दिवाली से पहले LPG पर बड़ा फैसला, मोदी सरकार ने कंपनियों को दिए सख्त आदेश
LPG: सरकार ने 13 अगस्त को जारी निर्देश में रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों से कहा है कि वे LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए हर तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव तरीका अपनाएं.
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त्योहार और शादी के सीजन में रसोई गैस की मांग बढ़ने वाली है. इसी को देखते हुए मोदी सरकार ने देश में LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की कुल 21 कंपनियो को LPG का उत्पादन बढ़ाने का सख्त निर्देश दिए हैं. इसकी एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता है. अगर इस रास्ते से LPG का आयात प्रभावित होता है, तो देश मे गैस की कमी हो सकती है. सरकार चाहती है कि ऐसी स्थिति आने से पहले ही घरेलू उत्पादन को जितना संभव हो, उतना बढ़ा लिया जाए.
13 अगस्त के आदेश मे क्या कहा गया?
सरकार ने 13 अगस्त को जारी निर्देश में रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों से कहा है कि वे LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए हर तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव तरीका अपनाएं. जरूरत पड़ने पर नेफ्था जैसे दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों को LPG में बदलने के विकल्प पर भी काम करने को कहा गया है. यानी सरकार का सीधा मकसद है कि देश के अंदर ज्यादा से ज्यादा LPG तैयार हो, ताकि आयात पर निर्भरता कुछ कम की जा सके.
युद्ध और सप्लाई की चिंता शुरू होने से पहले भारत की घरेलू रिफाइनरियां करीब 36 हजार टन LPG रोजाना बनाती थीं. लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए उत्पादन पहले ही बढ़ाकर करीब 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है. अब सरकार का लक्ष्य इसे और बढ़ाकर 63,810 टन प्रतिदिन करने का है. अलग-अलग कंपनियों को उनकी क्षमता के हिसाब से लक्ष्य भी दिए गए हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज की घरेलू बाजार वाली इकाई को सबसे बड़ा, 18 हजार टन प्रतिदिन का लक्ष्य मिला है. वहीं उसकी निर्यात केंद्रित SEZ रिफाइनरी को इस आदेश से बाहर रखा गया है.
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आयात पर ज्यादा निर्भर है भारत
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 66 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से मंगाता है. इसमें लगभग 90 प्रतिशत आयात फारस की खाड़ी के रास्ते से आता है. यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर भारत की चिंता भी बढ़ जाती है. अगर समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, तो LPG की सप्लाई और कीमत दोनों पर दबाव पड़ सकता है. सकार इसी जोखिम को पहल से कम करना चाहती है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर के देशों से LPG मंगाना संभव तो है, लेकिन इसमें ज्यादा समय और खर्च लगता है. ऐसी सप्लाई के लिए काफी पहले से योजना बनानी पड़ती है. इसलिए फिलहाल सरकार का सबसे आसान और तेज रास्ता घरेलू उत्पादन बढ़ाना है.
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
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सरकार की कोशिश साफ है- त्योहारो और शादियो के दौरान लोगों को LPG सिलेंडर के लिए परेशान न होना पड़े. अगर घरेलू उत्पादन लक्ष्य के मुताबिक बढ़ता है, तो आयात में किसी तरह की रुकावट आने पर भी देश के पास कुछ अतिरिक्त सुरक्षा रहेगी. यानी सरकार अभी से तैयारी करके आने वाले महीनों में रसोई गैस की संभावित कमी का जोखिम कम करना चाहती है.