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उन्नाव में पुलिस अधिकारी के साथ हुई ‘हेरा-फेरी’ ठगों ने ऐंठ लिए 50 लाख, ठगी का तरीका चर्चा में आया

क्या हो जब पुलिस खुद ही स्कैम में फंस जाए, ठगी का शिकार हो जाए. ठगी भी मामूली नहीं बल्कि पूरे 50 लाख की.

जेल अधीक्षक पंकज कुमार
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चोरी, लूट, डकैती, स्कैम और ठगी के शिकार लोग मदद के लिए सबसे पहले कहां जाते हैं? जाहिर है सबसे पहला खयाल तो पुलिस का ही आता है. स्कैम में फंसे लोग दौड़े-दौड़े थाने जाते है और अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन क्या हो जब पुलिस खुद ही स्कैम में फंस जाए, ठगी का शिकार हो जाए. ठगी भी मामूली नहीं बल्कि पूरे 50 लाख की.

ये चौंकाने वाला मामला UP के उन्नाव से सामने आया है. जहां ठगों ने पुलिस अधिकारी पकंज कुमार से 50 लाख रुपए ऐंठ लिए. ठगों ने पकंज कुमार की बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के नाम पर इस बड़ी ठगी को अंजाम दिया और भाग निकले. अब बेचारे पुलिस अधिकारी पंकज कुमार खुद मामला दर्ज करवाने पुलिस की शरण में पहुंचे. 

ठगों ने कैसे दिया वारदात को अंजाम? 

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न कॉल, न मैसेज, न OTP, न ब्लैकमेलिंग, ठगों ने इस बार नया रास्ता निकाला. दरअसल पंकज कुमार उन्नाव जिला कारागार में जेल अधीक्षक के रूप में तैनात हैं. उन्होंने सदर कोतवाली में तहरीर देते हुए बताया, बेटी का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन करवाने के लिए जस्ट डायल के माध्यम से स्टडी पाथ-वे कंसल्टेंसी से संपर्क किया था. कसंल्टेंसी से जुड़े अभिनव शर्मा से उनकी कॉल पर बात हुई. 

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अभिनव ने उन्हें बेटी का एडमिशन हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में दिलाने का आश्वासन दिया. इसके बाद 19 जुलाई 2025 को इसी कॉलेज के नाम से उन्होंने 10-10 लाख डीडी (Demand Draft) बनवाई. इसके बाद दोबारा 24 अक्टूबर को फिर एक बैंक अकाउंट में 30 लाख का RTGS किया गया. ये ट्रांजेक्शन SBI की कोटक महिंद्रा ब्रांच उन्नाव से लखनऊ के कोटक महिंद्रा ब्रांच में किया गया था. पंकज कुमार ने ये ट्रांजेक्शन अपने अकाउंट से किया था.

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फोन स्विच ऑफ, ऑफिस में जड़ा ताला

इस पूरे प्रोसेस में 4 महीने का वक्त लगा. जब बेटी के एडमिशन के लिए पकंज कुमार ने अभिनव से कॉन्टेक्ट किया तो फोन स्विच ऑफ आया. पकंज कुमार बार-बार अलग-अलग नंबरों से ट्राय करते रहे लेकिन कोई रेस्पॉन्स नहीं आया. इसके बाद जेल अधीक्षक कंसल्टेंसी के लखनऊ स्थित ऑफिस पहुंचे तो वहां भी ताला जड़ा था. 

गिरोह से जुड़े हैं आरोपी 

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जेल अधीक्षक ने इस मामले में लखनऊ समेत कई जिलों में आरोपियों के खिलााफ केस दर्ज करवाया है. पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू कर दी है. वहीं, साइबर पुलिस भी एक्टिव हो गई है. अभी तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक, अभिनव शर्मा के साथ-साथ संतोष कुमार नाम का शख्स भी ठगी में शामिल था. दोनों संगठित गिरोह के सदस्य हैं. ठगी के लिए वह टेम्परेरी बैंक अकाउंट, एड्रेस और फोन नंबर का इस्तेमाल करते हैं. फिर वारदात को अंजाम देने के बाद सब बंद कर फरार हो जाते हैं. 

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