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मारा गया जैश सरगना मसूद अजहर का भाई ताहिर अनवर? संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से PAK फौज में हड़कंप!

जैश सरगना मसूद अजहर के बड़े भाई ताहिर अनवर की भी मौत हो गई है. एक-एक कर हो रहे जैश-लश्कर के आतंकियों के खात्मे ने इनके आकाओं मसलन ISI-PAK फौज की नींद उड़ गई है.

Masood Azhar Elder Brother Died in PAK/ File Photo
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पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावर ने पाक फौज और ISI की नींद उड़ा दी है. बीते हफ्ते लश्कर आतंकी बिलाल सलाफी के खात्मे के बाद जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. इसके बाद से ही जैश सहित अन्य आतंकी संगठनों में हड़कंप मच गया है.

मारा गया मसूद अजहर का बड़ा भाई!

सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक अनवर की नमाज-ए-जनाजा पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जामिया मस्जिद उस्मानी में पढ़ाई गई और देर रात उसे एक कब्रिस्तान में दफना दिया गया. सूत्र तो ये भी बताते हैं जैश सरगना खुद भी फातिहा पढ़ने पहुंचा था. यहां ये भी बता देना जरूरी है कि ताहिर की मौत की वजहों का खुलासा अब तक नहीं हो पाया है.

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खबर के मुताबिक अनवर, मसूद अजहर के पांच भाइयों में सबसे बड़ा था. कहा जाता है कि जैश में वो मसूद अजहर की परछाई की तरह वो काम करता और जैश-ए-मोहम्मद को खड़़ा करने में उसने एक अहम भूमिका निभाई थी और इस आतंकी संगठन के वारदातों को अंजाम देने में वो सक्रिय रूप से शामिल था.

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यहां ये बता देना जरूरी है कि मसूद अजहर ने पिछले साल दावा किया था कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई टारगेटेड एयरस्ट्राइक में उनके परिवार के 10 सदस्य और उनके चार सहयोगी मारे गए थे.

कौन था मोहम्मद ताहिर अनवर?

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  • जैश चीफ़ मसूद अज़हर का बड़ा भाई
  • अज्ञात बंदूकधारियों ने मारी गोली, कंफर्म नहीं!
  • जैश-ए -मोहम्मद के आतंकियों को Arms Training का इंचार्ज 
  • बहावलपुर में जैश के हेडक्वार्टर का सामान्य प्रशासन भी देखता था 
  • ऑपरेशन सिंदूर में ये बच गया था क्योंकि उस वक्त ख़ैबर पख्तुनख्वा में था 
  • बहावलपुर में जैश हेडक्वार्टर स्थित कब्रिस्तान में रात 10 बजे दफनाया गया
  • ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए थे अजहर के परिवार के कई लोग!

अजहर ने बयान जारी कर कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय, बहावलपुर स्थित जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह, पर हुए हमले में मारे गए लोगों में उनकी बड़ी बहन, उनके पति, एक भतीजा और उसकी पत्नी, एक भतीजी और परिवार के पांच बच्चे शामिल थे. आपको बता दें कि अजहर को 1994 में भारत में गिरफ्तार किया गया था और एयर इंडिया की फ्लाइट IC 814 के हाईजैक के बाद रिहा कर दिया गया था.

UN द्वारा घोषित आतंकी है मसूद अजहर!

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध मसूद अज़हर, भारत में हुए कई आतंकवादी हमलों की साज़िश में शामिल रहा है. इनमें 2001 का संसद हमला, 2008 का मुंबई हमला, 2016 का पठानकोट हमला और 2019 का पुलवामा हमला शामिल हैं.

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यह भी पढ़ें: जिसके जिम्मे थी नए आतंकियों की भर्ती, जो था भारत का दुश्मन, ऐसे लश्कर आतंकी बिलाल आरिफ को अज्ञात हमलावरों ने किया ढेर

आपको बता दें कि भारत के टॉप दुश्मनों में से एक मसूद अजहर को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तगड़ी मार पड़ी. ना सिर्फ मस्जिद सुभानअल्लाह मलबे में तब्दील हो गया बल्कि उसके परिवार के कई लोग मारे गए. अब संगठन में बदलाव की मांग जोड़ पकड़ने लगी है.

