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West Bengal Election: सियासी सुरमाओं के बीच क्यों हो रही ‘लाल बाबा’ की चर्चा? जानें अनोखी कहानी

लाल कुर्ता-पायजामा और सिर पर लाल साफेनुमा पट्टी. रोज एक ही ठिकाना, मालदा का अदालत परिसर और अब अगला पड़ाव बंगाल विधानसभा, ये कहानी है लाल बाबा की, जो बेहद चर्चा में हैं.

West Bengal Election: सियासी सुरमाओं के बीच क्यों हो रही ‘लाल बाबा’ की चर्चा? जानें अनोखी कहानी
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West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में सियासी मेला लगा हुआ है, BJP-TMC और कांग्रेस समेत तमाम दल प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. स्टार प्रचारक भी मैदान में उतर चुके हैं, इस बीच बंगाल चुनाव में एक चेहरा चर्चा का विषय बना हुआ है. जो लोकप्रियता में बड़े-बड़ों को मात दे रहा है. हम बात कर रहे हैं ‘लाल बाबा’ की, कौन हैं लाला बाबा, क्या है इनकी कहानी, जानें सब कुछ. 

लाल कुर्ता-पायजामा और सिर पर लाल साफेनुमा पट्टी. रोज एक ही ठिकाना, मालदा का अदालत परिसर, और काम लोगों के हाथ की रेखाएं पढ़कर उनका भविष्य बताना, किस्मत की लकीरों में क्या लिखा है इसका ब्यौरा देना, लेकिन इस बार ‘लाल बाबा’ खुद अपनी किस्मत पलटने निकले हैं, राजनीतिक भविष्य के सितारे खोजने. 

कौन हैं लाला बाबा और क्या है कहानी? 

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मालदा के रहने वाले लाल बाबा का असली नाम असोमाई मंडल है, पेशे से ज्योतिषि हैं, हस्त रेखाएं देखते हैं, पोशाक के तौर लाल-कुर्ता पजामा पहनते हैं, इसलिए लोग इन्हें लाल बाबा कहने लगे. उनका ये अनोखा लुक चुनावों के बीच उनकी पहचान बन गया. 

लाल बाबा बेहद साधारण परिवार से हैं, जिंदगी में कई मुश्किलें आईं. बचपन में ही माता-पिता को खो दिया, आर्थिक तंगी के कारण सातवीं के बाद पढ़ाई भी नहीं कर पाए. छोटी उम्र में ही बड़ा बोझ ने कंधों को झुका दिया. इन संघर्षों ने लाल बाबा को मजबूती भी दी. लाल बाबा घर चलाने के लिए अदालत परिसार के बाहर कुछ जड़ी बूटियां बेचते हैं. 

लाल बाबा की इस साधारण सी लाइफ में असाधारण मोड़ तब आया जब उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया. कुछ बड़ा करने की चाह हमेशा से ही थी, ऐसे में इस बार उस चाहत को पूरी करने बंगाल चुनाव में उतर गए. न किसी दल का समर्थन, न मोटा पैसा, है तो केवल हिम्मत जिसके दम पर लाल बाबा सियासी रण में उतर गए. 

लाल बाबा को कहां से मिली चुनाव लड़ने की प्रेरणा? 

लाल बाबा के एक गुरू रहे हैं, उनका नाम पद्मराजन है. पद्मराजन एक दो तीन नहीं बल्कि 252 बार चुनाव लड़ चुके हैं. अपने गुरू का इस जुनून और हार न मानने वाली मिसाल से ही लाल बाबा को ताकत मिली. 

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हालांकि लाला बाबा को अपनी 100% जीत का दावा कर रहे हैं, उनका कहना है कि जनता जिस बदलाव की उम्मीद जननेता से करती है लाल बाबा उसका चेहरा बन सकते हैं. 

2021 के चुनावों में लाल बाबा के साथ क्या हुआ था? 

लाल बाबा ने पहले भी चुनाव लड़ने का फैसला लिया था. साल 2021 में उन्होंने नामांकन भी भरा, लेकिन नामांकन फॉर्म इसलिए रद्द हो गया क्योंकि पूरे गवाह नहीं मिले. इस बार लाल बाबा पूरी तैयारी के साथ उतरे हैं, 5 साल में उन्होंने कुछ पैसे जमा किए,  कागजात और कुछ गवाहों के साथ तैयार हैं. 

लाल बाबा के मेनिफेस्टो में सबसे पहला काम क्या? 

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चुनाव जीतते हैं तो सबसे पहला काम क्या करेंगे? इस सवाल के जवाब में लाल बाबा कहते हैं कि वह बेरोजगारी खत्म करने पर काम करेंगे. हर घर में रोजगार देना उनकी प्राथमिकता होगी. शायद अपनी जिंदगी के संघर्ष से लाल बाबा ने दूसरों की मुश्किलों को समझना भी सीख लिया. 

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लाल बाबा की जीत के दावे पर क्या कहते हैं लोग? 

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एक तरफ मैदान में सियासी सूरमा हैं, जिन्हें लंबा राजनीतिक तजुर्बा है, जिनके चेहरे पर नेतृत्व की चमक है, पैसा है, सपोर्ट है, ताकत है, तो दूसरी ओर लाल बाबा हैं, जो हिम्मत, किस्मत और भरोसे के दम पर चुनाव में एंट्री कर रहे है और जीत का दावा करते हैं. लोग उनके दावे पर हंसते हैं, मजाक भी बनाते हैं, लेकिन इग्नोर भी नहीं करते, चाय की टपरी से लेकर दुकानों तक लाल बाबा की चर्चा है. फिलहाल दूसरों का भविष्य देखने वाले लाल बाबा ने अपना भविष्य जनता के हवाले कर दिया. 

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