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सौरव दास के 'असली नाम' का मद्रास हाई कोर्ट में भंडाफोड़! अब माता-पिता के बैकग्राउंड की भी होगी जांच! नोटिस जारी
मद्रास हाई कोर्ट में सौरव दास के 'असली नाम' का राज खुल गया है. इतना ही नहीं अब दास के माता-पिता के बैकग्राउंड की भी जांच हो सकती है. हाई कोर्ट ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है.
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'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास को लेकर बड़ी ख़बर सामने आ रही है. मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका में दास की राष्ट्रीयता और की जांच की मांग की गई है. इसके बाद कोर्ट ने इसको लेकर नोटिस भी जारी किया है. इतना ही नहीं कोर्ट में सौरव दास की ओर से कथित तौर पर न्यायपालिका के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की भी मांग की गई.
मद्रास हाई कोर्ट में याचिका कर्ता ने आगे मांग की है कि अगर जांच में सौरव दास विदेशी नागरिक पाए जाते हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द कर दिया जाए. आपको बता दें कि बीते दिनों दास की ओर से कथित तौर पर न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिया गया था.
बार एंड बेंच की ख़बर के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने दास, केंद्र सरकार और कुछ निजी पक्षों सहित कई प्रतिवादियों से जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी.
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सौरव दास का आधिकारिक नाम याचिका में योगेश शर्मा का चला पता!
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बकौल बार एंड बेंच याचिकाकर्ता गणेश कुमार ने आरोप लगाया है कि दास ने न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए हैं. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सौरव दास को उनके आधिकारिक नाम योगेश शर्मा के रूप में संबोधित किया है.
गणेश ने याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश देने की मांग की है कि वे दास और उसके माता-पिता सहित कई लोगों की पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत विवरणों की जांच करें.
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मद्रास हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को जारी किया नोटिस
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका के साथ संलग्न कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया, जो कथित तौर पर दास की पहचान और पते से जुड़े हैं. बेंच ने इन दस्तावेजों की जांच की और उनमें दर्ज कुछ जानकारियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा.
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इस दौरान वकील ने कोर्ट का ध्यान सौरव दास की ओर से न्यायपालिका के खिलाफ दिए गए बयानों की ओर भी दिलाया. बेंच ने इन बयानों को देने के तरीके पर सवाल उठाया. इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने इस संबंध में अधिकारियों के पास कोई शिकायत दर्ज कराई है. इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि एक शिकायत पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
सौरव दास के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक होंगे?
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याचिका में 7 अक्टूबर, 2026 की एक शिकायत का जिक्र किया गया है और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे कोर्ट द्वारा तय की गई एक उचित समय-सीमा के भीतर इस पर कार्रवाई करें. जांच के अलावा, याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को निर्देश देने की भी मांग की है कि वे 'सौरव दास' नाम से चल रहे X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम अकाउंट्स को ब्लॉक करें.
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याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि दास को न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आगे कोई अपमानजनक बयान देने से रोका जाए. शुरुआती दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने आज इस मामले में नोटिस जारी किया है.