वैदिक मंत्रोच्चार, सात फेरे, सिंदूर और महादेव का आशीर्वाद...भारत आकर स्पेनिश जोड़े ने हिंदू रीति रिवाज से रचा ली शादी
भारत आया और यहीं का होकर रह गया स्पेनिश कपल. सात साला लिव-इन-रिलेशनशिप के बाद स्पेन के राउल और क्लारा ने जिस तरह भारतीय संस्कृति, हिंदू परंपरा, वैदिक तरीके से शादी की वो वायरल हो रहा है.
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कहते हैं प्यार की कोई सीमा नहीं होती. प्यार की कोई उम्र, बंधन और दायरा नहीं होता. दुनियाभर में प्यार की एक से बढ़कर एक कहानियाँ हैं, लेकिन ये कहानी थोड़ी अलग और रोचक है. अब तक आपने देसी मुंडा की गोरी मेम के साथ इश्क-विस्क और शादी की खबरें सुनी होंगी कि भारत का लड़का किसी विदेशी लड़की के प्यार में पड़ता है और फिर उसके साथ भारतीय रिति-रिवाज से शादी करता है. अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां प्रेमी युगल दोनों विदेशी-गोरे, लेकिन शादी सात फेरे, जयमाला और महादेव को साक्षी मानकर की.
जी हां, ये सच है. ये अनोखा, बेहद फिल्मी और रोमांचक नजारा ब्रह्माजी के शहर माने जाने वाले पुष्कर में देखने को मिला. दरअसल यहां स्पेन से आए एक विदेशी जोड़े, क्लारा और राउल ने अपनी सात साल पुरानी लव स्टोरी को सनातनी पहचान दी और दांपत्य जीवन में बंध गए. दोनों युगल जोड़ों ने ना सिर्फ ब्रह्म सरोवर के पवित्र तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाई और बल्कि अपने सात साल के प्यार को सामाजिक, कानूनी और आधिकारिक रूप दे दिया है.
दरअसल पिछले 7 साल से स्पेन में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे स्पेनिश कपल ने ब्रह्म सरोवर के तट पर अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. इस दौरान दोनों ने सनातनी संस्कृति और हिंदू रिति-रिवाजों को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. दोनों ने इस दौरान हिंदू धर्म की परंपराओं और मान्यताओं का पूरा सम्मान किया, उसका अनुपालन किया.
जयमाला डाली, मांग भरी और एक-दूजे के हो गए राउल और क्लारा
इस दौरान दूल्हा और दुल्हन ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई और फिर दूल्हे राउल ने पारंपरिक तरीके से मंत्रोच्चार के बीच दुल्हन क्लारा की मांग सिंदूर से भरी. शादी के बाद नवविवाहित दंपती ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पुष्कर की इस पावन धरती पर भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह करना उनके जीवन का सबसे अनोखा, अलौकिक और सुखद अनुभव रहा है.
सात साल की प्रेम कहानी, फिर भारत में शादी
क्लारा और राउल की प्रेम कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. क्लारा और राउल की लव लाइफ की बात करें तो दोनों करीब अपनी जर्नी, वर्क और प्रोफेशन सिलसिले में दोनों की पहली मुलाकात हुई थी. दोनों में बातचीत हुई, दोस्ती गहरी होती चली गई और कब ये रिश्ता प्यार में बदल गया, दोनों को भी पता नहीं चला. इसके बाद क्लारा और राउल लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे. इसी दौरान दोनों ने अपनी जिंदगी को एनज्वॉय करने का फैसला किया और निकल पड़े वर्ल्ड टूर पर.
भारत आकर भारत का हो गया स्पेनिश जोड़ा
जब यह विदेशी जोड़ा भारत भ्रमण पर निकला, तो राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और खासतौर पर पुष्कर की आध्यात्मिक ऊर्जा ने दोनों को भीतर तक प्रभावित कर दिया. पुष्कर की पवित्र भूमि और सनातन परंपराओं से प्रभावित होकर दोनों ने यह फैसला किया कि वे अपने रिश्ते को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह के बंधन में बांधेंगे.
पंडित ने निभाई ‘मामा’ की रस्म, गौरव ने संभाली शादी की जिम्मेदारी
आपको बता दें कि शादी की तैयारियों का पूरा आयोजन पुष्कर के कृष्ण घाट और ब्रह्म सरोवर के तट पर किया गया. स्थानीय निवासी गौरव पाराशर ने विदेशी जोड़े की भावना को समझते हुए विवाह की सभी व्यवस्थाएं संभालीं. पंडित वीरेंद्र पाराशर और लखन पाराशर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह मंडप सजाया और फेरे सहित सभी पारंपरिक रस्में संपन्न कराईं. ये जानकर हैरानी होगी कि क्लारा और राउल के परिवार का कोई भी सदस्य भारत में मौजूद नहीं था. ऐसे में भारतीय संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए पंडित ने स्वयं दुल्हन क्लारा का ‘मामा’ बनकर कन्यादान की रस्म निभाई. यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया.
महादेव का आशीर्वाद, उतारी आरती
अंत में बात आती है उनके आशीर्वाद की जिनसे पूरी दुनिया चलती है. जिनके बारे में कहा जाता है कि एक खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए महादेव की कृपा होनी चाहिए. नवविवाहित जोड़े ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में पुष्कर सरोवर की पूजा-अर्चना की और आरती भी उतारी. इसके पश्चात वे घाट पर स्थित प्राचीन बेलपत्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की.
‘हिंदू रिति-रिवाज से शादी सपने पूरे होने से कम नहीं’
क्लारा और राउल ने बताया कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन रीति-रिवाजों में उनकी बचपन से ही गहरी रुचि रही है. हिंदू विधि-विधान से विवाह करना उनके लिए किसी सपने के साकार होने जैसा है. अब यह विदेशी जोड़ा अपने देश लौटते समय भारतीय संस्कृति और संस्कारों का संदेश अपने साथ लेकर जाएगा.
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