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वंदे मातरम, आयुष्मान और चिकन नेक... सुवेंदु सरकार ने 12 दिनों में 11 बड़े फैसले लेकर बदल दी बंगाल की दिशा
बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई बीजेपी सरकार ने सत्ता संभालते ही कई बड़े फैसले लिए हैं. प्रशासन, जनकल्याण, आरक्षण और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर लिए गए इन निर्णयों से राज्य की नीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
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पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राजनीति से लेकर प्रशासन तक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने सत्ता संभालते ही कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्होंने राज्य की पुरानी नीतियों की दिशा ही बदल दी है. नई सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब बंगाल में प्रशासनिक ढांचा, जनकल्याण योजनाएं, आरक्षण नीति और कानून व्यवस्था नए तरीके से संचालित की जाएगी. सरकार के शुरुआती फैसलों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह गर्म कर दिया है.
लक्ष्मी भंडार की जगह शुरू हुई अन्नपूर्णा योजना
नई सरकार का सबसे बड़ा फैसला महिलाओं से जुड़ी योजना को लेकर आया है. टीएमसी सरकार की चर्चित ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को बंद कर अब ‘अन्नपूर्णा योजना’ लागू कर दी गई है. इस योजना के तहत 25 से 60 साल तक की पात्र महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजे जाएंगे. यह पैसा डीबीटी के जरिए आधार लिंक खातों में ट्रांसफर होगा. हालांकि सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और आयकर दाता इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं. सरकार ने बताया कि इसके लिए 1 जून से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी.
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बंगाल में लागू हुई आयुष्मान भारत योजना
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नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में बड़ा स्वास्थ्य फैसला लेते हुए आयुषमान भारत योजना को बंगाल में लागू करने का ऐलान कर दिया. इसके तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा. पिछली सरकार ने इस योजना को लागू नहीं किया था और अपनी अलग स्वास्थ्य साथी योजना चला रही थी. बीजेपी सरकार का दावा है कि इससे लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा.
महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सौगात
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सरकार ने महिलाओं को राहत देते हुए राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा भी कर दी है. यह सुविधा शहरी और ग्रामीण दोनों रूटों पर लागू होगी. माना जा रहा है कि इससे नौकरीपेशा महिलाओं, छात्राओं और रोज सफर करने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी. सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है.
चिकन नेक कॉरिडोर पर केंद्र के साथ बड़ा फैसला
राज्य सरकार ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ से जुड़े 7 राष्ट्रीय राजमार्गों को केंद्र सरकार की एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दे दी है. यह इलाका पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. सरकार का कहना है कि इससे सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही और तेज होगी. सुरक्षा विशेषज्ञ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम फैसला मान रहे हैं.
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर तेज होगी फेंसिंग
सीमा सुरक्षा बल को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा के जिन हिस्सों में अभी तक बाड़ नहीं लगी है, वहां 45 दिनों के भीतर जमीन बीएसएफ को सौंप दी जाएगी. बताया जा रहा है कि करीब 286 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग का काम अभी बाकी है.
स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य
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नई सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव किया है. 18 मई से सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया गया है. स्कूल प्रशासन को इसका वीडियो रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है. इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है.
आरक्षण व्यवस्था पर बड़े फैसले
सरकार ने सरकारी नौकरियों की उम्र सीमा में 5 साल की छूट देकर युवाओं को राहत दी है. इसके तहत ग्रुप A के लिए अधिकतम आयु 41 वर्ष, ग्रुप B के लिए 44 वर्ष और ग्रुप C-D के लिए 45 वर्ष कर दी गई है. वहीं कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करते हुए 7 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था बहाल की गई है. इसमें कुर्मी, यादव, तेली और कुछ मुस्लिम समुदायों को भी शामिल किया गया है.
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फर्जी प्रमाण पत्र और भ्रष्टाचार पर सख्ती
सरकार ने 2011 से जारी सभी SC, ST और OBC प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं. दावा किया जा रहा है कि पिछले कई वर्षों में बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए थे. इसके अलावा संदीप घोष के खिलाफ भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और खरीद घोटाले के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी गई है. फिलहाल मामले की जांच सीबीआई और ईडी कर रही हैं.
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बताते चलें कि नई सरकार के इन फैसलों से साफ है कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर राज्य की जनता और राजनीति दोनों पर गहराई से देखने को मिल सकता है.