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कहां है नारायण के पदचिन्हों पर बना ये दिव्य मंदिर, पितरों को मोक्ष की होती है प्राप्ति

पितरों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर श्रद्धालु विशेष रूप से पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं. ऐसे में बिहार के गया शहर में स्थित विष्णुपद मंदिर भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है.

कहां है नारायण के पदचिन्हों पर बना ये दिव्य मंदिर, पितरों को मोक्ष की होती है प्राप्ति
Image Credits:Vishnu pad Mandir Gaya/ Bihar tourism department/Portal
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भगवान विष्णु को प्रिय पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) चल रहा है। इस महीने में दान-पुण्य के साथ ही नारायण के दर्शन-पूजन का भी विशेष विधान है। दुनियाभर में भगवान विष्णु को समर्पित कई देवालय हैं, जो अध्यात्म के साथ ही चमत्कारी कथा के साथ भी जुड़े हुए हैं। ऐसा ही एक दिव्य मंदिर बिहार के गया जिले में स्थित है, जो नारायण के पदचिन्हों पर बना है और मंदिर का संबंध पितरों से भी है।  

 यह मंदिर भगवान विष्णु के पावन पदचिन्हों पर बना है 

पितरों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर श्रद्धालु विशेष रूप से पवित्र स्थलों की यात्रा करते हैं। ऐसे में बिहार के गया शहर में स्थित विष्णुपद मंदिर भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह मंदिर भगवान विष्णु के पावन पदचिन्हों पर बना है और यहां पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। विष्णुपद मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है।

भगवान विष्णु ने यहां गयासुर नामक राक्षस को मोक्ष प्रदान किया था

मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां गयासुर नामक राक्षस को मोक्ष प्रदान किया था। उसी स्थान पर उनके चरणों के निशान आज भी शिला पर अंकित हैं। मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप 18वीं शताब्दी में मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाया गया था।

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भक्त यहां क्या चढ़ाकर पूजा करते हैं

मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक है। लाल पत्थरों से निर्मित इस मंदिर का शिखर, नक्काशीदार स्तंभ और भगवान विष्णु की चरण पादुका दर्शनार्थियों को शांति प्रदान करती है। मंदिर के गर्भगृह में रखी शिला पर भगवान विष्णु के दोनों चरण स्पष्ट दिखाई देते हैं। भक्त यहां फूल, चंदन और दूध समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर पूजा करते हैं।

नारायण के इस मंदिर का संबंध पितरों की मुक्ति से भी जुड़ा हुआ है

नारायण के इस मंदिर का संबंध पितरों की मुक्ति से भी जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म में पिंडदान की परंपरा विशेष महत्व रखती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां दिए गए पिंड से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में ब़ड़ी संख्या में श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर स्नान कर पिंडदान करते हैं। इस स्थान को पितरों की आत्मा को शांति पहुंचाने वाला माना जाता है।

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कैसे करने पहुंचे मंदिर के दर्शन

विष्णुपद मंदिर गया जंक्शन रेलवे स्टेशन से मात्र 4-5 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। पटना एयरपोर्ट से गया की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से भी गया पहुंचना सुविधाजनक है। मंदिर सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।

विष्णुपद मंदिर के आसपास कई अन्य पवित्र स्थल हैं

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विष्णुपद मंदिर के आसपास कई अन्य पवित्र स्थल हैं, जो यात्रियों को आध्यात्मिक और पर्यटन दोनों अनुभव देते हैं। यहां पास में ही देवी गौरी को समर्पित मंगला गौरी मंदिर, है, जहां शक्ति पूजा की जाती है। पास में ही ब्रह्मयोनि पर्वत भी है। गया के पास स्थित यह पर्वत आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं, महाबोधि मंदिर (बोधगया) लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है, जो बौद्ध तीर्थ स्थल है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है, यहीं महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। अक्षय वट भी गया में ही है, जो पितरों के लिए विशेष पूजा का स्थान है।

मंदिर घूमने के लिए सबसे अच्छा समय क़ौन सा है

सितंबर से अप्रैल तक का समय विष्णुपद मंदिर घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। गर्मियों में तपन ज्यादा होती है, इसलिए इस मौसम से बचना बेहतर है। वहीं, मंदिर जानें की योजना बना रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण नियमों को ध्यान देना भी जरूरी है। मंदिर में मोबाइल फोन, कैमरा समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ले जाना प्रतिबंधित है। श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण और सात्विक वातावरण के साथ प्रवेश की अनुमति मिलती है।

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भक्त बड़ी संख्या में नारायण के दर्शन को मंदिर आते हैं

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विष्णुपद मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद आकर्षक है। यहां आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्राचीन वास्तुकला और फल्गु नदी के सुंदर नजारे का भी आनंद लेते हैं। आम दिनों व पुरुषोत्तम मास के साथ ही पूर्णिमा, अनंत चतुर्दशी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी समेत अन्य विशेष तिथियों पर भी भक्त बड़ी संख्या में नारायण के दर्शन को मंदिर आते हैं।

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