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'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को छोड़कर, सभी विचारों का सम्मान', सबरीमाला मामले में SC की टिप्पणी, शशि थरूर का हुआ जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वो प्रख्यात व्यक्तियों और न्यायविदों के विचारों का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी" के माध्यम से प्रसारित होने वाली जानकारी को विश्वसनीय या स्वीकार्य नहीं माना जा सकता.
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सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने धार्मिक स्वतंत्रता और सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान बेहद ही दिलचस्प टिप्पणी की. कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा है कि ज्ञान के सभी स्त्रोतों का सम्मान है. लेकिन Whatsapp University का ज्ञान कोर्ट में स्वीकार नहीं.
‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की जानकारी स्वीकार्य नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वो प्रख्यात व्यक्तियों और न्यायविदों के विचारों का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी कि "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी" के माध्यम से प्रसारित होने वाली जानकारी को विश्वसनीय या स्वीकार्य नहीं माना जा सकता.
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किन 9 जजों की संविधान पीठ ने की मामले की सुनवाई
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नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह टिप्पणी केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों द्वारा पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और सीमा से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की. पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, एम एम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्य बागची शामिल हैं.
कांग्रेस नेता शशि थरूर का हुआ जिक्र
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दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रमुख का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा लिखित एक लेख का हवाला दिया. पीठ को बताया गया कि कांग्रेस नेता के लेख में धार्मिक राहत के मामलों में न्यायिक संयम पर चर्चा की गई है.
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, "हम सभी प्रख्यात व्यक्तियों, न्यायविदों आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत राय व्यक्तिगत राय होती है.” कौल ने कहा कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता किसी भी स्रोत, किसी भी देश, किसी भी विश्वविद्यालय से आए, उसका स्वागत किया जाना चाहिए.
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न्यायमूर्ति नागरत्ना ने ली चुटकी
कौल ने कहा, "एक सभ्यता के रूप में हम इतने समृद्ध हैं कि ज्ञान और सूचना के सभी रूपों को स्वीकार करने में हमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए" न्यायमूर्ति नागरत्ना ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं.”
वकील नीरज किशन कौल ने जवाब में क्या कहा?
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कौल ने कहा कि वह इस बहस में नहीं पड़ रहे हैं.कौल ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि कौन सा विश्वविद्यालय अच्छा है या बुरा, जो वास्तव में इस बहस के लिए अप्रासंगिक है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुद्दा केवल इतना है कि ज्ञान और सूचना कहीं से भी आए, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए.
धार्मिक प्रथाओं पर क्या है कोर्ट का नजरिया?
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22 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदू समाज में एकता का आग्रह किया और "वे हमारे मंदिर में नहीं आ सकते और हम उनके मंदिर में नहीं जा सकते" जैसी विभाजनकारी सोच के प्रति आगाह किया. सबरीमाला पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि किसी न्यायिक मंच के लिए किसी धार्मिक संप्रदाय की आवश्यक और गैर-आवश्यक प्रथाओं को अलग करने वाले मापदंडों को परिभाषित करना अत्यंत कठिन है - यदि असंभव नहीं तो.”