Advertisement
‘खान नहीं लिखवाना चाहती थी’, मुस्लिम डायरेक्टर से शादी के बाद भी नहीं बदला सरनेम, बच्चों के धर्म को भी किया रिवील
Kabir Khan-Mini Mathur: हॉटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शादी, परिवार और बच्चों की परवरिश को लेकर खुलकर बात की और बताया कि उनके घर में अलग-अलग संस्कृतियों को किस तरह सम्मान दिया जाता है.
Advertisement
Kabir Khan-Mini Mathur: फेमस टीवी होस्ट और वीजे रह चुकीं मिनी माथुर अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहती हैं. उन्होंने फिल्ममेकर कबीर खान से लव मैरिज की थी.दोनों अलग-अलग धर्मो और सांस्कृतिक बैक्ग्राउन्ड से आते हैं, लेकिन मिनी के मुताबिक उनके रिश्ते में धर्म कभी दीवार नहीं बना. हाल ही में हॉटरफ्लाई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शादी, परिवार और बच्चों की परवरिश को लेकर खुलकर बात की और बताया कि उनके घर में अलग-अलग संस्कृतियों को किस तरह सम्मान दिया जाता है.
मिनी ने नहीं बदला अपना सरनेम
मिनी ने बताया कि शादी के बाद उन्होंने अपना सरनेम नहीं बदला और कबीर ने भी उनसे ऐसा करने के लिए कभी दबाव नहीं बनाया. उनका कहना है कि वह अपने पासपोर्ट पर अपना नाम बदलकर ‘मिनी कबीर खान’ नहीं लिखना चाहती थीं. यहां तक कि उन्होंने अपने बच्चों के नाम को लेकर भी यही सोच रखी. मिनी के मुताबिक, बच्चों के पासपोर्ट पर सिर्फ माता या पिता का सरनेम रखने के बजाय उन्होंने दोनों नामों को लेकर अपनी अलग सोच रखी. उन्होंने बताया कि इस वजह से उन्हें लंबे समय तक किसी सरकारी प्रक्रिया में खास परेशानी नहीं हुई.
Advertisement
पिता को कबीर पहली नजर में पसंद आ गए थे
Advertisement
मिनी ने अपनी और कबीर की पहली मुलाकात के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह एक पारंपरिक परिवार से आती हैं, जहां शादी को लेकर कई तरह की पारिवारिक उम्मीदें थीं. जब कबीर उनके घर आने लगे तो वह उनके पिता से अपनी यात्राओं और किताबों से जुड़ी बातें किया करते थे. मिनी के पिता कबीर की बातों से काफी प्रभावित हुए.
ईशा कोप्पिकर के समर्थन में उतरीं कंगना, ‘अंधभक्त’ वाले बयान पर बोलीं- मैं भी भक्त हूं!
जब मिनी ने अपने पिता को बताया कि कबीर मुस्लिम हैं, तो उन्हें लगा कि शायद परिवार इस रिश्ते के खिलाफ होगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मिनी के पिता ने उल्टा कबीर को पसंद किया और उनकी मां से बात करने की बात तक कह दी. मिनी के मुताबिक, आखिरकार दोनों परिवारों की खुशी और सहमति से उनकी शादी हुई और शादी में दोनों परिवारों की संस्कृतियों की खूबसूरत झलक देखने को मिली.
Advertisement
घर में दोनों संस्कृतियों का सम्मान
मिनी कहती हैं कि वह खुद बहुत धार्मिक नहीं हैं, लेकिन बचपन से जिन परंपराओं के बीच पली-बढ़ी हैं, उनसे उनका भावनात्मक जुड़ाव है. इसलिए वह करवा चौथ, हवन या अहोई जैसे त्योहारों और परंपराओं को अपनी पसंद से निभाती हैं. वहीं कबीर और उनका परिवार अपनी संस्कृति से जुड़ी परंपराओं का सम्मान करता है. दोनों के बीच कभी धर्म को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं रहा.
बच्चों को धर्म से ज्यादा इंसानियत सिखाई
Advertisement
यह भी पढ़ें
जब मिनी से पूछा गया कि उनके बच्चे किस धर्म को मानते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने बच्चों पर किसी एक धर्म को अपनाने का दबाव नहीं डाला. उनके लिए सबसे जरूरी बात इंसानियत है. मिनी ने बताया कि उनके घर में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाता है और बच्चों को भी यही सीख दी गई है कि इंसान होना सबसे बड़ी पहचान है.
मिनी और कबीर के दो बच्चे हैं, विवान और सायरा. दोनों ने मिलकर अपने बच्चों को अलग-अलग संस्कृतियों से परिचित कराया है और उन्हें अपनी पसंद से चीजों को समझने की आजादी दी है.