22 साल, 54 दौरे और 60 करोड़ का खर्च... BJP ने राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं पर लगाए गंभीर आरोप, पूछा- किसने की फंडिंग?
बीजेपी ने राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं को मुद्दा बना दिया है. बीजेपी का दावा है कि राहुल की विदेश यात्राओं का खर्च उनकी घोषित आय से कहीं ज्यादा है.
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वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की और खुद भी इसका पालन कर उदाहरण पेश किया. वहीं विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर हालात का पहले से आकलन न कर पाने और प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए. इसके जवाब में बीजेपी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है. बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों में जितनी विदेश यात्राएं की हैं, उनका खर्च उनकी घोषित आय से कहीं ज्यादा है. अब इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.
संबित पात्रा ने खोला राहुल गांधी की यात्राओं का रिकॉर्ड
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का पूरा ब्यौरा सामने रखा. पात्रा ने दावा किया कि साल 2004 से 2026 तक राहुल गांधी ने कुल 54 निजी विदेश यात्राएं की हैं. इन दौरों में अमेरिका, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी, वियतनाम, कंबोडिया, सिंगापुर, बहरीन, मालदीव, कतर और यूएई जैसे देशों के नाम शामिल हैं. बीजेपी का कहना है कि इन यात्राओं पर करीब 60 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए. पार्टी ने साफ किया कि इसमें सरकारी या संसदीय समितियों से जुड़ी यात्राएं शामिल नहीं हैं. पात्रा ने यह भी दावा किया कि हाल ही में 3 मई को राहुल गांधी बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के ओमान की राजधानी मस्कट भी गए थे, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं.
LIVE: BJP National Spokesperson Dr. @sambitswaraj addresses press conference at BJP headquarters, New Delhi. #WhoFundsRahul https://t.co/EIWTNC7L6a
— BJP (@BJP4India) May 14, 2026Advertisement
घोषित आय और खर्च के बीच अंतर पर उठे सवाल
बीजेपी ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामे का हवाला देते हुए बड़ा सवाल उठाया है. संबित पात्रा के मुताबिक पिछले दस असेसमेंट ईयर में राहुल गांधी की कुल घोषित आय करीब 11 करोड़ रुपये रही है. जबकि विदेश यात्राओं पर कथित खर्च 60 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की घोषित आय सीमित है तो फिर इतना बड़ा खर्च आखिर कौन उठा रहा है. पार्टी ने इसे 'घोषित आय और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर' बताया है. बीजेपी ने यह भी पूछा कि क्या इन यात्राओं के पीछे किसी विदेशी फंडिंग का हाथ है. यही सवाल अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है.
राहुल गांधी की विदेश यात्राएं: आय और खर्च का बेमेल गणित!
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और उनके आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड के बीच का विरोधाभास स्पष्ट है।
भारी खर्च: 2004-2026 के बीच 54 विदेश यात्राओं पर अनुमानित ₹60 करोड़ खर्च हुए।
हालांकि, उनकी घोषित आय मात्र ₹11 करोड़ दिखाई… pic.twitter.com/Rd0JJaH0rc— BJP (@BJP4India) May 14, 2026Advertisement
2015 की यात्रा का उदाहरण देकर बीजेपी ने साधा निशाना
बीजेपी ने साल 2015 की एक विदेश यात्रा का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी पर और तीखा हमला बोला. संबित पात्रा के मुताबिक उस साल राहुल गांधी साउथ ईस्ट एशिया के दौरे पर गए थे, जहां एक ही ट्रिप पर लगभग 4.5 करोड़ रुपये खर्च हुए. दिलचस्प बात यह बताई गई कि उसी वर्ष राहुल गांधी की घोषित वार्षिक आय करीब 86 लाख रुपये थी. बीजेपी ने दावा किया कि यह खर्च उनकी सालाना आय से कई गुना ज्यादा था. पार्टी का आरोप है कि यह अंतर कई गंभीर सवाल पैदा करता है. हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
बिजनेस क्लास का भी जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की लाइफस्टाइल पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आम होटलों में नहीं बल्कि फाइव स्टार प्रॉपर्टीज में रुकते हैं. उनके साथ तीन से चार लोगों की टीम रहती है और पूरा समूह बिजनेस क्लास में सफर करता है. पात्रा के मुताबिक स्थानीय यात्रा के लिए भी सामान्य टैक्सी के बजाय ड्राइवर वाली लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. बीजेपी ने दावा किया कि उन्होंने खर्च का आकलन “मिड ग्रेड सेक्शन” के आधार पर किया है ताकि आंकड़ों को संतुलित रखा जा सके.
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बताते चलें कि बीजेपी ने सिर्फ आर्थिक सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि इन यात्राओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से भी जोड़ दिया है. संबित पात्रा ने पूछा कि क्या राहुल गांधी ने एक सांसद होने के नाते इन विदेशी दौरों के लिए जरूरी अनुमति ली थी. उन्होंने कहा कि यदि किसी विदेशी स्रोत से फंडिंग हो रही है तो यह देश की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए बीजेपी इस मुद्दे को बड़े अभियान के रूप में आगे बढ़ा सकती है. वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की रणनीति बता सकती है. फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.
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