‘युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है’, छात्रों का समर्थन कर कंगना पर क्या बोल गए अशुतोष राणा, बोले- भाषा के ऊपर काम…
कंगना रनौत द्वारा जेन जी जनरेशन को गटर कहने वाले बयान पर आशुतोष राणा ने कहा मुझे लगता है कि भाषा का बहुत महत्व है. बातों से ही हमें सम्मान मिलता है और बातों से ही अपमान तो मेरा मानना है कि हम सभी को भाषा के ऊपर काम करना चाहिए.
Follow Us:
एक्टर आशुतोष राणा ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया के साथ बातचीत के दौरान नितेश तिवारी की आगामी फिल्म 'रामायण', छात्र प्रोटेस्ट और कंगना रनौत द्वारा जेन जी को गटर जनरेशन कहने पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ये छात्र ही आने वाले समय में देश का भविष्य होंगे. अगर वे अपने भविष्य की मांगें कर रहे हैं, तो उसे सुना जाए.
‘युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है’
आशुतोष राणा ने क्रांति और आंदोलन के बीच का फर्क समझाते हुए कहा, "विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र बस अपनी इच्छाओं की मांग कर रहे हैं. युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है. वह अपने उज्ज्वल भविष्य की मांग रख रही हैं.आंदोलन विषयगत होता है जो कुछ समय के लिए किया जाता है. इसमें पढ़े-लिखे लोगों को सजग किया जाता है, साथ ही, बदलाव के लिए विवश किया जाता है. मेरा मानना है कि युवा हमारे देश का भविष्य ही तो हैं. वे हमारे ही तो बच्चे हैं. आने वाले समय में उन्हीं के हाथों में राष्ट्र दिया जाएगा. जैसे एक बात कही जाती है, पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच वैचारिक मतभेद हैं. मुझे लगता है कि हर पीढ़ी की अपनी समझ होती है."
‘हम सभी को भाषा के ऊपर काम करना चाहिए’
कंगना रनौत द्वारा जेन जी जनरेशन को गटर कहने वाले बयान पर आशुतोष राणा ने कहा, "मुझे लगता है कि भाषा का बहुत महत्व है. बातों से ही हमें सम्मान मिलता है और बातों से ही अपमान तो मेरा मानना है कि हम सभी को भाषा के ऊपर काम करना चाहिए."
रामायण की ट्रोलिंग पर क्या बोले आशुतोष?
यह भी पढ़ें
इसी के साथ बातचीत के दौरान मीडिया ने जब उनसे नितेश तिवारी की आगामी फिल्म 'रामायण' को लेकर चल रही ट्रोलिंग पर पूछा तो उन्होंने बड़ी ही शालीनता से जवाब दिया. उन्होंने कहा, "मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम पर जितना बनाया जाए और लिखा जाए उतना कम है. हजारों वर्षों से उन पर बनाया और लिखा जा रहा है. प्रत्येक व्यक्ति ने बनाते वक्त यही बात लिखी है कि हमारी दृष्टि की सीमा है उनकी सृष्टि की कोई सीमा नहीं है. तो हमें अपनी-अपनी दृष्टि की सीमा को उनकी दृष्टि की सीमा मानकर बना लेना चाहिए. मुझे लगता है कि अभी तक किसी ने उसे देखा नहीं है और किसी भी चीज को बिना देखे उस पर चर्चा करना नीतिपूर्ण व्यवहार नहीं है. देखिए प्रभु श्रीराम की कथा इतनी अच्छी ही है कि वो सभी को आनंद देगी. निश्चित रूप से जब वो आएगी, तो वो सभी को आनंद देगी."