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योगी सरकार का बड़ा ऐलान... 10 साल बाद यूपी में बनेगा नया वेज बोर्ड, श्रमिकों की सैलरी में होगा बड़ा बदलाव
यूपी में 2014 के बाद अब नए वेज बोर्ड का गठन होने जा रहा है. योगी सरकार ने अगले माह इसका ऐलान किया है, जो नोएडा फैक्ट्री विवाद के बाद बनी हाईपावर कमेटी की सिफारिश पर आधारित है. वेज बोर्ड न्यूनतम मजदूरी की मूल दर तय करता है, लेकिन पिछले 10 साल से इसका गठन नहीं हुआ, जिससे सिर्फ महंगाई भत्ता ही बढ़ता रहा.
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उत्तर प्रदेश से श्रमिकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. करीब एक दशक के इंतजार के बाद अब प्रदेश में नए वेज बोर्ड का गठन होने जा रहा है. योगी सरकार ने अगले माह इस दिशा में बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है. यह फैसला नोएडा की फैक्ट्रियों में हाल ही में हुए बवाल और उसके बाद भेजी गई हाईपावर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है.
क्या होता है वेज बोर्ड और क्यों है जरूरी?
दरअसल, वेज बोर्ड ही वह संस्था होती है जो न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों का निर्धारण करती है. प्रदेश में वर्ष 2014 के बाद से वेज बोर्ड का गठन नहीं हुआ था. इसका असर यह रहा कि पिछले कई सालों से श्रमिकों के मूल वेतन में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, केवल महंगाई भत्ते में ही समय-समय पर बढ़ोतरी होती रही. अब नए वेज बोर्ड के गठन से मजदूरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
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2014 के बाद से नहीं बदली मूल मजदूरी
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अगर पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो 28 जनवरी 2014 को श्रम विभाग ने वेज बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी तय की थी. उस समय अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 5750 रुपये, अर्द्धकुशल की 6325 रुपये और कुशल श्रमिकों की 7085 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई थी. इसके बाद हर छह महीने में महंगाई भत्ते के जरिए मजदूरी में बढ़ोतरी होती रही, लेकिन मूल दरें जस की तस बनी रहीं. हालांकि, प्रदेश सरकार ने नए वेज कोड को ध्यान में रखते हुए अंतरिम मजदूरी में बढ़ोतरी जरूर की है. अप्रैल से लागू नई दरों के अनुसार नोएडा और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 11313 रुपये से बढ़ाकर 13690 रुपये कर दी गई है. अर्द्धकुशल श्रमिकों को अब 15059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16868 रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है.
अन्य शहरों और जिलों में भी बढ़ी मजदूरी
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अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी मजदूरी में इजाफा हुआ है. यहां अकुशल श्रमिकों को 13006 रुपये, अर्द्धकुशल को 14306 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16025 रुपये मिल रहे हैं. वहीं अन्य जनपदों में अकुशल मजदूरी 12356 रुपये, अर्द्धकुशल 13591 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 15224 रुपये तक पहुंच गई है.
नए वेज बोर्ड से क्या बदलेगा?
अब जब नया वेज बोर्ड गठित होगा तो इन दरों का फिर से आकलन किया जाएगा और मूल वेतन में संशोधन किया जाएगा. खास बात यह है कि अब न्यूनतम मजदूरी और महंगाई भत्ते की दरें एकसमान नहीं रहेंगी, जिससे श्रमिकों की आय संरचना में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलेगा.
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सरकार का बयान और श्रमिकों से अपील
श्रम और सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाना है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में श्रमिकों का विशेष ध्यान रखा गया है और कहीं कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ. नोएडा में हुआ बवाल साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है.
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बताते चलें कि सरकार की ओर से श्रमिकों से अपील की गई है कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपने अधिकारों को समझते हुए सही दिशा में आगे बढ़ें. कुल मिलाकर, नए वेज बोर्ड का गठन प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए राहत और उम्मीद की नई किरण लेकर आने वाला है. अब सभी की नजर अगले महीने होने वाले इस बड़े फैसले पर टिकी है.