Advertisement

Loading Ad...

बांग्लादेश में होने वाला है कुछ बड़ा, चुनाव से पहले लश्कर आतंकियों की ढाका में एंट्री, सामने आई पासपोर्ट की डिटेल

बांग्लादेश में होने वाले चुनाव के बीच पाकिस्तानी आतंकियों की पूरी फौज ढाका पहुंच गई है. कहा जा रहा है कि इस दौरान भारी खून खराबे के आसार हैं. लश्कर के आतंकी  कराची की फ्लाइट से ढाका पहुंचे हैं. इसने यूनुस के खतरनाक मंसूबे 'उजागर' कर दिए हैं.

Yunus Meeting Bangladeshi Officials (File Photo)
Loading Ad...

बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाला है. चुनाव से पहले देश में भीषण हिंसा की चेतावनी की कई रिपोर्ट सामने आई हैं. इस बीच ताजा अपडेट में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकियों ने पाकिस्तान से बांग्लादेश में एंट्री की है. 

पाकिस्तान से एक चौंकाने वाले खुलासे में एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट बीजी-342 में कम से कम चार लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी सवार थे. यह विमान इस हफ्ते की शुरुआत में कराची से ढाका पहुंचा था. यह विमान दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद आया था.

जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और पाक आतंकियों की सांठगांठ

Loading Ad...

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच फिर से हवाई सेवा शुरू होने को लेकर काफी बवाल हुआ. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह आरोप इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट साहिदुल हसन खोकोन ने लगाया है. एलईटी आतंकियों की आवाजाही को लेकर हसन खोकोन ने यूनुस सरकार की बांग्लादेश में टेररिस्ट घुसपैठ की खतरनाक मदद और उसके कथित इस्लामिस्ट और पाकिस्तान को खुश करने वाले रवैए का खुलासा किया.

Loading Ad...

कराची की फ्लाइट से बांग्लादेश पहुंचे पाक आतंकी

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में खोकोन ने कहा कि बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट बीजी-342 कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुई और 30 जनवरी को सुबह 4.20 बजे ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई, जिसमें कुल 113 पैसेंजर थे.

Loading Ad...

ढाका पहुंचे लश्कर आतंकी

खोकोन के मुताबिक, पैसेंजर में कुछ ऐसे लोग थे, जिन्हें उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव के तौर पर पहचाना. इनके नाम और कथित कनेक्शन उनके ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स में लिखे थे. उन्होंने दावा किया कि यह मौजूदा सरकार के तहत लापरवाही या जानबूझकर कार्रवाई न करने की वजह से हुई बड़ी सुरक्षा खामियों की ओर इशारा करता है. खोकोन ने अपनी पोस्ट में लिखा, "लश्कर-ए-तैयबा के उग्रवादी पाकिस्तान से बांग्लादेश पहुंचे." उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं, जिनमें कथित ऑपरेटिव्स की पासपोर्ट डिटेल्स दिख रही थीं.

बांग्लादेशी मीडिया द डेली रिपब्लिक के अनुसार, यह दावा यूनुस सरकार के पिछले हफ्ते ढाका और कराची के बीच सीधी विमान सेवा फिर से शुरू करने के फैसले के ठीक बाद सामने आया है. दोनों देशों के बीच करीब 14 साल के बाद एक एयर रूट बहाल हुआ है.

Loading Ad...

चर्चा है कि यह कदम पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बिना बताए हुए समझौतों के बाद उठाया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों ने आरोप लगाया है कि रूट को फिर से शुरू करने के साथ कई विवादित रियायतें भी मिलीं, जिनमें पाकिस्तानी सरकारी अधिकारियों, मिलिट्री के लोगों और इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स के लिए स्पेशल वीजा में छूट और खास अधिकार, बांग्लादेशी पोर्ट्स पर पाकिस्तानी जहाजों के लिए इंस्पेक्शन के नियमों में ढील, और दोनों देशों के बीच लेन-देन की जांच में ढील शामिल है.

मौजूदा आरोपों ने चिंता को बढ़ा दिया है कि अब आम विमानों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए कवर के तौर पर किया जा सकता है. लश्कर-ए-तैयबा यूएन से घोषित आतंकवादी संगठन है, जो 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों और कई दूसरे हमलों के लिए जिम्मेदार है और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के सपोर्ट से बड़े पैमाने पर काम करता है.

बांग्लादेश चुनाव में भारी हिंसा के आसार

Loading Ad...

द डेली रिपब्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश में इसकी मौजूदगी के आरोप मौजूदा सरकार के तहत बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों की बड़ी कहानी में फिट बैठते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि एलईटी के फाउंडर हाफिज सईद के करीबी सहयोगी और पाकिस्तान के मरकजी जमीयत अहल-ए-हदीस के जनरल सेक्रेटरी इब्तिसाम इलाही जहीर ने अक्टूबर 2025 में बांग्लादेश का कई हफ्तों का दौरा किया.

भारत हाई अलर्ट पर

Loading Ad...

इस दौरान जहीर ने कथित तौर पर ढाका और भारत के साथ सीमा पर कई संवेदनशील जिलों का दौरा किया, जिनमें चपैनवाबगंज, नाचोले, रंगपुर, लालमोनिरहाट, निलफामारी, जॉयपुरहाट और राजशाही शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जहीर ने 'इस्लाम के लिए कुर्बानी', 'सेक्युलर और लिबरल ताकतों' के खिलाफ एकता और कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की मांग करते हुए भाषण दिए. इसके साथ ही अहल-ए-हदीस बांग्लादेश से जुड़े स्थानीय कट्टरपंथी समूह और असदुल्लाह अल गालिब जैसे लोगों से भी बातचीत की.

यूनुस के सत्ता में आने के बाद यह उसका दूसरा दौरा था. इससे पहले फरवरी 2025 में भी उसका दौरा हुआ था. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की धार्मिक पहुंच वाली गतिविधियां एलईटी के क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को फिर से बनाने, कमजोर बॉर्डर इलाकों में भर्ती करने और भारत के पूर्वी बॉर्डर और उत्तर-पूर्वी राज्यों को टारगेट करके ऑपरेशन की संभावित प्लानिंग के लिए एक फ्रंट के तौर पर काम कर सकती हैं.

ISI के साथ यूनुस की बढ़ी नजदीकियां

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

द डेली रिपब्लिक मीडिया ने बताया कि आलोचकों ने आरोप लगाया है कि यूनुस सरकार की पाकिस्तान के इंटेलिजेंस सिस्टम के साथ बढ़ती नजदीकियां, घरेलू सुरक्षा प्रणाली का कमजोर होना, पाकिस्तानी कार्गो इंस्पेक्शन में छूट और वीजा स्क्रीनिंग प्रक्रिया में कमी ने बांग्लादेश को जिहादी समूहों के लिए एक 'आसान आवागमन गलियारा' में बदल दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि कट्टरपंथ और आतंकी नेटवर्क को जड़ें जमाने की इजाजत दी जा रही है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...