पश्चिम बंगाल में मतदाता संख्या में पहली बार गिरावट, एसआईआर के बाद बड़ा बदलाव
श्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. 2011 से लगातार बढ़ रही मतदाता संख्या में यह पहली बार कमी आई है.
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पश्चिम बंगाल में अंतिम पूरक सूची जारी होने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया समाप्त हो गई है. 2011 से मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि के बाद यह पहली बार है जब राज्य में मतदाताओं की संख्या में गिरावट आई है. 2011 वह वर्ष था जब 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई.
2011 से 2024 तक लगातार वृद्धि
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के वर्ष 2011 में राज्य में लगभग 5.62 करोड़ मतदाताओं के साथ विधानसभा चुनाव हुए थे.
विपक्ष के आरोप और विवाद
2014 में जब लोकसभा चुनाव हुए, तो पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 6.27 करोड़ हो गई. दरअसल, इसी दौरान पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने पहली बार आरोप लगाया कि नए या पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल तो कर लिया गया लेकिन "मृत", "स्थानांतरित", "लापता" और "डुप्लिकेट" मतदाताओं के नाम सूची से नहीं हटाए गए.
एसआईआर के बाद बड़ा बदलाव
फिर 2016 में, जब राज्य में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार की सदन में पहले से अधिक बहुमत के साथ वापसी हुई, तो मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 6.58 करोड़ हो गई.
2019 में, लोकसभा चुनावों के वर्ष में, पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 6.98 करोड़ हो गई, जो बाद में 2021 में बढ़कर 7.33 करोड़ हो गई, जिससे राज्य में तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी हुई.
अंततः 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 7.60 करोड़ हो गई थी.
क्या कहते हैं चुनाव विश्लेषक?
सीईओ के कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि 2011 और 2024 के बीच मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और इस प्रवृत्ति में एक बार भी गिरावट नहीं देखी गई है.
हालांकि, पिछले साल नवंबर में शुरू हुए और अंततः इस महीने पूरे हुए एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की कुल संख्या घटकर 6.75 करोड़ हो गई है.
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि 2011 से 2024 तक मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि जहां नए और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता सूची में जुड़ते रहे. वहीं "मृत", "स्थानांतरित", "लापता" और "डुप्लिकेट" मतदाताओं को सूची से समानांतर रूप से हटाया नहीं गया.
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