टूरिस्ट बस और टैक्सी वालों के लिए सख्त आदेश, अब हर 60 दिनों में लौटें अपने राज्य
Tourist Vehicles New Rules: पर्यटक वाहनों के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. इसका मकसद है कि पर्यटक परमिट (All India Tourist Permit) का दुरुपयोग रोका जा सके और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सके.
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Tourist Vehicles New Rules: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर के पर्यटक वाहनों के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. इसका मकसद है कि पर्यटक परमिट (All India Tourist Permit) का दुरुपयोग रोका जा सके और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सके. नए नियमों के तहत अब कोई भी पर्यटक वाहन अपने पंजीकरण वाले राज्य यानी ‘होम स्टेट’ से ही यात्रा शुरू करे या वहीं यात्रा समाप्त करे.
इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी बस या टैक्सी का रजिस्ट्रेशन दिल्ली में है, तो वह अपनी लंबी यात्रा दिल्ली से शुरू करेगी और दिल्ली में ही खत्म होगी. यह बदलाव खासतौर पर उन वाहनों के लिए है जो लंबे समय तक दूसरे राज्यों में रहते हैं और वहां व्यावसायिक रूप से काम करते हैं.
नए नियम क्या कहते हैं?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कोई भी पर्यटक वाहन अपने पंजीकरण वाले राज्य की सीमा से बाहर 60 दिनों से अधिक समय तक नहीं रह सकेगा. पहले यह समय सीमा 90 दिन थी. मंत्रालय का कहना है कि यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि वाहन जिस राज्य में पंजीकृत हैं, वहां के टैक्स और कानूनों का पालन किया जाए.
इसके अलावा अब हर वाहन अपने राज्य के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए VLT (Vehicle Location Tracking) डिवाइस से ट्रैक किया जाएगा. इसका मतलब है कि सरकार को पता रहेगा कि वाहन कहां और कब है. इसके अलावा, परमिट मिलने से पहले वाहन का सभी बकाया टोल और टैक्स जमा होना जरूरी होगा.
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बदलाव के कारण
इस नियम में बदलाव के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे पहला कारण है परमिट का दुरुपयोग रोकना. अक्सर देखा गया है कि वाहन एक राज्य में पंजीकृत होते हैं लेकिन सालों तक दूसरे राज्यों में काम करते रहते हैं. इससे वाहन के पंजीकरण वाले राज्य को राजस्व का नुकसान होता है.
दूसरा कारण है सुरक्षा और निगरानी. अब वाहनों को उनके वास्तविक स्थान और गति के बारे में जानकारी मिलती रहेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. तीसरा कारण है टैक्स और टोल का सही भुगतान. यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाए गए हैं कि वाहन मालिक अपने सभी बकाया टोल और टैक्स पहले चुका लें.
यात्रियों और ऑपरेटरों पर असर
इन बदलावों से वाहन ऑपरेटरों के लिए कुछ नई जिम्मेदारियां आ गई हैं। अब उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि उनका वाहन 60 दिनों के भीतर वापस अपने पंजीकरण वाले राज्य लौट जाए. इसके अलावा चालकों को हमेशा अपने पास यात्रा का पूरा विवरण रखना होगा. इसमें यात्रा की शुरुआत, गंतव्य और रास्ते में आने वाले सभी राज्यों का विवरण शामिल होगा. यह विवरण इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक रूप में रखा जा सकता है.
यात्रियों पर इसका असर यह होगा कि सफर थोड़ा महंगा हो सकता है. खासतौर पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बढ़ती ग्रीन फीस और एंट्री फीस के कारण किराया बढ़ सकता है.
महत्वपूर्ण जानकारी
प्रभावी तिथि: यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे.
अधिकतम समय सीमा: अब वाहन किसी बाहरी राज्य में 60 दिन से अधिक नहीं रह सकता.
अनिवार्यता: यात्रा का आरंभ या अंत हमेशा वाहन के पंजीकरण वाले राज्य में होना जरूरी है.
इन नियमों के लागू होने से पर्यटक वाहनों की निगरानी और नियंत्रण बेहतर होगा, टैक्स और टोल चोरी कम होगी और वाहन मालिकों को अपने राज्य के नियमों का पालन करना होगा. यात्रियों को भी थोड़ी महंगी यात्रा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका मकसद साफ-सुथरी और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है.
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