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योगी की पाती: कांवड़ यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री की बड़ी अपील, कहा- केवल धार्मिक अनुष्ठान तक नहीं रखें सीमित, बनाएं सामाजिक उत्सव
सीएम योगी ने कांवड़ यात्रा को लेकर बड़ी अपील की. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धार्मिक अनुष्ठान, पर्व, संस्कार और लोक जीवन की परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. श्रावण में निकलने वाली ये यात्रा भी ऐसी ही अनुपम परंपरा है, जो प्रत्येक वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था के सूत्र में बांधती है.
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सीएम योगी ने सावन के दूसरे सोमवार को प्रदेशवासियों के नाम विशेष योगी की पाती लिखी है. उन्होंने कहा कि कांवड़ सिर्फ आस्था नहीं, सामाजिक एकता और सेवा का भी महापर्व है. उन्होंने इसे सामाजिक उत्सव बनाने की अपील की.
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय परंपराओं में कुछ यात्राएं धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं होतीं, अपितु वे समाज, संस्कृति, अनुशासन एवं लोकजीवन की जीवंत पाठशाला भी बन जाती हैं. श्रावण में निकलने वाली कांवड़ यात्रा ऐसी ही एक अनुपम परंपरा है, जो प्रत्येक वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के सूत्र से जोड़ती है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रत्येक शिवभक्त की यात्रा सम्मानपूर्ण ढंग से संपन्न हो, इसके लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्पित है. व्यवस्थित शिविर, शुद्ध पेयजल, चिकित्सकीय सहायता, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, प्रभावी यातायात प्रबंधन तथा नियंत्रण कक्ष से सतत निगरानी के माध्यम से यात्रा को सुचारु बनाया गया है.
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अपनी पाती में सीएम ने आम लोगों और शिव भक्तों से अपील की कि कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का उत्सव बनाएं. पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाएं तथा प्लास्टिक-मुक्त जीवन का संकल्प लें. यदि मार्ग में एंबुलेंस अथवा विद्यालय वाहन जा रहा हो, तो उसे प्राथमिकता दें. हमारी छोटी-सी सजगता किसी के लिए बड़ी सहायता बन सकती है.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान सावन की कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक एकता, सेवा, अनुशासन और परस्पर सहयोग का महापर्व बनाने का आह्वान किया. प्रदेशवासियों के नाम जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय सनातन परंपरा की ऐसी अनूठी यात्रा है, जो हर वर्ग और समाज को आस्था के एक सूत्र में जोड़ती है.
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
भारतीय परंपराओं में कुछ यात्राएं धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं होतीं, अपितु वे समाज, संस्कृति, अनुशासन एवं लोकजीवन की जीवंत पाठशाला भी बन जाती हैं। श्रावण में निकलने वाली कांवड़ यात्रा ऐसी ही एक अनुपम परंपरा है, जो प्रत्येक वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को… pic.twitter.com/Gex9QSpGDX— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 10, 2026Advertisement
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उन्होंने कहा कि इस यात्रा में सिर पर गंगाजल से भरी कांवड़ लेकर श्रद्धालु कठिन मार्ग तय करते हैं और अंततः भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा में जाति, धर्म, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं रहता. हर वर्ग के लोग इसमें श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं. यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है और यही सनातन संस्कृति के समभाव का जीवंत उदाहरण भी है.
मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा की पौराणिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में विष धारण किया और नीलकंठ कहलाए. विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया. तभी से श्रावण मास में गंगाजल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है. कांवड़ यात्रा इसी श्रद्धा और परंपरा का विस्तार है.
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योगी ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह त्याग, तप, आत्मसंयम, सेवा और परस्पर सहयोग का भी संदेश देती है. तप से चरित्र मजबूत होता है, सेवा से समाज सशक्त होता है और एकता से राष्ट्र मजबूत होता है. उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं. कांवड़ियों के स्वागत के साथ ही यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, चिकित्सा, प्रकाश, पेयजल और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है. प्रशासनिक अमले के साथ सामाजिक और स्वयंसेवी संगठन भी श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं.
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्सव और सेवा का उत्सव बनाएं. उन्होंने कहा कि यदि मार्ग में किसी कांवड़िए को थोड़ी-सी भी परेशानी हो तो उसकी मदद करना भी पुण्य का कार्य है. कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा और सहयोग के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना चाहिए.
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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति, आस्था और श्रद्धा के लिए प्रसिद्ध है. कांवड़ यात्रा की गरिमा बनाए रखना हम सभी का दायित्व है. यह यात्रा केवल भगवान शिव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का जीवंत संदेश भी देती है.