×
जिस पर देशकरता है भरोसा

4 डॉक्टर बच्चे.. पांचवे के लिए खरीदा था NEET का पेपर, अब पूरा परिवार चढ़ा CBI के हत्थे

NEET Exam Scam: इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यरो (CBI )ने अपनी पहली बड़ी करवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया हैं. इनमें जयपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं. राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG ) की शुरुआती जांच के बाद ही CBI ने मामला अपने हाथ में लिया और सिर्फ 24 घंटे के भीतर अहम गिरफ्तारी की.

Author
14 May 2026
( Updated: 14 May 2026
03:05 PM )
4 डॉक्टर बच्चे.. पांचवे के लिए खरीदा था NEET का पेपर, अब पूरा परिवार चढ़ा CBI के हत्थे
Image Source: IANS
Advertisement

NEET Exam Scam: नीट -यूजी 2026 के पेपर लीक मामले ने पूरे देश में सुर्खियाँ बटोरी हैं. इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यरो (CBI )ने अपनी पहली बड़ी करवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया हैं. इनमें जयपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं. राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG ) की शुरुआती जांच के बाद ही CBI ने मामला अपने हाथ में लिया और सिर्फ 24 घंटे के भीतर अहम गिरफ्तारी की.

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में सबसे ज्यादा ध्यान जयपुर के बीवाल परिवार पर गया. इसमें हैं दिनेश बीवाल, उनके भाई मांगीलाल बीवाल और मांगीलाल के बेटे विकास बीवाल. ये सभी जयपुर जिले के जमवा-रामगढ़ के रहने वाले हैं.
बाकी दो आरोपी अलग-अलग शहरों से हैं. गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को भी गिरफ्तार किया गया. बुधवार को इन्हें स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद CBI ने नई दिल्ली ले जाकर आगे की जांच शुरू की.
जांच में यह भी पता चला कि विकास बीवाल ने पिछले साल भी नीट परीक्षा दी थी, लेकिन वह फेल हो गया था. इस साल भी उसके पास परीक्षा पास करने की उम्मीद कम मानी जा रही थी.

पेपर लीक कैसे हुआ?

एसओजी ने सबसे पहले इस मामले पर ध्यान दिया. उन्हें 3 मई को परीक्षा से पहले ही सोशल मीडिया पर ‘गेस पेपर’ वायरल होने की जानकारी मिली. अधिकारियों को शक हुआ कि बीवाल परिवार इसमें शामिल हो सकता है. इस परिवार के चार बच्चे 2025 में नीट पास कर चुके हैं और अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं. वहीं दिनेश का नाबालिग बेटा सीकर में नीट-यूजी 2026 की तैयारी कर रहा था.
जांच में पता चला कि 26 और 27 अप्रैल के बीच दिनेश ने यश यादव से यह पेपर हासिल किया और 29 अप्रैल को सीकर जाकर अपने बेटे को सौंप दिया. इसके बाद यह पेपर लगभग 10 और लोगों के साथ भी शेयर किया गया. अधिकारी अब यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या दिनेश का बेटा अपने दोस्तों के बीच इसे फैलाने में शामिल था. 

Advertisement

सीकर की कोचिंग ने खोल दिया मामला

सीकर के एक कोचिंग संस्थान के शिक्षक ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो रहे गेस पेपर को देखा. उन्होंने पाया कि इसमें असली नीट पेपर से मिलते-जुलते सवाल थे. इसके बाद उन्होंने तुरंत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ईमेल भेजकर इसकी जानकारी दी.
8 मई को यह सूचना जयपुर के SOG मुख्यालय पहुंची. उसी दिन एसओजी की टीम सीकर पहुंची और छात्रों व संदिग्धों से पूछताछ शुरू की. शुरुआती जांच में ‘आरके कंसल्टेंसी’ नामक फर्म और उसके संचालक राकेश मंडावरिया का नाम सामने आया. उन्हें भी हिरासत में लिया गया.

राज्य सरकार पर उठे सवाल

Advertisement

यह भी पढ़ें

इस मामले में राजस्थान सरकार की देरी पर भी सवाल खड़े हुए हैं. 8 से 10 मई के बीच एसओजी को वायरल कंटेंट और असली पेपर में काफी समानताएं दिख गई थीं. इसके बावजूद राज्य सरकार ने तुरंत कोई अलर्ट जारी नहीं किया और न ही FIR दर्ज की. मामला तभी सुर्खियों में आया जब केंद्र ने जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया. इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि परीक्षा की सुरक्षा और छात्रों की मेहनत को कोई भी कमज़ोर नहीं कर सकता. वहीं यह कहानी यह भी दिखाती है कि सच्चाई आखिरकार सामने आती ही है, चाहे किसी भी रास्ते से क्यों न आए.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें