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UP में कहां है प्राचीन नारायण मंदिर, जहां भगवान विष्णु ने सबसे पहले रखा था कदम, जानें इसका रहस्य

आदि केशव मंदिर, जो काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है. भगवान विष्णु के केशव स्वरूप को समर्पित यह मंदिर गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है. स्कंद पुराण के अनुसार, यह ऐसा पवित्र स्थल है, जहां से भगवान विष्णु ने सबसे पहले काशी में प्रवेश किया था.

UP में कहां है प्राचीन नारायण मंदिर, जहां भगवान विष्णु ने सबसे पहले रखा था कदम, जानें इसका रहस्य
Adi keshav (Image : UP Tourism)
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देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी को देवों की नगरी भी कहा जाता है. यहां स्थित छोटे-बड़े हर मंदिर की अपनी एक कथा और भक्तिभाव से भरपूर मान्यता भी है. गंगा और वरुणा नदी के संगम पर नारायण को समर्पित अति प्राचीन मंदिर स्थित है. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने काशी में सबसे पहले यहीं पर कदम रखा था. 

कहां है आदि केशव मंदिर?

हम बात कर रहे हैं आदि केशव मंदिर की, जो काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है. भगवान विष्णु के केशव स्वरूप को समर्पित यह मंदिर गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है. स्कंद पुराण के अनुसार, यह ऐसा पवित्र स्थल है, जहां से भगवान विष्णु ने सबसे पहले काशी में प्रवेश किया था. 

टेंपल का नाम आदि केशव मंदिर कैसे पड़ा? 

मंदिर को लेकर पौराणिक कथा भी है. कहा जाता है कि भगवान शिव एक बार मंदार पर्वत चले गए थे. तब काशी खाली हो गई. ब्रह्माजी के आदेश पर दिवोदास नामक धर्मात्मा राजा ने काशी पर शासन संभाला. राजा दिवोदास इतने अच्छे शासक थे कि काशी में कोई दुख या समस्या नहीं रह गई. भगवान गणेश ने ब्राह्मण का रूप धारण कर राजा को प्रभावित करने के साथ ही काशी का भ्रमण किया और यहीं पर रह गए, जब वह कैलाश नहीं लौटे तो भगवान शिव पुत्र के लिए चिंतित हुए और नारायण से सहायता मांगी. अंत में भगवान विष्णु और लक्ष्मी गरुड़ के साथ काशी पहुंचे. उन्होंने वरुणा नदी और गंगा नदी के संगम पर स्नान किया. उसी स्थान पर उन्होंने शिवलिंग स्थापित कर पूजा की. उस समय से इसे आदि केशव मंदिर कहा जाने लगा. इस संगम को पदोदक तीर्थ भी कहा जाता है. 

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यहां की मूर्ति स्वयं भगवान विष्णु द्वारा स्थापित मानी जाती है

आदि केशव मंदिर काशी के 16 केशव मंदिरों में सबसे प्रमुख है. यहां की मूर्ति स्वयं भगवान विष्णु द्वारा स्थापित मानी जाती है. यह मंदिर सदियों से आस्था और भक्ति का केंद्र है. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इसे सैन्य चौकी बनाया था. बाद में ग्वालियर के सिंधिया वंश ने इसका जीर्णोद्धार करवाया. मंदिर परिसर में आदि केशव के अलावा ज्ञान केशव, संगमेश्वर शिव और पंचदेव मंदिर भी हैं. संगमेश्वर शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान विष्णु ने की थी. 

मंदिर में दर्शन करने का सही समय

मंदिर सुबह 6 बजे से 12 बजे तक और शाम 4 बजे से 10 बजे तक खुला रहता है. आदि केशव मंदिर वाराणसी के पुराने शहर में स्थित है, जो राजघाट के पास वरुण-गंगा संगम पर है. स्थानीय लोग इसे आदि केशव घाट या राजघाट के नाम से जानते हैं।

कैसे करें इस मंदिर के दर्शन

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अन्य शहरों से निजी वाहन से यात्रा कर सकते हैं या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं. कई सामान्य बसें नियमित चलती हैं, जिससे मंदिर तक जाया जा सकता है. रिक्शा या ऑटो वाले को राजघाट या आदि केशव घाट बताएं तो आसानी से पहुंच सकते हैं. मंदिर में वारुणी मेला, अंतग्रही मेला, महाबरनी मेला और वामन द्वादशी जैसे त्योहार मनाए जाते हैं. 

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