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महाकाल की नगरी में इन सात पवित्र कुंडों की यात्रा करना मत भूलिएगा, स्नान करने से पापों का होगा नाश, स्वर्ग की होगी प्राप्ति

उज्जैन सिर्फ काल को टालने के लिए नहीं, बल्कि तन और मन के पापों को धोने के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां रुद्र सागर से लेकर रत्नाकर सागर तक एक ही राज्य में मिल जाएंगे. खास बात यह भी है कि यह सप्तसागर सिर्फ वहां की जलाशय प्रणाली का हिस्सा नहीं है, बल्कि सबका अपना आध्यात्मिक महत्व भी है, जिनका जिक्र विष्णु पुराण और स्कंद पुराण तक में किया जा चुका है.

महाकाल की नगरी में इन सात पवित्र कुंडों की यात्रा करना मत भूलिएगा, स्नान करने से पापों का होगा नाश, स्वर्ग की होगी प्राप्ति
Image Credits: Sapta Sagar/ Instagram/view_with_sakshi
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हमारे देश में मंदिर से लेकर सरोवर तक का पौराणिक महत्व है.  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में जितना महत्व महादेव के मंदिरों का है, उतना ही सप्त सागर का है. 

उज्जैन तन और मन के पापों को धोने के लिए भी प्रसिद्ध है

उज्जैन सिर्फ काल को टालने के लिए नहीं, बल्कि तन और मन के पापों को धोने के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां रुद्र सागर से लेकर रत्नाकर सागर तक एक ही राज्य में मिल जाएंगे. खास बात यह भी है कि यह सप्तसागर सिर्फ वहां की जलाशय प्रणाली का हिस्सा नहीं है, बल्कि सबका अपना आध्यात्मिक महत्व भी है, जिनका जिक्र विष्णु पुराण और स्कंद पुराण तक में किया जा चुका है. 

पाप, रोग और परेशानियों से मुक्ति दिलाएंगे उज्जैन के सप्तसागर

उज्जैन में 'सप्त सागर' सात कुंडों या सरोवरों की एक शृंखला है. हर कुंड का अपना पौराणिक महत्व है, जो सातों कुंडों को अलग बनाता है. अधिकमास में सातों सरोवर का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि अधिकमास में अगर कोई भी इन सप्त सागर की परिक्रमा और स्नान करता है, तो सभी पापों, परेशानियों और रोगों से मुक्ति मिलती है. अगर आप महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं, तो इन सात पवित्र कुंडों की यात्रा करना मत भूलिएगा.

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उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं सप्तसागर

उज्जैन में रुद्रसागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर, पुरुषोतम सागर और पुष्कर सागर मौजूद हैं. यह सभी सागर उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं.

रुद्रसागर

पहले बात करते हैं रुद्रसागर की. यह तालाब महाकाल मंदिर के बिल्कुल पीछे है और बाबा के दर्शन के बाद इस तालाब में स्नान करने से सारे पापों का नाश होता है. 

क्षीरसागर 

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क्षीरसागर को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का निवास स्थान कहा जाता है. इस तालाब में स्नान के बाद खीर के दान का बहुत महत्व है. माना जाता है कि यहां किया गया दान सारे पापों को नष्ट करने की क्षमता रखता है.

गोवर्धन सागर

गोवर्धन सागर भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा है, जहां स्नान करने के बाद मिश्री-माखन और कपड़ों का दान करने का महत्व है. 

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रत्नाकर सागर

वहीं रत्नाकर सागर को रत्नों का सागर कहा जाता है, जो क्षिप्रा नदी की सहायक नदी पिंगला में मिलकर पानी के स्तर को बढ़ाता है. इस तालाब में भी स्नान करने से पापों का नाश होता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

रोगों और परेशानियों से मिलेगा छुटकारा 

विष्णु सागर, पुरुषोतम सागर और पुष्कर सागर का भी अपना पौराणिक महत्व है. इन सभी तालाबों में स्नान करने से सभी रोगों और परेशानियों से छुटकारा मिलता है. 

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