अपनी दिनचर्या में आज ही से शामिल करें योग, शरीर को मिलेंगे अनगिनत फायदे
योग की शक्ति को आज पूरी दुनिया स्वीकार कर चुकी है। इसी वजह से योग की महत्ता को बरकरार रखने के लिए भारत में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली एम्स के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख उमा कुमार का मानना है कि सभी को योग का अभ्यास जरूर करना चाहिए।
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आजकल हमारा जो लाइफस्टाइल है उसमें थकान और बीमारियां हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही हैं। ऐसे में मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अपनी दिनचर्या में योग शामिल करना बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि जीवन में एक पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है।
योग की शक्ति को आज पूरी दुनिया स्वीकार कर चुकी है। इसी वजह से योग की महत्ता को बरकरार रखने के लिए भारत में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली एम्स के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख उमा कुमार का मानना है कि सभी को योग का अभ्यास जरूर करना चाहिए।
योग किस तरह से बीमारियों पर असर डालता है?
डॉ. उमा कुमार ने कहा कि आम तौर पर हमने रूमेटॉइड आर्थराइटिस और फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों पर योग का असर अलग-अलग पहलुओं में देखा है। हमने उन मरीजों पर दवाओं का असर भी देखा है, जो योग भी कर रहे थे। हमने पाया कि मरीजों में दवा का असर हुआ, मरीज बहुत खुश थे, उसे अच्छी नींद आती थी, उसमें नकारात्मकता कम थी, उसके जीवन की गुणवत्ता अच्छी थी, और उसे दर्द से काफी राहत मिली थी।
दूसरी बात यह है कि अगर हम सेलुलर लेवल (कोशिका स्तर) की बात करें तो जिन एपिजेनेटिक बदलावों की हम बात कर रहे थे, वे उनमें कम देखे गए, जीन एक्सप्रेशन और इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स भी उनमें कम देखे गए। इसके अलावा जो मरीज दवाएं भी ले रहे थे, उनमें ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम देखा गया। सेलुलर फंक्शन भी बेहतर हुआ, जैसा कि हम कहते हैं, माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन में भी सुधार हुआ। तो कुल मिलाकर, योग न सिर्फ शारीरिक सेहत को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक सेहत को भी सुधारता है।
गठिया के मरीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, "मैं कहूंगी कि यह बहुत जरूरी है, क्योंकि योग हमें वे सभी चीजें देता है, जिनके बारे में हमने अभी बात की है। और किसी भी व्यक्ति के लिए अच्छी जिंदगी जीना बहुत जरूरी है, चाहे आप किसी ग्रुप के साथ यात्रा कर रहे हों या किसी और के साथ। तो योग इसमें बहुत बड़ा योगदान देता है। इसलिए सिर्फ गठिया के मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि आप, मैं हम सभी को नियमित रूप से योग को अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहिए और निश्चित रूप से इसके लिए कुछ समय निकालना चाहिए।"
दिल्ली एम्स की एक अन्य डॉक्टर ने गठिया के मरीजों में योग के लाभ के बारे में बताया कि योग से फ्लेक्सिबिलिटी बहुत बेहतर होती है, जिसे हमने गोनियोमीटर से देखा है। हम रिकॉर्ड करते हैं कि हम कितने जोड़ों को हिला पा रहे हैं। तो हमने देखा कि योग के बाद इन मरीजों में सूजन (इन्फ्लेमेशन) भी कम हुई और रेंज ऑफ मोशन यानी वे अपने जोड़ों को कितना हिला पा रहे हैं, उसमें भी सुधार हुआ।
जोड़ों के दर्द को लेकर उन्होंने कहा कि दिल्ली एम्स की रिसर्च में देखा गया है कि अगर हम सुपरवाइज्ड योग (किसी की देखरेख में योग) करते हैं तो जोड़ों के दर्द में फायदा होता है, ऐसा नहीं है कि हम कोई भी योग एक्सरसाइज कर लें। अगर हम सुपरवाइज्ड तरीके से एक्सरसाइज करते हैं तो हमें बेहतर राहत मिलती है। निश्चित रूप से काफी सुधार होता है। जोड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।
उन्होंने कहा कि पीठ दर्द वाले मरीजों के लिए भुजंगासन और शलभासन की सलाह दी जाती है, साथ ही हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, बॉडी रोटेशन और गर्दन के लिए ढीला करने वाली एक्सरसाइज भी कराई जाती हैं। इन एक्सरसाइज से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर की गतिशीलता (मोबिलिटी) बेहतर होती है।
खाली समय में जितना हो सके योग करें
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार योग को लेकर जो पहल कर रही है कि वह बहुत अच्छी पहल है, जिसकी शुरुआत हमारे ही देश में हुई थी, इसलिए हमें यह एक्सरसाइज करनी चाहिए और हर किसी को इसे करना चाहिए। हमें अपने खाली समय में जितना हो सके योग करना चाहिए।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.