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पेट्रोल-डीजल महंगा, इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में जबरदस्त उछाल
EV Cars: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और तेल की आपूर्ति में बाधा के चलते पेट्रोल और डीजल के दाम काफी बढ़ गए हैं. जब लोग महंगे ईंधन को देखकर खर्च बचाने की कोशिश कर रहे हैं, तब कई लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की तरफ बढ़ रहे हैं.
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EV Cars: भारत में इस साल मई में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के पंजीकरण में काफी बढ़ोतरी देखी गई है. इसका सबसे बड़ा कारण ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और तेल की आपूर्ति में बाधा के चलते पेट्रोल और डीजल के दाम काफी बढ़ गए हैं. जब लोग महंगे ईंधन को देखकर खर्च बचाने की कोशिश कर रहे हैं, तब कई लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की तरफ बढ़ रहे हैं.
इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, मई में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री कुल यात्री कारों की बिक्री का लगभग 6.4 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह सिर्फ 4 प्रतिशत थी. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री भी बढ़कर 8.9 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल 6.5 प्रतिशत थी. एचएसबीसी की रिपोर्ट भी यही संकेत देती है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं.
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टाटा मोटर्स को सबसे ज्यादा फायदा
कार निर्माताओं की बात करें तो टाटा मोटर्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है. कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सालाना 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है. पिछले दो महीनों में उनकी इलेक्ट्रिक कारों की बुकिंग 2.5 गुना बढ़ गई है. खासकर 15 लाख रुपए से कम कीमत वाले सेगमेंट में मांग बहुत मजबूत है। इस वजह से टाटा मोटर्स ने अपनी उत्पादन क्षमता 10,000 यूनिट से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति माह करने की योजना बनाई है.
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दोपहिया वाहनों का बाजार
दो-पहिया इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में भी तेजी है. मई में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर पंजीकृत हुए, जिसमें टीवीएस मोटर सबसे आगे रही, इसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का नंबर आया. एथर की बिक्री साल-दर-साल दोगुनी हो गई, जिससे कंपनी को 16.5 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल हुई.
बाजार की बढ़ती प्रवृत्ति और चुनौतियाँ
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नोमुरा और एचएसबीसी दोनों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है. लोग अब ज्यादा जागरूक और तकनीक के प्रति खुले हैं. सरकार की नीतियाँ और उपभोक्ताओं की स्वीकृति से यह मार्केट और भी तेजी से बढ़ सकता है. लेकिन बढ़ती कमोडिटी लागत यानी कच्चे माल की कीमतें निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.
ईंधन कीमतों की स्थिति
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अप्रैल में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो हफ्ते में लगभग 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई. मई में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगातार तीन महीने 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही, क्योंकि मध्य पूर्व संकट लंबा खिंच गया. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का पारगमन मुश्किल हो गया. अमेरिका और ईरान के बीच बार-बार शांति वार्ता और युद्धविराम का उल्लंघन अनिश्चितता बढ़ा रहा है और तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.
सरकार ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए ईंधन की कीमतों पर लगाम लगाई है, लेकिन इसके कारण भारतीय तेल कंपनियां अब भी रोजाना करीब 550 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही हैं.