हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, विदेश में जान गंवाने वाले युवाओं के परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता, डंकी रूट पर सख्ती के बीच बड़ा फैसला
Haryana: कई मामलों में युवाओं की जान तक चली गई, जिससे परिवार पूरी तरह टूट जाते हैं. अब सरकार ने इस गंभीर स्थिति को समझते हुए एक नई पहल की हैं , ताकि ऐसे परिवारों को सहारा मिल सके और युवाओं को सही रास्ता दिखाया जा सके.
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Haryana: हरियाणा में बहुत दिनों से एक बड़ी समस्या सामने आ रही हैं , कई युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश तो जा रहे हैं , लेकिन सही जानकारी और तैयारी के बिना. कुछ लोग तो गलत रास्तों यानी डंकी रुट के जरिए बाहर निकल जाते हैं, जो न सिर्फ गैरकानूनी हैं बल्कि बेहद खतरनाक भी साबित हो रहा हैं. कई मामलों में युवाओं की जान तक चली गई, जिससे परिवार पूरी तरह टूट जाते हैं. अब सरकार ने इस गंभीर स्थिति को समझते हुए एक नई पहल की हैं , ताकि ऐसे परिवारों को सहारा मिल सके और युवाओं को सही रास्ता दिखाया जा सके.
असमय मौत पर परिवार को मिलेगा आर्थिक सहारा
सरकार ने फैसला लिया है कि जो युवा कानूनी तरीके से विदेश गए हैं और वहां किसी कारणवश उनकी असमय मौत हो जाती है, तो उनके परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके लिए एक खास कल्याण कोष बनाया जाएगा. इस कदम के पीछे सोच बहुत साफ है, अगर कोई परिवार अपना बेटा खो देता है, तो कम से कम आर्थिक रूप से उसे थोड़ा सहारा मिल सके. अभी इस योजना के नियम और शर्तें तैयार की जा रही हैं, ताकि इसे सही तरीके से लागू किया जा सके.
डंकी रूट पर लगाम लगाने की तैयारी
हरियाणा के कई जिलों - जैसे यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल और करनाल में डंकी रूट से विदेश जाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. कई युवा धोखे में आकर या जल्द पैसे कमाने की चाह में इस रास्ते को चुन लेते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि यह रास्ता बहुत जोखिम भरा होता है. कई बार लोग विदेश पहुंचते ही पकड़ लिए जाते हैं और वापस भेज दिए जाते हैं. अभी तक एक हजार से ज्यादा युवाओं को अमेरिका और दूसरे देशों से डिपोर्ट किया जा चुका है. सरकार अब इस पर सख्ती के साथ-साथ जागरूकता भी बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि युवा गलत फैसले लेने से बचें.
बिना तैयारी विदेश जाना क्यों बन जाता है परेशानी
अक्सर देखा गया है कि जो युवा बिना किसी ट्रेनिंग या जानकारी के विदेश जाते हैं, उन्हें वहां बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सबसे बड़ी समस्या लैंग्वेज की होती है. न तो वे सही से बात कर पाते हैं और न ही काम को समझ पाते हैं. इसके अलावा, उस देश के नियम-कानून और माहौल की जानकारी न होने के कारण उन्हें छोटे-मोटे या कम वेतन वाले काम ही मिलते हैं. यानी सपना बड़ा होता है, लेकिन हकीकत काफी मुश्किल बन जाती है.
अब मिलेगी ट्रेनिंग और भाषा सीखने का मौका
सरकार अब चाहती है कि युवा पूरी तैयारी के साथ विदेश जाएं. इसके लिए एक नई योजना लाई जा रही है, जिसमें विदेशी भाषाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी. सबसे खास बात यह है कि जिन परिवारों की सालाना आय तीन लाख रुपये तक है, उनके बच्चों को इस ट्रेनिंग के लिए आर्थिक मदद भी दी जाएगी। इससे वे भाषा सीख सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर का सर्टिफिकेट भी हासिल कर पाएंगे.इससे उन्हें विदेश में बेहतर नौकरी मिलने के मौके बढ़ेंगे और वे आत्मविश्वास के साथ काम कर सकेंगे.
विदेश जाने से पहले पूरी जानकारी दी जाएगी
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सरकार एक प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग सेंटर भी बनाने जा रही है. यहां युवाओं को उस देश के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी, जहां वे काम करने जा रहे हैं, जैसे वहां के नियम, संस्कृति, काम का माहौल और रहने के तरीके. इस पहल में विदेश मंत्रालय का भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि जानकारी सही और भरोसेमंद हो.
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