Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

वरिष्ठ पत्रकार की नजर में योगी सरकार का बड़ा फैसला, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यूपीकॉस?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों को संस्थागत पहचान और सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) का उद्घाटन किया. यूपी सरकार के कदम परवरिष्ठ पत्रकार जगदीश त्रिपाठी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

Image Source: NMF INPUT
Loading Ad...

किसी भी सरकार की संवेदनशीलता परखने के लिए यह देखने की जरूरत नहीं कि वह अपने राज्य के ताकतवर तबके के लिए क्या करती है, यह देखना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर, सबसे अनदेखे और सबसे मौन नागरिक के लिए क्या सोचती है. आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाला कर्मचारी दफ्तर में सबसे पहले आता है और सबसे बाद में जाता है, लेकिन व्यवस्था में उसका स्थान हमेशा सबसे अंतिम पायदान पर रहा है. न उसे स्थायी कर्मचारी जैसा सम्मान मिलता, न सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, न भविष्य निधि की निश्चितता. वह विभाग, एजेंसी और खुद अपने बीच बंटा हुआ एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पीड़ा सुनने वाला कोई संस्थागत तंत्र नहीं था. यही वह शून्य था, जिसे भरने का प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठित करके किया है. 

एक लंबे इंतज़ार का अंत

आउटसोर्स कर्मचारी बरसों तक शासन-प्रशासन की भूल-भुलैया में अपनी पहचान तलाशता रहा. हर महीने वेतन कब आएगा, यह सवाल उसके लिए स्थायी बना रहा. उसे इस बात का भी यकीन नहीं था कि उसकी तकलीफ कभी किसी दहलीज़ तक पहुंचेगी भी या नहीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्घाटन इसी लंबी प्रतीक्षा को विराम देने वाला क्षण है. यह केवल एक नए निगम की स्थापना भर नहीं, बल्कि उस अदृश्य कर्मचारी वर्ग को औपचारिक पहचान और संस्थागत सहारा देने की पहल है, जो अब तक व्यवस्था के हाशिए पर खड़ा रहकर काम करता आया.

Loading Ad...

पुरानी व्यवस्था की टूटी कड़ियां

Loading Ad...

2017 से पहले के दौर को देखें तो एक असहज तस्वीर उभरती है. तब आउटसोर्स कर्मचारी को संसाधन समझा ही नहीं जाता था. ठेके देने का काम अक्सर उन्हीं एजेंसियों को मिलता, जिनके तार सत्ता के गलियारों से जुड़े रिश्तेदारों और करीबियों तक जाते थे. भर्ती के नाम पर, वर्दी के नाम पर, और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर शोषण की कहानियां आम बात थीं. पूरा ढांचा तीन हिस्सों में टूटा हुआ था- कार्मिक, एजेंसी और विभाग. किसी समस्या के साथ कर्मचारी जब एक दरवाज़े पर पहुंचता, तो उसे दूसरे दरवाज़े की ओर मोड़ दिया जाता. न वेतन समय पर मिलने की गारंटी, न ईपीएफ-ईएसआई को लेकर कोई स्पष्टता, न सेवा अधिकारों की कोई ठोस रूपरेखा।. इस प्रशासनिक ढिलाई ने लाखों परिवारों को स्थायी अनिश्चितता में जीने पर मजबूर कर दिया था.

यह भी पढ़े: कठोरता और कोमलता की दो धाराओं का नाम योगी

Loading Ad...

बोझ से संपत्ति तक का वैचारिक सफर

समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों तक शासन की नीतियों, योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने को अपना विजन बनाने वाली योगी सरकार ने इस सोच को जड़ से बदलने का मानवीय दृष्टिकोण अपनाया. योगी सरकार में आउटसोर्स कर्मी अब बोझ नहीं, राज्य की मानव पूंजी के रूप में देखा जा रहा है. यही वैचारिक बदलाव यूपीकॉस की बुनियाद है. इसके दायरे और गहराई को आंकड़ों से इसे और गहराई से समझा जा सकता है. साढ़े तीन लाख से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके दायरे में आएंगे, और जब उनके परिवारजनों को जोड़ें तो यह संख्या 17 से 20 लाख के बीच पहुंच जाती है. यह अकेले किसी वर्ग विशेष की बात नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक बुनावट के एक बड़े हिस्से की तक़दीर बदलने वाला निर्णय है. हर महीने की पांचवीं तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे पूरी व्यवस्था में किसी पड़ाव पर भी बिचौलियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा और भुगतान संबंधित तमाम विसंगतियों पर लगाम लगेगी.

सुरक्षा कवच जो जीवन बदल देगा

Loading Ad...

इससे भी आगे बढ़कर बनाई गई व्यवस्था इस फैसले को असल मायनों में इंसानी बनाती है. किसी दुर्घटना, हादसे या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलेगा. यह प्रावधान उस डर को खत्म करता है, जो हर आउटसोर्स कर्मचारी के भीतर हमेशा से बना रहा कि किसी अनहोनी की सूरत में उसका परिवार बेसहारा हो जाएगा. ईपीएफ और ईएसआई का योगदान अब निश्चित रूप से जमा होगा. सरकार खुद एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, ताकि कर्मचारी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े. यह व्यवस्था उस आर्थिक दबाव को सीधे कम करती है, जो अब तक कर्मचारी अकेले उठाता आया था. नौकरी को लेकर छाई असुरक्षा भी अब समाप्त होने जा रही है. कोई भी एजेंसी अब किसी कर्मी को अपनी मर्ज़ी से बर्खास्त नहीं कर सकेगी. ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी, और उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा.

परिवार तक फैला भरोसे का दायरा

असली सामाजिक सुरक्षा वही है, जिसमें कोई भी कर्मचारी अपने पूरे परिवार को संरक्षण के दायरे में पाता है. बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए दस लाख रुपये तक की मदद, दो बेटियों की शादी के लिए आठ से दस लाख रुपये तक का सहयोग, और कर्मचारी के आकस्मिक निधन जैसी अप्रिय स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था- ये सभी प्रावधान मिलकर एक पारिवारिक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं. मातृत्व अवकाश जैसे वैधानिक लाभ भी अब सुनिश्चित किए गए हैं. यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ इस पूरी संरचना को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ता है, जहां हर कर्मचारी की समस्या को सुनने और सुलझाने के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र मौजूद रहेगा.

Loading Ad...

योगी सरकार का फैसला सर्व-समाज के लिए 

मुख्यमंत्री की सोच श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है. यूपीकॉस इसी सम्मान भावना का प्रतिबिंब है, ठीक वैसे ही जैसे योगी सरकार के वे तमाम फैसले हैं, जिन्होंने किसानों, नौजवानों, महिलाओं व कर्मचारियों के साथ ही समाज के हर तबके के वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है. 2017 में जो वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन मात्र तीन सौ रुपये थी, वह आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है. रसोइयों के मानदेय में भी इज़ाफा किया गया है. ये सभी निर्णय मिलकर उस नीति की तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों तक सम्मान और सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

भरोसे की जीत

Loading Ad...

यूपीकॉस केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, यह एक सामाजिक वादा है. यह इस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि सरकार और कर्मचारी का नाता केवल वेतन और काम तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी नींव भरोसे और उत्तरदायित्व पर टिकी होती है. जब कोई कर्मचारी यह महसूस करता है कि उसकी मेहनत सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ को सुना जाएगा, तभी वह सच्चे मायनों में गरिमा के साथ अपना जीवन जी पाता है. यूपीकॉस इसी गरिमा को स्थायी रूप देने को दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...