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चैत्र नवरात्रि स्पेशल: यहां तीन प्रहर होती है मां के तीन शक्तिशाली रूपों की पूजा, चर्म रोग से लेकर मानसिक रोगों से मिलती है मुक्ति

केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि के पास लगभग 100 साल पुराना मंदिर चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर है, जहां आज भी मां के चमत्कारों की गूंज सुनाई देती है. चोट्टानिक्करा भगवती को चर्म रोग की देवी माना जाता है, जो भक्तों को चर्म रोग से निदान दिलाने का आशीर्वाद देती है. मंदिर की खास बात है मंदिर की पूजा विधि. मंदिर में मां के दिन रूपों की पूजा की जाती है, जो हर प्रहर के बाद बदल जाती है.

चैत्र नवरात्रि स्पेशल: यहां तीन प्रहर होती है मां के तीन शक्तिशाली रूपों की पूजा, चर्म रोग से लेकर मानसिक रोगों से मिलती है मुक्ति
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उत्तर भारत में चैत्र के महीने में देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगती है, क्योंकि नौ दिन मां के नौ रूपों की आराधना की जाती है. चैत्र नवरात्रि में मां भगवती के शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में अलग ही रौनक देखने को मिलती है. 

इस जगह तीन अलग रूपों में पूजा की जाती है माता रानी

वैसे ही दक्षिण भारत में कई मंदिर मौजूद हैं, जहां चैत्र नवरात्रि में मां की विशेष आराधना की जाती है. ऐसा ही एक मंदिर है चोट्टानिक्करा मंदिर, जहां माता रानी की एक नहीं, बल्कि तीन अलग रूपों में पूजा की जाती है. 

100 साल पुराना मंदिर चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर

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केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि के पास लगभग 100 साल पुराना मंदिर चोट्टानिक्करा भगवती मंदिर है, जहां आज भी मां के चमत्कारों की गूंज सुनाई देती है. चोट्टानिक्करा भगवती को चर्म रोग की देवी माना जाता है, जो भक्तों को चर्म रोग से निदान दिलाने का आशीर्वाद देती है. मंदिर की खास बात है मंदिर की पूजा विधि. मंदिर में मां के दिन रूपों की पूजा की जाती है, जो हर प्रहर के बाद बदल जाती है.

मां के किन तीन शक्तिशाली रूपों की होती है पूजा

सुबह मां को सरस्वती के रूप में पूजा जाता है और श्वेत पोशाक पहनाई जाती है, जबकि दोपहर में मां लक्ष्मी के रूप में पूजा होती है और मां को लाल साड़ी अर्पित की जाती है और शाम के वक्त मां को नीली वस्त्र पहनाकर भद्रकाली के रूप में पूजा जाता है. तीनों समय की पूजा और अनुष्ठान अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. 

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चर्म रोग से लेकर मानसिक रोगों से मिलती है मुक्ति 

चैत्र माह में मंदिर में मकम थोजल की रस्म निभाई जाती है, जो मार्च के महीने में होता है. इस उत्सव में मकम नक्षत्र में माता के विशेष दर्शन किए जाते हैं और मुहूर्त में दर्शन के लिए भक्त अलग-अलग राज्यों से आते हैं. चोट्टानिक्करा भगवति मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रसिद्ध हैं. मां चर्म रोग से मुक्ति के अलावा मानसिक रोगों से मुक्ति और तंत्र विद्या का काठ भी करती है. 

मंदिर का डिजाइन बौद्ध धर्म से प्रेरित लगता है

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भूत-प्रेतों से मुक्ति के लिए मंदिर में गुरुथी पूजा नाम का अनुष्ठान भी होता है, जिसमें 12 बर्तनों में मां को मीठा पानी अर्पित करने की रस्म निभाई जाती है. मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो मंदिर लकड़ी और पत्थर से बना है. मंदिर का डिजाइन बौद्ध धर्म से प्रेरित लगता है, जिसमें गुबंद नहीं, बल्कि मंदिर के शिखर पर नुकीली चोटी है. मंदिर के प्रांगण में एक चमत्कारी पेड़ भी है, जहां मन्नत का धागा बांधकर भक्त अपनी मनोकामना पूरी करते हैं.

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