बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर सवाल, नरसिंगदी में मोनी चक्रवर्ती कांड को यूनुस सरकार ने बताया प्रोपेगेंडा
बांग्लादेश के नरसिंगदी जिले में हिंदू दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की हत्या के बाद हिंसा को लेकर सवाल उठे हैं. अंतरिम सरकार ने इसे पारिवारिक और कारोबारी विवाद बताया, जबकि लगातार घटनाओं से देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है.
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बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा और मौतों के मामलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. हाल के हफ्तों में सामने आई घटनाओं ने न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है. ताजा मामला नरसिंगदी जिले से सामने आया है, जहां एक हिंदू युवक की हत्या के बाद अंतरिम सरकार पर सच्चाई छिपाने और घटनाओं को हल्के में लेने के आरोप लग रहे हैं.
मोनी चक्रवर्ती की हुई हत्या
नरसिंगदी जिले के पलाश उपजिला के चारसिंदूर बाजार में 40 वर्षीय किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की बेरहमी से हत्या कर दी गई. अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार और स्थानीय रूप से निर्मित हथियार से हमला किया. यह घटना उस वक्त हुई, जब मोनी रात में अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे. पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, हमले के बाद उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
प्रोपेगैंडा बताना सरकार को पड़ सकता है भारी
इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इसे सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार किया. बांग्लादेशी न्यूज एजेंसी बीएसएस के मुताबिक, मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय की ओर से कहा गया कि यह हत्या पारिवारिक विवाद और पुरानी कारोबारी रंजिश का नतीजा है. यूनुस के वरिष्ठ सहायक प्रेस सचिव फोयेज अहमद ने स्पष्ट किया कि पुलिस और पीड़ित परिवार की शुरुआती जांच में किसी भी तरह के धार्मिक हमले के संकेत नहीं मिले हैं.
घटनाओं को दिया जा रहा सांप्रदायिक रंग: सरकार
फोयेज अहमद ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ घटनाओं को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है. उनके अनुसार, बिना जांच के किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देना समाज के लिए खतरनाक हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि मोनी चक्रवर्ती के हिंदू समुदाय से होने के कारण कुछ लोगों ने झूठा प्रोपेगैंडा फैलाया कि उनकी हत्या धार्मिक कारणों से की गई. हालांकि, इस सरकारी बयान पर कई सवाल भी उठ रहे हैं. पीटीआई भाषा से बातचीत में मोनी चक्रवर्ती के करीबी दोस्त राजेंद्र चौहान ने बताया कि वह इलाके में एक सम्मानित व्यक्ति थे. उनका किसी से कोई ज्ञात विवाद नहीं था. राजेंद्र चौहान के मुताबिक, मोनी इतने शांत और सरल स्वभाव के थे कि यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि उनका कोई दुश्मन हो सकता था. उन्होंने हत्या के पीछे किसी धार्मिक मकसद या चरमपंथी समूह की भूमिका से इनकार जरूर किया, लेकिन साथ ही कहा कि परिवार और करीबी अभी सदमे में हैं.
प्रोपेगैंडा बताना सरकार को पड़ सकता है भारी
बीते कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के अलग अलग इलाकों से हिंदुओं पर हमले और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं. इन घटनाओं को लेकर भारत सरकार ने भी गंभीर चिंता जाहिर की है. भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपील की है कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो. जानकारों का मानना है कि चाहे हत्या का कारण व्यक्तिगत हो या कारोबारी, लेकिन बार बार सामने आ रही घटनाएं सरकार के लिए चेतावनी हैं. अगर हर मामले को केवल अफवाह या प्रोपेगैंडा बताकर खारिज किया गया, तो समाज में अविश्वास और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है. अल्पसंख्यक समुदाय को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
बताते चलें कि नरसिंगदी की यह घटना एक बार फिर यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं. सरकार की सफाई अपनी जगह है, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है. जब तक हर घटना की गहराई से जांच नहीं होगी, तब तक इन सवालों का जवाब मिलना मुश्किल रहेगा.
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