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कुरुक्षेत्र के 'ब्रह्मा सरोवर' को बनाएं अपना अगला ट्रैवल डेस्टिनेशन! आध्यात्म, इतिहास और आस्था का संगम

'ब्रह्मा सरोवर' सिर्फ अपनी आध्यात्मिक महिमा के लिए ही नहीं जाना जाता, इसका विशाल और भव्य स्वरूप भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ये एशिया के सबसे बड़े मानवनिर्मित सरोवर के रूप में विख्यात है जिसकी लंबाई 3,600 फीट, चौड़ाई 1,500 फीट और गहराई 45 फीट है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने इस संपूर्ण ब्रह्मांड को आकार देने के बारे में सोचा, तो उन्होंने कुरुक्षेत्र की इस पवित्र भूमि को चुना।जिस वजह से इस सरोवर के जल को बहुत पवित्र माना जाता है।

Representational Image (ChatGPT)
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अगर आप इन छुट्टियों में कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं और वहीं बेसिक घूमने की जगहों से हटकर कुछ अलग देखना चाहते हैं तो हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित 'ब्रह्मा सरोवर' के दर्शन ज़रूर करें। ये एक ऐसा पावन जलकुंड है, जिसे सृष्टि का उद्गम स्थल माना जाता है। कहते हैं की इस विशाल 'सरोवर' को स्वयं ब्रम्हा जी ने ही बनाया था। इस सरोवर को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और पूजनीय स्थलों में से एक माना जाता है जहां हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। तो चलिए जानते हैं कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मा सरोवर के विशाल आकार और इसके निर्माण से जुड़ी बेहद दिलचस्प और पौराणिक बातें।

एशिया का सबसे बड़ा मानवनिर्मित सरोवर

'ब्रह्मा सरोवर' सिर्फ अपनी आध्यात्मिक महिमा के लिए ही नहीं जाना जाता, इसका विशाल और भव्य स्वरूप भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ये एशिया के सबसे बड़े मानवनिर्मित सरोवर के रूप में विख्यात है जिसकी लंबाई 3,600 फीट, चौड़ाई 1,500 फीट और गहराई 45 फीट है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने इस संपूर्ण ब्रह्मांड को आकार देने के बारे में सोचा, तो उन्होंने कुरुक्षेत्र की इस पवित्र भूमि को चुना।जिस वजह से इस सरोवर के जल को बहुत पवित्र माना जाता है। 

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दिन ढलते ही इस पावन स्थल का नज़ारा पूरी तरह से बदल जाता है। आप शाम के समय होने वाली 'संध्या आरती' का अनुभव ले सकते हैं। इस समय यहाँ का पूरा माहौल एक दिव्य और अलौकिक ऊर्जा से भर जाता है। 

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'द्रौपदी का कुआं' की कहानी 

इस सरोवर के अलावा आप इसके बिल्कुल पास स्थित 'द्रौपदी का कुआं' भी देख सकते हैं। इसको लेकर पौराणिक मान्यता है की द्रौपदी ने दुशासन के खून से सने अपने केश को इसी कुएं के पवित्र जल से धोया था। इसके अलावा यहाँ से कुछ ही दूरी पर पर्यटकों को आकर्षित करता है काले पत्थर से बना एक अत्यंत विशाल और भव्य रथ। भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन का ये रथ भी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य है। 

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इन दार्शनिक स्थलों के अलावा यहाँ आप शॉपिंग का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं। यहाँ के बाज़ारों में हस्तशिल्प की बेजोड़ चीज़ें मिलती हैं जिन्हें आप अपने या अपने प्रियजनों के लिए यादगार के तौर पर लेकर जा सकते हैं। 

और भी हैं घूमने की जगहें 

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ब्रह्मा सरोवर के अलावा यहाँ घूमने की और भी जगहें हैं जैसे बिड़ला गीता मंदिर, बाबा नाथ की हवेली और मंदिर, ज्योतिसर, जहाँ से माना जाता है की महाभारत युद्ध की शुरुआत हुई थी। इसके अलावा यहाँ सन्निहित सरोवर भी है जिसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तालाबों में से एक माना जाता है।

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