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'हमें ट्रंप की किसी डील से नहीं बंधे...', अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायल ने कर दिया खारिज, कहा- अपनी सुरक्षा की शर्तें हम तय करेंगे
अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायल ने खारिजा कर दिया है. इजरायल ने दो टूक कहा कि 'दक्षिणी लेबनान से आईडीएफ पीछे नहीं हटेगी. इतना ही नहीं इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेनग्विर ने साफ कर दिया है कि इजरायल ट्रंप के किसी समझौते से नहीं बंधा है.
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अमेरिका-ईरान के बीच आंतरिक समझौते के बीच इजरायल का सख्त रुख सामने आया है और इसका कड़ा विरोध किया है. इजरायल ने दो टूक कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा की शर्तें खुद तय करेगा, उसे कोई डील ऐसा करने से नहीं रोक सकती. इजरायल का ये स्टैंड डील की उस शर्त के विरोध में आया है जिसके तहत अमेरिका और ईरान के समझौते में लेबनान पर हमले रोकने को भी शामिल किया गया है.
अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायल ने किया खारिज
ईरान-अमेरिका के बीच समझौते का विरोध करते हुए इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेनग्विर ने कहा कि इजरायल किसी के डील से बंधा हुआ नहीं है. इसी बीच इजरायल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा.
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ट्रंप का कोई एग्रीमेंट हमें नहीं बांध सकता: इतामार बेनग्विर
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इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "ट्रंप का एग्रीमेंट हमें बांधता नहीं है. इजरायल अमेरिका के अंदर नहीं है और हम एक स्वतंत्र और संप्रभु देश हैं. हमारा कर्तव्य इजरायल के नागरिकों, आईडीएफ के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है और हजारों साल के देश निकाला के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक कर्तव्य है कि हम इजरायल की जमीन पर यहूदियों को सुरक्षा दें."
'इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं जो झुक जाए'
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उन्होंने कहा कि हर बार जब हम इजरायल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुके, तो हमने खून की कीमत ब्याज के साथ चुकाई. यह ओस्लो समझौते में सच था, यह 2006 में लेबनान समझौते में सच था और यह गाजा में हर उस समय सच था जब हमारी मुश्किलें बढ़ीं. हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के शुक्रगुजार हैं. फिर भी, इजरायल कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है. बता दें, बनाना रिपब्लिक का मतलब ऐसे देश से होता है जिसकी नीतियां या फैसले बाहरी शक्तियों के प्रभाव में हों और जो पूरी तरह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम न हो.
इजरायली मंत्री ने कहा, "मैं ये बातें प्रधानमंत्री से हर समय कहता हूं और हर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ पर बंद कमरों में इन्हें दोहराता हूं: ऐतिहासिक क्षणों में, ऐतिहासिक फैसला लिया जाना चाहिए. हम इस समझौते के साझेदार नहीं हैं जो हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करता, और यह हमें किसी भी तरह से बांधता नहीं है. हमें हिज्बुल्लाह को खत्म करने से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करना चाहिए, हमें ऐसे किसी भी इलाके से पीछे नहीं हटना चाहिए जिस पर हमारे लड़ाकों ने कब्जा कर लिया है और आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट कर दिया है."
इजरायल को आतंकियों पर फायरिंग के लिए एक भी पल चुप नहीं रहना चाहिए: इतामार बेनग्विर
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उन्होंने कहा कि हमें ऐसी स्थिति में वापस नहीं जाना चाहिए जहां हजारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की घेराबंदी करके बैठे हों और निश्चित रूप से हमें इजरायल पर हो रही फायरिंग के
सामने एक पल के लिए भी चुप नहीं रहना चाहिए. लेबनान से इजरायल की तरफ ड्रोन, यूएवी, या मिसाइल के हर लॉन्च से दहिया में इजरायली हमला होगा. कुछ महीने पहले यही प्रतिरोध का संतुलन था और हमें इसे किसी भी तरह से नहीं छोड़ना चाहिए.
इजरायली नेता ने आखिर में चेतावनी देते हुए कहा, "सबसे बढ़कर, हमें सबको यह स्पष्ट कर देना चाहिए: इजरायल के लोग 3,000 साल पुराने लोग हैं, हमेशा रहने वाले लोग जो लंबे रास्ते से नहीं डरते; हमें दुनिया बनाने वाले पर भरोसा है, हम एक मजबूत और गर्व करने वाले लोग हैं जो मजबूत और गर्व के साथ अपने देश लौटे हैं और अब दुश्मनों के सामने झुकने का इरादा नहीं रखते. वो दिन गए जब यहूदी मार खाते थे और चुप रहते थे. अब कभी नहीं!"
इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा: इजरायली रक्षा मंत्री
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वहीं अमेरिका के ईरान डील से काफी नाराज नजर आ रहे इजरायल के रक्षा मंत्री कॉट्ज ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा, जिसमें हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई खत्म करना भी शामिल है.
इजरायल ने बता दिया कब-कब और कैसे करेंगे हमला
कॉट्ज ने एक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक स्पष्ट नीति पर चल रहे हैं, जिसके तहत आईडीएफ बिना किसी टाइम लिमिट के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा जोन में रहेगा, ताकि सीमा और इजरायली समुदाय को जिहादी तत्वों से बचाया जा सके."
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा जोन से स्थानीय लोगों को हटा दिया जाएगा और जमीन के ऊपर और नीचे सभी आतंकवादी ढांचों को खत्म कर दिया जाएगा, जिसमें कॉन्टैक्ट-लाइन गांवों के घर भी शामिल हैं. यह आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के तौर पर काम करते थे."
इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा जोन पर कब्जा बनाए रखना युद्ध में आईडीएफ की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक है. इसलिए, हम लेबनान से आईडीएफ की वापसी का विरोध करते हैं, भले ही मौजूदा दबाव हों और जो भी आएंगे.
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ये बातें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और दूसरे सीनियर अमेरिकी अधिकारियों को साफ कर दी थीं. मैंने भी अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को यह स्पष्ट कर दिया था. आईडीएफ भी लेबनान में सुरक्षा जोन पर कब्जा बनाए रखने का समर्थन करता है. हम इजरायल की सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे. हम सुरक्षा जोन से पीछे नहीं हटेंगे."
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कॉट्ज ने यह भी चेतावनी दी कि अगर लेबनान की घटनाओं की वजह से ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो हम उस पर पूरी ताकत से हमला करेंगे. हम सिर्फ अपने नागरिकों और इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.
ההסכם של טראמפ אינו מחייב אותנו. ישראל לא כפופה לארצות הברית ואנחנו מדינה עצמאית וריבונית!
— איתמר בן גביר (@itamarbengvir) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 15, 2026
חובתנו לאזרחי ישראל לחיילי צה״ל ולעם היהודי וחובתנו ההיסטורית לנרדפים ולנרצחים היהודים באלפי שנות גלות, להעניק ביטחון ליהודים בארץ ישראל.
בכל פעם שנכנענו ללחץ בינלאומי על חשבון ביטחון…
आखिर हिजबुल्ला को क्यों निशाना बना रहा इजरायल?
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आपको बता दें कि बीते कई दिनों से, जब से ईरान के साथ सीजफायर पर अमेरिका और इजरायल के बीच बातचीत हुई है, इजरायल ने करीब 4 से 5 बार लेबनान के अंदर भीषण हमले किए हैं. इतना ही नहीं बीते दिन जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनी, इजरायल ने हिजबुल्ला के हमले का जवाब देते हुए बेरूत में भीषण हमले किए.
इजरायल के डर की मुख्य वजह क्या है?
इजरायल ने ईरान के प्रॉक्सी समूहों हिज्बुल्लाह और अन्य मिलिशिया के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को और तेज कर दिया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ट्रंप की आंतरिक राजनीति और साख को बढ़ाने के कारण अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को गिरवी रखने के मूड में बिल्कुल नहीं है. कहा जा रहा है कि इजरायल के लेबनान पर हमले बंद नहीं करने के ऐलान के बाद एक बार फिर युद्ध भड़कने की आशंका पैदा हो गई है.
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इजरायल की हमेशा से एक ही सोच रही है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने, खामेनेई रिजीम के खात्मे, उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने और उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक तक ईरान के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता. इजरायल को डर है कि ये डील बस ईरान की टाइम बाइंग टैक्टिस है और इसकी आड़ में वो फिर से आर्थिक रूप से मजबूत होने और अपने गुप्त ठिकानों पर परमाणु हथियार विकसित करने का मौका तलाश रहा है. वहीं हिजबुल्ला को छोड़ देने का मतलब है अपने पड़ोस नें सांप पालना और इस उम्मीद में जीना कि वो उसे कभी नहीं डसेगा. वो भी तब जब एक सीमा पर हमास है तो दूसरी सीमा पर हिजबुल्ला है, जो कि किसी कीमत पर इजरायल को बख़्शने के मूड में नहीं है, जिसका कि सोल एजेंडा है इजरायल का इस दुनिया से खात्मा.