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रूस में क्यों तैनात होंगे भारत के 3 हजार जवान और वॉरशिप? US-Iran जंग के बीच पुतिन-मोदी ने बनाया सॉलिड प्लान

अमेरिका और ईरान की जंग के चलते पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव है. जिसका असर दुनिया के कई देशों पर हो रहा है और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं.

Source- Indian Army X/@adgpi
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India-Russia RELOS Agreement: वैश्विक उथल-पुथल के बीच रूस और भारत की दोस्ती सदियों से अडिग है. दोनों की इस दोस्ती की किताब में अब सैन्य अध्याय भी जुड़ गया है. जो दोनों देशों की डिफेंस पावर को और भी मजबूत करेगा. दरअसल, रूस और भारत की जमीन पर एक दूसरे की सेना की तैनाती की जाएगी. 

इसके तहत तीन हजार जवान, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और 5 युद्धपोत एक दूसरे के क्षेत्र में तैनात होंगे. रूस और भारत का यह फैसला इसलिए अहम हो जाता है, क्योंकि अमेरिका और ईरान की जंग के चलते पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव है. जिसका असर दुनिया के कई देशों पर हो रहा है और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं. 

क्या है RELOS समझौता? 

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रूस और भारत के बीच इस अहम समझौते की नींव फरवरी 2025 में पड़ी थी. जो जनवरी 2026 से लागू होगा. ‘इंडो-रशियन रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ (RELOS) के तहत यह समझौता हुआ है.

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कितने सैनिकों की होगी तैनाती?

रूसी संसद की अंतर्राष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उपाध्यक्ष व्याचेस्लाव निकोनोव (First Deputy Chairman of International Affairs Committee Vyacheslav Nikonov) ने इस समझौते की पुष्टि की है. इस करार के तहत दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर 3000 तक सैनिक, सीमित संख्या में नौसैनिक जहाज और सैन्य विमान तैनात कर सकेंगे. 

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रूस की आधिकारिक कानूनी इंफॉर्मेशन पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, यह तैनाती पांच साल के लिए होगी. जिसमें दोनों देशों की सहमति होगी. यह करार दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को नई गति देगा. दोनों देशों की सेनाओं को एक दूसरे की अभ्यास शैली, सर्विस और तकनीक का एक्सपीरियंस मिलेगा. साथ ही साथ भारत के पास मौजूद रूसी के सैन्य उपकरणों की सर्विसिंग के लिए भी उपयोगी है और लॉजिस्टिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. RELOS समझौते में ज्वॉइंट आर्मी ट्रेनिंग, मानवीय सहायता अभियान भी शामिल है. 

RELOS समझौते की बड़ी बातें 

यह भी पढ़ें

  • मेजबान देश युद्धपोतों को बंदरगाह सेवाएं (Port Services) देंगे
  • मरम्मत सुविधा, पानी, भोजन और अन्य तकनीकी संसाधन 
  • सैन्य विमानों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल
  • उड़ान से जुड़ी सूचनाएं, नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल
  • पार्किंग, सुरक्षा, ईंधन, लुब्रिकेंट्स और तकनीकी मरम्मत जैसी सेवाएं 

रूस और भारत का यह सैन्य करार युद्ध जैसी स्थिति में दोनों देशों के लिए एक दूसरे की ढाल बनकर काम करेगा. इसमें एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और बंदरगाहों, तक पारस्परिक पहुंच भी मिलेगी. 

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