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500% टैरिफ पर भारत की US को खरी-खरी, अमेरिकी मंत्री के दावों का दिया जवाब- PM मोदी और ट्रंप के बीच 8 बार हुई बात

अमेरिका भारत समेत कई देशों को 500% टैरिफ का डर दिखा रहा है. लेकिन भारत ने एक बार फिर बता दिया कि भारत फैसले दबाव में नहीं बल्कि देश के हित में जो जरूरी हो उसे देखकर लेता है.

अमेरिका (America) के भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की चर्चाओं के बीचभारत ने US को दो टूक संदेश दे दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को खरी-खरी सुना दी. 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग की. जिसमें उन्होंने कहा, हमने यह साफ कर दिया कि देश के एनर्जी से जुड़े फैसले मार्केट की स्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और 1.4 अरब भारतीयों के लिए एनर्जी सिक्योरिटी पक्का करते हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी चर्चाओं का जवाब दिया. 

‘PM मोदी और ट्रंप ने 8 बार बात की’

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है, 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीब आठ बार बात हुई. दोनों ही देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई और कई मौकों पर डील होने ही वाली थी. 

प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिकी अधिकारियों और मंत्री हॉवर्ड लुटनिक की ओर से टैरिफ को लेकर दिए जा रहे बयान को लेकर सवाल पूछा गया. जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘हमने इन टिप्पणियों को देखा है. भारत-अमेरिका पिछले साल 13 फरवरी से ही एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात करने को प्रतिबद्ध हैं. तब से दोनों पक्षों ने एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक समझौते पर पहुंचने पर बातचीत की. कई दौर की बातचीत की गई है और कई मौकों पर समझौतों के करीब पहुंचे हैं.’

500% टैरिफ के दावे पर दिया जवाब 

रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी नेताओं की टैरिफ वाली टिप्पणी को गैर जरूरी बताया. उन्होंने कहा, रिपोर्ट की गई टिप्पणियों में इन चर्चाओं का जो विवरण दिया गया वो ठीक नहीं है. हम दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक लाभकारी व्यापार में रुचि रखते हैं और इसकी ही आशा करते हैं. संयोगवश PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में आठ मौकों पर फोन पर बात की है, जिसमें व्यापक साझेदारी पर दोनों नेताओं ने बात की है.

रणधीर जायसवाल ने कहा, जिस बिल की बात की जा रही है वह प्रस्तावित बिल है, उसके बारे में हमें ज्ञान है, इस बिल से जुड़ी गतिविधियों को हम ध्यान से देख रहे हैं, साथ ही जहां तक ऊर्जा स्रोतों का सवाल है उससे आप भलीभांति वाकिफ हैं कि हमारा क्या रवैया है, इस संदर्भ में जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा जो एप्रोच होता है वो वैश्विक बाजार में क्या परिस्थिति है, क्या माहौल है उसको मद्देनजर रखते हुए, साथ ही साथ हमारा जो मानना है कि हमारे जो 1.4 अरब लोग हैं उनको किस प्रकार से सस्ते दाम पर ऊर्जा मुहैया कराया जाए, इन दोनों चीजों को देखकर हम अपनी रणनीति और स्ट्रैटेजी तय करते हैं.

क्या है अमेरिका का नया बिल?

दरअसल, अमेरिका पहले से ही भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा चुका है. जब ट्रंप टैरिफ के जरिए भारत समेत कई देशों पर दबाव नहीं बना पाए तो अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने पर विचार किया जा रहा है. इसे लेकर बिल भी लाने की तैयारी है. बिल को सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने 7-8 जनवरी 2026 को इस बिल को हरी झंडी दी थी. ट्रंप ने ग्राहम से मीटिंग के बाद इसे समर्थन दिया, ताकि कथित रूप से रूस के युद्ध फंडिंग को रोका जा सके. अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद कर रूस के युद्ध की फंडिंग कर रहा है.  

ऐसे में अगर ये बिल पास हो जाता है तो अमेरिका ऐसे देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगा सकता है, जो रूसी तेल, गैस या  यूरेनियम खरीदते हैं. 

अमेरिका के मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने किया था बड़ा दावा 

इस बीच अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि भारत और अमेरिका की डील होने वाली थी. सब कुछ तय हो गया था, लेकिन PM मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया और इसलिए डील नहीं हो सकी. हालांकि विदेश मंत्रालय ने लुटनिक के इस दावे को नकारते हुए गैर जरूरी टिप्पणी करार दिया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध हैं और उन्होंने हमेशा राजनयिक नियमों के अनुसार एक-दूसरे को आपसी सम्मान के साथ संबोधित किया है. 

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