चिप से चिप्स तक डील... भारत-कोरिया ने खोला विकास का नया रास्ता, 50 बिलियन डॉलर तक कारोबार का टारगेट ऐसे होगा पूरा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, तकनीक और संस्कृति में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. भारत-कोरिया व्यापार 27 बिलियन डॉलर पहुंचा, 2030 तक 50 बिलियन का लक्ष्य रखा गया. पीएम ने राष्ट्रपति ली की पहली भारत यात्रा का स्वागत भी किया.
Follow Us:
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की. बैठक के बाद दोनों देशों के नेताओं ने अपना संबोधन दिया. दोनों देशों के बीच एमओयू एक्सचेंज हुए. इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया का द्विपक्षीय व्यापार आज 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है. 2030 तक इसे 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं.
पीएम मोदी का स्वागत भाषण
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति ली, दोनों देशों के डेलिगेट्स और मीडिया के साथियों नमस्कार. पहली भारत यात्रा पर प्रेसिडेंट ली का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है. राष्ट्रपति ली का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है. हर चुनौती में उनके भीतर जन सेवा के संकल्प को और सशक्त किया है. भले ही यह उनकी पहली भारत यात्रा हो लेकिन भारत के प्रति उनकी आत्मीयता हमारी पहली मुलाकात से ही स्पष्ट रही है.'
Addressing the joint press meet with President Lee Jae Myung of the Republic of Korea.@Jaemyung_Lee https://t.co/NpU97z4dzB
— Narendra Modi (@narendramodi) April 20, 2026
भारत-कोरिया संबंधों पर जोर
पीएम मोदी ने कहा, 'आठ वर्ष बाद कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है. लोकतांत्रिक मूल्य, मार्केट इकोनॉमी और कानून को लेकर सम्मान हम दोनों देशों के डीएनए में है. हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी हमारा कॉमन आउटपुट है. इन सबके आधार पर पिछले एक दशक में हमारे संबंध अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं. उनकी यात्रा से हम इस भरोसेमंद साझेदारी को भविष्य की साझेदारी में बदलने जा रहे हैं. हम चिप से लेकर चिप्स, टैलेंट से लेकर तकनीक, पर्यावरण से लेकर ऊर्जा हर क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों को साकार करेंगे और साथ मिलकर दोनों देशों के विकास और समृद्धि सुनिश्चित करेंगे.'
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर बड़ी घोषणा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत और कोरिया का द्विपक्षीय व्यापार आज 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है. 2030 तक इसे 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. दोनों देशों के बीच फाइनेंशियल फ्लो को सुगम बनाने के लिए हमने भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम की शुरुआत की है. सहयोग को बल देने के लिए हमने एक इंडस्ट्रियल कॉपरेशन कमेटी का गठन किया है. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने के लिए इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू कर रहे हैं. हम कोरिया की कंपनी खासकर एसएमई की भारत में एंट्री सहज करने के लिए कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी स्थापित करेंगे.'
ट्रेड एग्रीमेंट पर फोकस
उन्होंने कहा, 'अगले एक वर्ष के अंदर हम भारत-कोरिया ट्रेड समझौते को अपग्रेड भी करेंगे. एआई, सेमिकंडक्टर और आईटी में साझेदारी और गहरा करने के लिए हम इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज लॉन्च कर रहे हैं. शिप बिल्डिंग, सस्टेनिबिलिटी, स्टील जैसे क्षेत्रों में एमओयू कर रहे हैं. कल्चर और क्रिएटिविटी के क्षेत्र में आपसी सहयोग से फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग में भी नए आयाम स्थापित करेंगे. आज का बिजनेस फोरम इन अवसरों को ठोस परिणामों में बदलने का मंच बनेगा.'
सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र
भारत और कोरिया के बीच सांस्कृतिक संबंध का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'भारत और कोरिया के बीच हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंध है. 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना और कोरिया के राजा किम सूरो की कहानी हमारी साझा विरासत है. आज भारत में के-पॉप और के-ड्रामा बहुत ही मशहूर हो रहे हैं. उसी तरह कोरिया में भी भारतीय सिनेमा और संस्कृति की पहचान बढ़ रही है. हमें खुशी है कि प्रेसिडेंट ली खुद भारतीय सिनेमा के प्रशंसक हैं, इस कल्चरल कनेक्ट को मजबूत करने के लिए हम 2028 में भारत-कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल आयोजित करेंगे. इसके साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने के लिए शिक्षा, रिसर्च सहयोग और टूरिज्म को भी बढ़ावा देंगे.'
वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'वैश्विक तनाव की स्थिति में हम साथ मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं. हमें खुशी है कि आज कोरिया इंटरनेशनल सोलर अलायंस और इंडो-पैसिफिक ओशन पहल से जुड़ रहा है. हम अपने साझा प्रयासों से एक शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक के लिए योगदान देते रहेंगे. हम इस बात से भी सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है. लगभग 100 वर्ष पहले भारत के महान कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने कोरिया को पूर्व का दीपक (लैंप ऑफ द ईस्ट) कहा था। और आज विकसित भारत 2047 के हमारे संकल्प को साकार करने के लिए कोरिया ओएक महत्वपूर्ण साझेदार है. आइए हम अपनी साझेदारी से दोनों देशों के साथ-साथ पूरे विश्व की प्रगति और समृद्धि का रास्ता बनाएं.'
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि इस बैठक ने भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को नई दिशा देने का स्पष्ट संकेत दिया है. व्यापार, तकनीक, संस्कृति और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में लिए गए फैसले आने वाले समय में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करेंगे. यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी स्थिरता और विकास को नई गति देगा.
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें