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खामेनेई के जनाजे में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: हर देश के लिए अलग आयत, सऊदी को 'बद्र' का संदेश, भारत के लिए क्या?
ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा कार्यक्रम के जरिए बड़ा कूटनीतिक मैसेजिंग की. इस दौरान हर देश, सहयोगी, प्रॉक्सी जैसे कि हमास, हिजबुल्ला के लिए अलग-अलग कुरान की आयतें पढ़ी गईं. यहां तक की भारत के लिए भी अलग मैसेज दिया गया.
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ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार सुबह तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू हुई. यात्रा की शुरुआत ईरान का राष्ट्रगान बजाकर की गई. इस दौरान एक अजीब दृश्य देखने को मिली. ईरान ने हर देश के लिए अलग-अलग प्रकार की कुरान की आयतें पढ़ीं, जिसमें दूरगामी कूटनीतिक और सियासी मैसेज दिया गया था. इतना ही नहीं इसके जरिए बड़ी मैसेजिंग भी ईरान की ओर से की गई.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी ईरान ने खेला मास्टरस्ट्रोक
हुआ ये कि जब भी खामेनेई के रखे ताबूत के पास से गुजरता था या श्रद्धांजलि पहुंचता था तो कुरान की विभिन्न आयतें बजती थीं. मसलन सऊदी अरब के वक्त सूरह अल इमरान (3:13) की आयत पढ़ी गई. इस खास आयत के जरिए सऊदी अरब को इस्लामी एकजुटता का संदेश दिया गया. ये आयत 'बद्र की जंग' की याद दिलाती है, जो इस्लाम की पहली बड़ी लड़ाई थी.
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सऊदी के लिए बद्र की लड़ाई का संदेश
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इसमें एक छोटी मुस्लिम सेना ने अपने से बहुत बड़ी दुश्मन सेना को हराया था. बद्र की लड़ाई 624 ईस्वी में सऊदी अरब की धरती पर ही लड़ी गई थी. संभवत: ईरान ने खाड़ी की मौजूदा जंग में अपने से बहुत बड़ी अमेरिकी आर्मी और इजरायल की साझी सेना से लड़ाई और बढ़त को दिखाने की कोशिश की है. इस लिहाज से इसका सऊदी प्रतिनिधिमंडल के सामने पढ़ा जाना सबका ध्यान अपनी ओर खींच गया.
हर देश के लिए अलग कुरान की आयतें
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यूके की न्यूज़ वेबसाइट 'मिडिल ईस्ट आई' के मुताबिक ईरान का यह कदम रियाद के लिए एक कड़े संदेश के साथ-साथ साझा इस्लामी इतिहास को दर्शाने का भी एक तरीका है. इसे ईरान का साइलेंट डिप्लोमेसी भी कहा जाता है. ईरान ने इसके जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि इज़राइल और अमेरिका के साथ हुए युद्ध में वह न सिर्फ मजबूती से खड़ा रहा, बल्कि विजयी होकर उभरा, जबकि सऊदी अरब पूरी तरह वॉशिंगटन के प्रभाव में ही बना रहा.
ईरान की इस पूरी रणनीति के पीछे के मकसद के बारे में बात करते हुए हुए इराकी राजनीतिक विशेषज्ञ मोहम्मद हसन बहरानी ने बगदाद के 'अलहद टीवी' पर कहा कि अंतिम विदाई के दौरान जो कुछ भी हुआ, वह अचानक से नहीं हुआ था. उनके मुताबिक, शहीद नेता के अंतिम संस्कार में पहुंचे विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के समक्ष पढ़ी गई कुरान की आयतों को विशेष रूप से चुना गया था, जो उन देशों के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश था, जिनके प्रतिनिधि न चाहते हुए भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. ईरान ने इस तरीके को अपनाकर एक बार फिर दिखा दिया कि वो डिप्लोमेसी और नेगोसिएशन का माहिर खिलाड़ी है, जिसे अमेरिकी सीनेटर्स लगातार ट्रंप को चेतावनी देने के लिए कहते आ रहे हैं.
हमास, हिजबुल्ला, हूती के लिए कौन सी आयत पढ़ी गई?
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ईरान ने अयातुल्ला खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार के अवसर का इस्तेमाल अपने कूटनीतिक और सैन्य संबंधों को साधने के लिए बेहद सधे हुए तरीके से किया. 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' के तहत आने वाले अपने वैचारिक और सैन्य सहयोगियों का हौसला बढ़ाने के लिए शहादत, निष्ठा और विजय से जुड़ी कुरान की आयतें चुनी गईं. हमास के प्रतिनिधियों को उन आयतों के जरिए संदेश दिया गया जिनमें ईश्वर से किए गए वादे को निभाने का जिक्र है. वहीं, हिजबुल्लाह के लिए ऐसी आयतें पढ़ी गईं जो आस्था रखने वालों को कमजोर न पड़ने और शोक न मनाने की प्रेरणा देती हैं, क्योंकि जीत अंततः उन्हीं की होगी. इसके अलावा, लाल सागर में पश्चिमी जहाजों पर हमला करने वाले यमन के हूती विद्रोहियों को डटकर मुकाबला करने और हौसला बनाए रखने का पैगाम दिया गया. इस पूरी कवायद के माध्यम से तेहरान ने अपने करीबियों को यह स्पष्ट भरोसा दिलाया कि वह हर कदम पर उनके साथ खड़ा है.
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in the Republic of India extends its heartfelt gratitude and sincere appreciation to the friendly Government and people of India, especially the official delegation that attended on behalf of the Government and people of India, for… pic.twitter.com/Xv01SK2fjz
— Iran in India (@Iran_in_India) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 5, 2026
भारत के लिए कौन सी आयत और क्या संदेश दिया ईरान ने?
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दूसरी तरफ, भारत, रूस और चीन जैसे मित्र राष्ट्रों के लिए ईरान ने 'सॉफ्ट डिप्लोमेसी' (नरम कूटनीति) का सहारा लिया. इन देशों के प्रतिनिधियों के सामने युद्ध या संघर्ष के बजाय शांति और सांत्वना देने वाली आयतें पढ़ी गईं. चीन को बेहद नरम लहजे में यह संदेश दिया गया कि सफलता केवल अल्लाह की देन है, जबकि रूस के संदर्भ में कहा गया कि अंतिम जीत हमेशा नेकी करने वालों की होती है.
वहीं भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक बनावट को देखते हुए ईरान की ओर से 'कमजोर न पड़ें और शोक न मनाएं' आयत का एक बेहद सौम्य और संक्षिप्त हिस्सा चुना गया. इतना ही नहीं सोमवार को ईरान ने अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए भारत का विशेष आभार भी व्यक्त किया. तेहरान ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी रिश्तों का 'अनमोल प्रमाण' करार दिया और कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत द्वारा दिखाई गई एकजुटता को ईरानी आवाम हमेशा याद रखेगी.
खामेनेई के तदफीन के जरिए ईरान का एकजुटता संदेश
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आपको बता दें कि खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम के आखिरी दिन हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम सुबह से ही सड़कों पर जुटने लगा. खामेनेई के ताबूत को तेहरान के प्रमुख मार्गों से ले जाया जाएगा. इस दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता और सेना के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे.
ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम और सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी के मुताबिक, यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक जमावड़ा है. तेहरान से होते हुए जनाजा पवित्र शहर कोम पहुंचेगा. जहां पार्थिव शरीर को दफन करने की अंतिम रस्में अदा की जाएंगी.
ईरान के धार्मिक शहर कोम तक जाएंगे लोग
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खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने 193 बसों की व्यवस्था की है. ये बसें तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात की गई हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोगों और प्रतिनिधिमंडलों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में सुविधा हो.
«اللَّهُمَّ إِنَّا لَا نَعْلَمُ مِنْهُ إِلَّا خَيْرًا...»
— Iran in India (@Iran_in_India) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 5, 2026
A simple yet profound testimony from the funeral prayer for the martyred Imam of Iran, Ayatollah Sayyid Ali Khamenei.
A final farewell, a prayer, and a witness to a lifetime of faith, sacrifice, and steadfastness. pic.twitter.com/fhjCYMBLkk
इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि खामेनेई की अंतिम यात्रा विदाई नहीं, बल्कि उनके रास्ते पर चलने का संकल्प है. उन्होंने कहा, "मैं इसे विदाई नहीं मानता. यह उनके मिशन और विचारों को आगे बढ़ाने का वादा है."
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राष्ट्रपति ने कहा कि अंतिम संस्कार में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ और लोगों की आंखों के आंसू किसी आदेश से नहीं आ सकते. "लोगों का व्यवहार किसी भी भाषण से ज्यादा असरदार होता है और पूरी दुनिया इसे समझती है." इस बीच ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने 'न्याय की तलाश कभी न छोड़ने' की प्रतिज्ञा की है.
ईरान ने संघर्ष की ली प्रतिज्ञा
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प्रेस टीवी के अनुसार हातमी ने कहा, "जिन लोगों ने यह अपराध किया है, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि ईरान की जनता और हम सभी न्याय की अपनी मांग और उसकी प्राप्ति के प्रयास को कभी नहीं छोड़ेंगे. यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम इस प्रयास को लगातार जारी रखेंगे."