Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

23 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शुक्रवार को इस समय रहेगा राहुकाल, जानें दिनभर का शुभ-अशुभ समय

शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

Image Credit: AI Generated
Loading Ad...

हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 

23 अक्टूबर का पंचांग

23 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 2:36 बजे तक रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी. शुक्रवार को सुबह 6:31 बजे सूर्योदय और शाम 5:51 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, दोपहर 3:56 बजे चंद्रोदय और तड़के 4:24 बजे चंद्रास्त होगा.

Loading Ad...

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है. सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है. नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना की जाती है. प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं.

Loading Ad...

शुक्रवार रात 10:08 बजे तक ध्रुव योग रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, ध्रुव योग 27 नित्य योगों में से 12वें नंबर का एक बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है. यह योग स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है. इसमें किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता और उसका शुभ परिणाम मिलता है. इस योग के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु और ग्रह स्वामी पृथ्वी या गुरु/केतु माने गए हैं.

सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

Loading Ad...

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

अमृतकाल

शुक्रवार को दोपहर 12:57 से 2:33 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

Loading Ad...

इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से 12:11 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

शुक्रवार को यमगंड काल दोपहर 3:01 से 4:26 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.

गुलिक काल

Loading Ad...

इस दिन गुलिक काल सुबह 7:56 से दोपहर 9:21 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना, या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

शुक्रवार को सूर्य वृश्चिक राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के वृश्चिक राशि (जो मंगल की राशि है) में रहने या गोचर करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व, करियर और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. वृश्चिक एक जल राशि है. इसमें सूर्य के आने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति गहरी, चिंतनशील और रहस्यमयी हो जाती है. पिछले समय के मानसिक तनाव या डर से बाहर निकलने की शक्ति मिलती है.

इस दिन चंद्र देव मीन राशि से दोपहर 3:53 बजे मेष राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा मेष राशि (जिसके स्वामी मंगल हैं) में स्थित होता है, तो इसका व्यक्ति के मन, स्वभाव और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. व्यक्ति के भीतर गजब का उत्साह, आत्मविश्वास और साहस देखने को मिलता है. उसमें आगे बढ़कर काम करने और नेतृत्व करने का प्राकृतिक गुण होता है.

Loading Ad...

पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें

यह भी पढ़ें

शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...