अपनी नीतियों से बाज नहीं आएंगे ट्रंप... ट्रेड को लेकर शुरू की नई जांच, सूची में भारत समेत 16 देश
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ फैसले को सुप्रीम द्वारा रद्द किए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने नई चाल चलते हुए एक व्यापारिक जांच शुरू की है. इस जांच में भारत समेत 16 बड़ी अर्थव्यस्थाओं को शामिल किया गया है.
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US Trade Investigation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) वैश्विक सुर्खियों में किसी न किसी कारण बने रहते हैं. कभी दो देशों के बीच चल रहे युद्ध का मुद्दा हो या फिर उनकी व्यापार नीति. हाल ही में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने उनके टैरिफ के फैसले को गलत ठहरा दिया. इसके बाद ट्रंप ने अपनी व्यापार को लेकर पुरानी मानसिकता का परिचय देते हुए नई चल चल दी है. अब ट्रंप प्रशासन ने विदेशों में हो रहे औद्योगिक उत्पादन को लेकर नई व्यापारिक जांच शुरू कर दी है.
यह जांच बुधवार से आधिकारिक रूप से शुरू की गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले के पीछे अमेरिकी उद्योगों को बचाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की कोशिश है. इस जांच के दायरे में भारत समेत दुनिया की 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है. इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई बहस शुरू हो गई है.
अदालत के फैसले के बाद बदली रणनीति
हाल ही में अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप प्रशासन के एक पुराने आयात शुल्क फैसले को खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा था कि आर्थिक आपातकाल का हवाला देकर लगाए गए कुछ टैरिफ उचित नहीं थे. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने व्यापार नीति को नए तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया. इसी क्रम में विदेशी उत्पादन और उससे जुड़े व्यापारिक असर की जांच शुरू की गई है. अमेरिकी सरकार का मानना है कि कई देशों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है और उस अतिरिक्त सामान को अमेरिका में भेजा जा रहा है. इससे अमेरिकी उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है.
1974 के व्यापार कानून के तहत जांच
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) ने इस जांच की आधिकारिक घोषणा की. उन्होंने बताया कि यह जांच 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत शुरू की गई है. इस कानून के तहत अमेरिका को यह अधिकार मिलता है कि वह उन देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सके जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी उद्योगों के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं. जांच पूरी होने के बाद अमेरिका इन देशों से आने वाले सामान पर नया आयात कर भी लगा सकता है. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
किन-किन देशों को किया गया शामिल
इस जांच में अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों को शामिल किया गया है. इनमें चीन, यूरोपीय संघ, मेक्सिको, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और ताईवान जैसे प्रमुख देश शामिल हैं. इसके अलावा स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम और बांग्लादेश को भी जांच के दायरे में रखा गया है. इतने बड़े पैमाने पर जांच शुरू होने से वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर इसका असर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है.
उत्पादन क्षमता को लेकर अमेरिका की चिंता
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कई देशों ने अपनी औद्योगिक उत्पादन क्षमता जरूरत से कहीं ज्यादा बढ़ा ली है. अमेरिका का तर्क है कि जब इन देशों में घरेलू मांग कम होती है, तब वे अपने अतिरिक्त उत्पादों को दूसरे देशों में भेज देते हैं. इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिकी बाजार पर पड़ता है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस स्थिति के कारण अमेरिका के घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई कंपनियां नए कारखाने लगाने या उत्पादन बढ़ाने के फैसले टाल रही हैं.
अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की चिंता
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस जांच का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के औद्योगिक आधार को मजबूत करना है. सरकार चाहती है कि जरूरी आपूर्ति व्यवस्था फिर से अमेरिका के भीतर स्थापित हो और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़े. अधिकारियों के अनुसार यदि घरेलू उद्योग मजबूत होंगे तो इससे अमेरिकी श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन वाली नौकरियां भी पैदा होंगी. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जांच के बाद नए टैरिफ लगाए जाते हैं तो इससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी चर्चा में
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इसी बीच हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा भी हुई है. इस समझौते के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए आयात कर को 50 प्रतिशत से घटाकर लगभग 18 प्रतिशत कर दिया है. अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह निर्णय तब लिया गया जब भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने का आश्वासन दिया. हालांकि इस व्यापार समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. इसके बावजूद दोनों देशों ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इससे भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं.
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