जैश-ए-मोहम्मद के अंदर नेतृत्व में बदलाव के संकेत! 

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जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर हमेशा ईद-उल-फितर से पहले अपने समर्थकों और कैडर के लिए मैसेज जारी करता है. एक बार फिर उसने अपने कैडर और समर्थकों के लिए एक ऑडियो क्लिप जारी किया है. हालांकि, भारतीय एजेंसियों के अधिकारी ने इस क्लिप में कुछ अलग नोटिस किया है. 

मसूद अजहर के ईद वाले मैसेज से क्या पता चला?

एजेंसियों के अनुसार, अपने ईद मैसेज में, अजहर टूटा हुआ लग रहा था और भारत के खिलाफ उसका सामान्य गुस्सा भरा मैसेज भी बहुत कमजोर लग रहा था. जैश-ए-मोहम्मद पर नजर रखने वाली भारतीय एजेंसियों का कहना है कि संगठन के अंदर सब ठीक नहीं है, अजहर बहुत बीमार लग रहा है, इसलिए कई लोग नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं.

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आतंकी संगठन के अंदर, कई लोगों को लगता है कि मौजूदा हालात से कोई मदद नहीं मिल रही है और यह बहुत सारे कामों को रोक रहा है. एक अधिकारी ने कहा कि अगर कोई ध्यान दे, तो इस बार लश्कर-ए-तैयबा ज्यादा सक्रिय लग रहा है. लश्कर के नेतृत्व को हमास के सदस्यों के साथ घुलते-मिलते देखा गया है. दूसरी ओर, जैश-ए-मोहम्मद साफ तौर पर शांत है और बड़े कार्यक्रमों से गायब है. इससे जैश के नेतृत्व के अंदर खींचतान का पता चलता है.

अजहर के बाद कौन संभालेगा जैश की कमान?

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कई लोगों को एहसास है कि अजहर को बदलना आसान नहीं होगा. ऐसा करने से कैडर का हौसला और भी गिरेगा. हालांकि, दूसरों को लगता है कि अगर सही कमांड नहीं होगी, तो संगठन खत्म होने लगेगा. फिलहाल कोई मजबूत लीडर न होने की वजह से इस संगठन के सदस्यों का बर्ताव भी बदल गया है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्चपैड हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जैश-ए-मुहम्मद के मुकाबले लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव ज्यादा सक्रिय दिखते हैं.

पहले तो लगा कि जैश-ए-मोहम्मद यह दिखाने के लिए नाटक कर रहा है कि अजहर बीमार और टूटा हुआ है. ऐसा माना जा रहा था कि ऐसा जेईएम चीफ को भारतीय सेना के निशाने से बचाने के लिए किया जा रहा था. हालांकि, अब इंटेलिजेंस एजेंसियों ने यह पुष्टि कर दी है कि अजहर के साथ सब ठीक नहीं है और टॉप शीर्ष नेतृत्व बदलने को लेकर बहस कर रहा है.

अब्दुल जब्बार को जैश में मिल सकती है बड़़ी जिम्मेदारी?

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एक और अधिकारी ने कहा कि संगठन इस बात को लेकर दुविधा में है कि अजहर के परिवार के किसी सदस्य को चीफ बनाया जाए या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे ऑपरेशन का अनुभव हो. अधिकारी ने बताया कि कैडर को एकजुट रखने के लिए परिवार का कोई सदस्य पहला ऑप्शन होगा. हालांकि, आतंकी संगठन को एक मजबूत कमांडर की भी जरूरत है.

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मिलिट्री मामलों के इंचार्ज अब्दुल जब्बार एक ऑप्शन हो सकता है क्योंकि वह ऑन-ग्राउंड ऑपरेशन देखता है, जिसमें लॉजिस्टिक्स और प्लानिंग भी शामिल है. अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ के चुने जाने की उम्मीद कम है, क्योंकि उसका मुख्य काम जैश-ए-मोहम्मद की फंडिंग के लिए डिजिटल वॉलेट मैनेज करने तक ही सीमित रहा है.

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