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हैवानियत की फैक्ट्री: 24 घंटे काम, लोहे की रॉड से पिटाई, मुजफ्फरनगर के बंधक मजदूरों की रूह कंपा देने वाली कहानी

मजदूरों को दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया, दिन रात काम करवाया जाता, जब नींद आती तो बेल्ट और लोहे के हथियारों से पीटा जाता, मोबाइल पहले ही छीन लिया गया. दाना-पानी दिया जाता तो बस इतना की जिंदा रहकर काम कर सकें.

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25 Jun 2026
( Updated: 25 Jun 2026
12:20 PM )
हैवानियत की फैक्ट्री: 24 घंटे काम, लोहे की रॉड से पिटाई, मुजफ्फरनगर के बंधक मजदूरों की रूह कंपा देने वाली कहानी
Image Source- Screengrab/Muzaffarnagar Police
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Muzaffarnagar Factory workers News: हर महीने 12 हजार वेतन, रहने और खाने का पूरा इंतजाम साथ में साप्ताहिक छुट्टी. ये ही लालच देकर देशभर से मजदूरों को UP के मुजफ्फरनगर की एक फैक्ट्री में काम करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन असल में ये फैक्ट्री इन मजदूरों के लिए जुल्म सेंटर बन गई. यहां वेतन नहीं बल्कि यातनाएं दी जाती थी. खाना छोड़िए पानी तक के लिए तरसाया जाता था. पुलिस और श्रम विभाग ने जॉइंट ऑपरेशन किया तो इन मजदूरों को जैसे मुक्ति मिली. मुजफ्फरनगर की इस फैक्ट्री से आजाद हुए 12 मजदूरों की कहानी हैरान और डराने वाली है. सिलसिवार जानें ये पूरा मामला. 

शरीर पर गहरे जख्म, डबडबाई आंखें, रूंधा गला और अंतहीन दर्द. 12 चेहरे और जुल्म की 12 कहानियां. देशभर से मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री से आजाद कराए गए इन मजदूरों ने जब अपना दर्द बयां किया तो पुलिस भी विचलित हो गई. फैक्ट्री में मजदूरों को दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया था, दिन रात काम करवाया जाता, जब नींद आती तो बेल्ट और लोहे के हथियारों से पीटा जाता, मोबाइल पहले ही छीन लिया जाता, दाना-पानी दिया जाता लेकिन बस इतना की जिंदा रहकर काम कर सकें और अगर यातना से बचकर भागने की कोशिश की तो बाहर पिटबुल डॉग का पहरा रखवाया जाता, जो देखते ही काट खाने को तैयार थे. 

21वीं सदी में जनरल डायर जैसा सुलूक 

ये मामला मुजफ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव का है. जहां कागज की प्लेट और डोने बनाने वाली फैक्ट्री से 12 बंधक मजदूरों को छुड़ाया गया. जिसमें नाबालिग भी शामिल थे. 
बताया जा रहा है यहां हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के साथ नेपाल के भी मजदूर काम कर रहे थे. इन्हें 12 हजार की सैलरी और रहने खाने पीने का लालच दिया जाता, लेकिन यहां लाने के बाद पैसे तो दूर की बात उन्हें यातनाएं देते हुए ना तो खाने को कुछ दिया जाता था और ना ही पीने को इसके साथ ही उनके आधार कार्ड मोबाइल फोन भी छीन लिए जाते थे. 

मजदूरों की जो तस्वीरें सामने आईं है उन्हें देखकर यकीन करना मुश्किल है कि हम 21वीं सदी में रह रहे हैं या जनरल डायर वाले अंग्रेजों के दौर में, जहां आज भी कामगारों को बंधक बनाकर, टॉर्चर कर काम करवाया जाता है. 

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इन सभी मजदूरों की निगरानी के लिए दो पिटबुल डॉग को भी इस फैक्ट्री में रखा गया था, ताकि डर से ये मजदूर फैक्ट्री से भागने की हिमाकत ना कर सकें. 

पुलिस तक कैसे पहुंची बात? 

बताया जा रहा है इस फैक्ट्री में मजदूर 2 साल से बंधक बनाकर रखे गए थे. एक दिन मौका देखकर एक मजदूर यहां से भागने में कामयाब रहा और पुलिस के पास पहुंचा. जिसके बाद लेबर डिपार्मेंट पुलिस और प्रशासनिक विभाग की संयुक्त टीमों ने कल इस फैक्ट्री पर छापेमारी की, छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री से रामू, विक्रम, नारायण, सीताराम, संतोष, शिवम जाटव, जगदीश, राजहंस, साहिल, रंजीत पासवान, दिलशाद, उज्जवल और सोनू चौहान कुल 12 मजदूरों को बंधन मुक्त कराया था. 

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यानी अगर एक मजदूर भाग नहीं पाता तो शायद ये भयावह सच दुनिया के सामने आ ही नहीं पाता. जानकारी के मुताबिक, इस फैक्ट्री में बंधक बना कर रखे गए इन मजदूरों में से एक की मौत भी हो चुकी है. जिसका नाम अर्जुन उर्फ टोपी है. इस मामले में पुलिस ने शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को अरेस्ट कर जेल भेज दिया है. जबकि अंकित बालियान की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. 

Photo- दो साल बाद मजदूरों ने किया भरपेट भोजन

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लोहे की रॉड, छड़ी और हथियार बरामद 

पुलिस ने जानकारी देते हुए फैक्ट्री से वो हथियार भी बरामद किए. जिससे बंधकों को पीटा जाता था, टॉर्चर किया जाता था. इन हथियारों में लोहे की बड़ी-बड़ी रॉड, छड़ी और अन्य हथियार शामिल थे. मजदूरों की कमर, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट के निशान मिले. 

मुक्त हुए मजदूरों ने सुनाया दर्द 

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बंधन मुक्त हुए पीड़ित मजदूरों ने बताया है कि तकरीबन 2 साल पहले उन्हें अलग-अलग राज्यों से पैसों का लालच देकर इस फैक्ट्री में लाया गया था, लेकिन यहां आने के बाद उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए थे. जिसके बाद इन्हें लगातार लाठी डंडों से पीट कर यातनाएं दी जाती थी और खाने के लिए 24 घंटे में एक बार सूखी रोटी दी जाती थी. 

 

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इन मजदूरों के लिए पुलिस देवदूत बनकर आई, पुलिस को देख मजदूर अपने आंसू नहीं रोक पाए. इतनी यातनाएं सहने के बाद ये लोग खुली हवा में सांस लेने की उम्मीद भी खो चुके थे. ये लम्हा इनके लिए नई जिंदगी मिलने जैसा था. इस ऑपरेशन में शामिल मुजफ्फरनगर SSP संजय कुमार वर्मा ने मजदूरों से मुलाकात की और माला पहनाई. 

SSP संजय कुमार वर्मा का कहना है लेबर कमिश्नर और एसपी आर ए के नेतृत्व में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया. छुड़ाए गए मजदूरों के शरीर पर काफी गंभीर काफी चोटों के निशान हैं. इन सभी मजदूरो को पुलिस ने खाना परोसा, फिर मेडिकल टेस्ट के लिए भेजा. उनकी काउंसिलिंग भी की जा रही है. जिन्हें इलाज की जरूरत है उन्हें अस्पताल भेजा गया है. वहीं, ज्यादातर मजदूरों को उनके घर रवाना कर दिया गया है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. जबकि फरार आरोपी पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है. 

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