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भागदौड़ भरी जिंदगी में दिमाग को कैसे रखें शांत? अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय
मानसिक स्वास्थ्य की बात होने पर अक्सर लोग इसे केवल डिप्रेशन या एंग्जायटी तक सीमित मान लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को देखने का नजरिया अलग है। आयुर्वेद में इसे मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। जब हमारी जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर हमारी सोच, निर्णय लेने की क्षमता और शारीरिक सेहत पर दिखाई देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली के साथ कुछ पारंपरिक योग और आयुर्वेदिक अभ्यास मन को शांत रखने में मददगार हो सकते हैं।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान बेहद आम समस्याएं हैं। काम का दबाव, डेडलाइन्स, देर रात तक स्क्रीन के सामने वक्त बिताना जिसकी वजह से नींद पूरी न होना और अनियमित दिनचर्या हमारे दिमाग को हर पल थकाती रहती है।
मानसिक स्वास्थ्य की बात होने पर अक्सर लोग इसे केवल डिप्रेशन या एंग्जायटी तक सीमित मान लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को देखने का नजरिया अलग है। आयुर्वेद में इसे मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। जब हमारी जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर हमारी सोच, निर्णय लेने की क्षमता और शारीरिक सेहत पर दिखाई देता है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली के साथ कुछ पारंपरिक योग और आयुर्वेदिक अभ्यास मन को शांत रखने में मददगार हो सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या करें?
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आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन जैसी प्रक्रियाओं को महत्व दिया जाता है। शिरोधारा में माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की धार डाली जाती है। यह प्रक्रिया बेहद आरामदायक मानी जाती है और व्यक्ति को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकती है। इसी तरह शिरो अभ्यंग यानी औषधीय तेल से सिर की मालिश भी तनाव और थकान के बीच सुकून देने वाली प्रक्रिया हो सकती है।
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रोज़ाना कुछ समय के लिए करें ध्यान
ध्यान यानी ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास मन को शांत करने और विचारों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। रोजाना कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करने से व्यक्ति अपने मन पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पाता है। वहीं, प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का अभ्यास किया जाता है। नियमित रूप से किए जाने वाले प्राणायाम और योगासन शरीर को सक्रिय रखने के साथ मानसिक रूप से भी हल्का और संतुलित महसूस कराने में मदद कर सकते हैं।
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हालांकि इन अभ्यासों को स्वस्थ खान-पान, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या के साथ अपनाना ज्यादा उपयोगी माना जाता है। किसी भी आयुर्वेदिक उपचार या औषधीय प्रक्रिया को विशेषज्ञ की सलाह से ही अपनाना चाहिए।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.