खिलाफ, आज संकट में मदद के लिए गिड़गिड़ाए पडोसी देश

Iran-Israel War: खाड़ी क्षेत्र में तनाव इतना बढ़ गया कि तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई. खास तौर पर स्ट्रैटे ऑफ़ होर्मुज,  जहां से दुनिया का लगभग 20 % तेल और गैस गुजरता है, लगभग ठप पड़ गया.

Image Source: Social Media
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Iran-Israel War: 28 फरवरी से शरू हुआ अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष धीरे धीरे पूरे दुनिया के लिए एक बड़े ऊर्जा संकट में बदल गया. खाड़ी क्षेत्र में तनाव इतना बढ़ गया कि तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई. खास तौर पर स्ट्रैटे ऑफ़ होर्मुज,  जहां से दुनिया का लगभग 20 % तेल और गैस गुजरता है, लगभग ठप पड़ गया. 

बदली हुई राजनीति - जब विरोधी भी मदद मांगने लगे

दिलचस्प बात यह है कि जिन देशों ने हाल के वर्षों में भारत का विरोध किया था, वही अब मुश्किल वक्त में उसी भारत की ओर मदद के लिए देख रहे हैं, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों ने कभी ‘इंडिया आउट’ या ‘बॉयकॉट इंडिया’ जैसे अभियान चलाए थे.लेकिन आज जब ईंधन की कमी ने उनकी अर्थव्यवस्था और जनजीवन को प्रभावित किया, तो उन्हें भारत की जरूरत महसूस हुई. दूसरी ओर, भारत ने अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति को निभाते हुए पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर मदद का हाथ बढ़ाया.

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मालदीव - ‘इंडिया आउट’ से ‘इंडिया हेल्प’ तक

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कुछ समय पहले तक मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू की सरकार भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए थी. भारतीय सैनिकों को वापस भेजना, चीन के साथ नजदीकी बढ़ाना, ये सब फैसले रिश्तों में तनाव बढ़ाने वाले थे. लेकिन जैसे ही यह वैश्विक संकट आया, मालदीव की स्थिति बदल गई. पूरी तरह आयात पर निर्भर यह देश अचानक ईंधन की भारी कमी से जूझने लगा. ऐसे समय में भारत ने बिना किसी शर्त के मदद की. जरूरी पेट्रोल और एविएशन फ्यूल की आपूर्ति जारी रखी गई ताकि वहां की अर्थव्यवस्था, खासकर पर्यटन, पूरी तरह ठप न हो जाए. यह एक तरह से रिश्तों में नरमी और परिपक्वता का संकेत भी है.

बांग्लादेश - राजनीति से हकीकत तक

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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के खिलाफ माहौल बना. ‘बॉयकॉट इंडिया’ जैसे अभियान चलाए गए और कई समझौतों पर सवाल उठाए गए. लेकिन जब ऊर्जा संकट ने दस्तक दी, तो असलियत सामने आ गई. गैस की कमी से बिजली उत्पादन रुकने लगा, उद्योग बंद होने लगे और आम जनता परेशान हो गई. ऐसे हालात में भारत ने फिर सहयोग दिया.‘मैत्री पाइपलाइन’ के जरिए डीजल सप्लाई बढ़ाई गई और बिजली आपूर्ति भी जारी रखी गई. हजारों टन ईंधन भेजकर भारत ने यह दिखाया कि संकट के समय पड़ोसी का साथ कैसे निभाया जाता है.

श्रीलंका - भरोसे की पुरानी डोर

श्रीलंका पहले भी आर्थिक संकट झेल चुका है, और उस समय भारत ने बड़ी मदद की थी. हालांकि श्रीलंका ने कभी-कभी चीन की ओर झुकाव दिखाया, लेकिन भारत के साथ संबंध पूरी तरह खराब नहीं हुए. इस नए संकट में भी भारत ने अपनी भूमिका निभाई. ईंधन की सप्लाई के लिए नई क्रेडिट लाइन दी गई और समय पर पेट्रोल-डीजल भेजकर वहां की स्थिति को संभालने में मदद की गई. यह दिखाता है कि भारत केवल कूटनीति नहीं, बल्कि भरोसे पर रिश्ते बनाता है. 

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विदेश मंत्रालय (भारत) ने साफ किया कि भारत अपनी जरूरतों का ध्यान रखते हुए भी पड़ोसी देशों की मदद कर रहा है. भारत का यह रवैया सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि एक सोच को दर्शाता है-“वसुधैव कुटुंबकम”, यानी पूरी दुनिया एक परिवार है. जहां कुछ देश केवल अपने फायदे देखते हैं, वहीं भारत मुश्किल समय में बिना शर्त मदद करने की कोशिश करता है.

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