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धुरंधर से डरा मुनीर! चंद घंटे के अंदर इमरान खान को किया अस्पताल से जेल शिफ्ट, चप्पे-चप्पे पर जवान, फोन-फोटो भी बैन
इमरान खान से आसिम मुनीर इस कदर डरा हुआ कि उन्हें चंद घंटे के अंदर अस्पताल से जेल शिफ्ट कर दिया गया. पूरे रास्ते 1000+ जवानों की तैनाती की गई थी. इतना ही नहीं शिफा हॉस्पिटल में फोन-फोटो सब बैन कर दिया गया था.
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और आदेश के बाद अडियाला जेल से शीफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जांच के बाद उन्हें फिर से जेल शिफ्ट कर दिया गया. इस दौरान सड़कों पर कर्फ्यू का आलम था. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसिया धुरंधर फिल्म या धुरंधर स्टाइल किसी भी सुरक्षा थ्रेट से निपटने के लिए पूरे रास्ते सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की थी. जेल से अस्पताल और फिर अस्पताल से जेल जाते वक्त अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए थे.
बॉलीवुड मूवी धुंरधर से डरी पाक फौज!
रिपोर्ट्स के मुताबिक इमरान खान को अडियाला जेल में करीब 1,111 दिन बिताने के बाद, भारी सुरक्षा के बीच शिफा अस्पताल ले जाया गया. ख़बर के मुताबिक इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में उनके हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, एंग्जायटी और आंखों की जांच और इलाज की योजना है. हालांकि पाक फौज इतनी डरी हुई है कि खान को चंद घंटे के अंदर फिर से जेल शिफ्ट कर दिया गया.
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इमरान खान के लिए छावनी में तब्दील कर दी गईं सड़कें
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सूत्रों मुताबिक इस्लामाबाद पुलिस ने शिफा में इमारन खान के लिए वार्ड को सुरक्षित कर लिया और शिफा अस्पताल के सिक्योरिटी ज़ोन में स्टाफ के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल को सख्ती से बैन कर दिया गया. ऐसा इसलिए ताकि खान की एक भी तस्वीर बाहर ना जा सके और उनकी मौजूदा स्थिति की भनक उनके समर्थकों और आम अवाम को ना लग सके.
इतना ही नहीं पूरी प्रक्रिया के दौरान कुल मिलाकर 830 से ज़्यादा फेडरल पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए. फोर्स की दो शिफ्ट में शाम 7:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक और सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक की ड्यूटी लगाई गई थी.
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इमरान खान मामले में पाक सरकार को झटका
आपको बता दें कि इमरान खान की जांच के लिए ही उनकी पार्टी और वकीलों को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी. इसके बाद जाकर सुप्रीम कोर्ट ने खान को जेल से अस्पताल जाने की मोहलत दी गई. इसके बावजूद पाक सरकार ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई थी.
हालांकि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गुरुवार को जोर का झटका दिया और पुनर्विचार याचिका लौटा दी. मालूम हो कि जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सुनाए फैसले के विरोध में सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने लौटा दिया. मामला इमरान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का था. कोर्ट ने अपने 18 अगस्त के आदेश में सरकार को इसकी व्यवस्था करने को कहा था.
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पाक सुप्रीम कोर्ट ने लौटा दी थी पुनर्विचार याचिका
प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने अधूरे दस्तावेज और पेपर बुक होने का हवाला देते हुए याचिका वापस की. हालांकि, एक सूत्र के मुताबिक सरकार आवश्यक संशोधनों के साथ याचिका दोबारा दाखिल कर सकती है. इसके साथ ही रजिस्ट्रार की आपत्तियों के खिलाफ अपील भी की जा सकती है. इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई के महासचिव सलमान अकम रजा ने दावा किया कि अदालत की आपत्तियों के बाद सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका वापस ले ली है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा, " सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का पालन न करने का कोई बहाना नहीं है और इमरान खान को तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित किया जाना चाहिए." सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए, जहां बहु-विषयक चिकित्सा बोर्ड उनकी जांच और उपचार करे.
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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान से आसिम मुनीर इस कदर डरा हुआ कि उन्हें चंद घंटे के अंदर अस्पताल से जेल शिफ्ट कर दिया गया. पूरे रास्ते 1000+ जवानों की तैनाती की गई थी. इतना ही नहीं शिफा हॉस्पिटल में फोन-फोटो सब बैन कर दिया गया था.#ShifaHospital #Pakistan #AsimMunir #AdialaJail pic.twitter.com/25Tmlqc5WL
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 21, 2026
तीन सदस्यीय पीठ ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था. अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में इमरान को अस्पताल में भर्ती कराने, उनके निजी चिकित्सकों और परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनके चिकित्सा रिकॉर्ड परिवार को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी.
अदालत ने इमरान के निजी चिकित्सक और उनकी बहन को उनके इलाज से जुड़े रहने की अनुमति भी दी थी. साथ ही अधिकारियों को परिवार के साथ नियमित संपर्क सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
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हालांकि, सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए इस आदेश की समीक्षा और इसे वापस लेने की मांग की थी. सरकार ने तर्क दिया था कि आदेश जेल नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है तथा इमरान खान के मामले में भेदभावपूर्ण है.
इमरान खान को किस शर्त पर दी गई इलाज की छूट!
याचिका में कहा गया कि यदि अदालत ने इस कानूनी प्रावधान पर गौर किया होता तो पूर्व प्रधानमंत्री को अदियाला जेल से इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश पारित नहीं किया जाता. यह याचिका इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के एडवोकेट जनरल नावेद हयात मलिक ने मुख्य आयुक्त की ओर से दायर की थी.
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सूत्र ये भी बतातें हैं कि इमरान खान को इलाज के लिए एक ही शर्त पर पाक फौज की ओर से मोहलत दी गई कि वो मौजूदा पाक फौज और फील्ड मार्शल के लिए मुसीबत नहीं बनेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि इमरान खान किसी कीमत पर समझौते के लिए तैयार नहीं हैं. वरना कब का उन्हें पाकिस्तान वापस ना आने की शर्त पर विदेश इलाज के लिए, निर्वासित जीवन के लिए जाने की डील दी गई थी. हालांकि अब जुल्फिकार बुखारी ने कहा है कि खान पाक फौज के लिए मुश्किलें खड़ी नहीं करेंगे.
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आपको बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बीच उनके करीबी और PTI के प्रवक्ता जुल्फी बुखारी ने किसी समझौते और खान-सेना के बीच नरमी के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो वह सेना या आर्मी चीफ आसिम मुनीर से सीधा टकराव नहीं करेंगे.