LPG Gas के फिर बदल गए नियम, गैस की किल्लत के बीच इन सेक्टरों को मिलेंगे भर-भरकर सिलेंडर, सरकार का बड़ा फैसला
LPG Gas New Rules: सरकार ने LPG आवंटन (Allocation) का नया फॉर्मूला तय किया, ताकि जिन सेक्टरों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा सके. इस फैसले का मकसद साफ है, जहां LPG के बिना काम नहीं चल सकता, वहां इसकी कमी न हो और जरूरी इंडस्ट्री का काम बिना रुकावट चलता रहे.
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LPG Crisis: केंद्र सरकार ने LPG यानी रसोई गैस के इस्तेमाल को लेकर एक नया नियम लागू किया है, जो खासतौर पर इंडस्ट्री और बड़े सेक्टर के लिए राहत भरा माना जा रहा है. बुधवार को सरकार ने LPG आवंटन (Allocation) का नया फॉर्मूला तय किया, ताकि जिन सेक्टरों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा सके. इस फैसले का मकसद साफ है, जहां LPG के बिना काम नहीं चल सकता, वहां इसकी कमी न हो और जरूरी इंडस्ट्री का काम बिना रुकावट चलता रहे.
किन-किन सेक्टर को मिलेगा फायदा?
सरकार ने कई जरूरी सेक्टर को इस नई नीति में शामिल किया है. इसमें फार्मा, फूड, कृषि, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, सिरेमिक, ग्लास, एयरोसोल जैसे उद्योग शामिल हैं. ये वो सेक्टर हैं जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, जैसे दवाइयां, खाना, खेती और जरूरी सामान. इसलिए सरकार चाहती है कि इनका काम किसी भी हालत में प्रभावित न हो.
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कितना मिलेगा LPG?
नई व्यवस्था के तहत इन इंडस्ट्रीज को उनकी पुरानी खपत का करीब 70% LPG दिया जाएगा.हालांकि, पूरे सेक्टर के लिए एक लिमिट भी तय की गई है, जो 0.2 हजार मीट्रिक टन प्रति दिन है. यानी सरकार ने एक बैलेंस बनाने की कोशिश की है, ताकि सभी जरूरी सेक्टर को गैस मिलती रहे और सप्लाई पर ज्यादा दबाव भी न पड़े.
किसे मिलेगी प्राथमिकता?
सरकार ने साफ कहा है कि जिन फैक्ट्रियों में LPG की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल नहीं हो सकता, उन्हें पहले LPG दी जाएगी. मतलब अगर किसी फैक्ट्री के लिए LPG ही जरूरी है और उसका कोई विकल्प नहीं है, तो उसे सबसे पहले सप्लाई मिलेगी. इससे उन उद्योगों को राहत मिलेगी जिनका पूरा काम LPG पर ही निर्भर है.
कंपनियों को क्या करना होगा?
इस नई व्यवस्था का फायदा लेने के लिए इंडस्ट्रीज को तेल कंपनियों (OMCs) के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा.साथ ही, उन्हें PNG कनेक्शन के लिए भी आवेदन करना होगा, ताकि जहां संभव हो वहां धीरे-धीरे LPG पर निर्भरता कम की जा सके. हालांकि, जहां LPG ही मैन्युफैक्चरिंग का जरूरी हिस्सा है, वहां PNG के लिए आवेदन करने की शर्त हटा दी गई है.
राज्यों के लिए भी बनाए गए नियम
सरकार ने राज्यों को भी कुछ जरूरी कदम उठाने को कहा है. जैसे, नई गैस डिस्ट्रीब्यूशन नीति को लागू करना, PNG को बढ़ावा देना और बायो गैस से जुड़ी योजनाओं को तेजी से शुरू करना. जो राज्य इन सुधारों को लागू करेंगे, उन्हें LPG आवंटन में 10% तक अतिरिक्त फायदा भी मिल सकता है.
छोटे सिलेंडर की बढ़ती मांग
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दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में 5 किलो वाले छोटे LPG सिलेंडर की मांग तेजी से बढ़ी है. कुछ ही दिनों में लाखों सिलेंडर बिक चुके हैं और हर दिन इसकी बिक्री बढ़ती जा रही है. इससे यह साफ दिखता है कि लोग अब छोटे और किफायती विकल्पों की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
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