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UP में किसान रजिस्ट्री के लिए सरकार की सख्त रणनीति, हर गांव में कैंप, 15 मई से योजनाओं के लिए फार्मर आईडी जरूरी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से उर्वरक, बीज और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी. इस निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी और बढ़ गई है, ताकि समय सीमा के भीतर अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके.
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राज्य सरकार ने किसान रजिस्ट्री को 100 प्रतिशत पूर्ण करने के लिए मिशन मोड में व्यापक रणनीति लागू कर दी है. तय योजना के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक किसान रजिस्ट्री का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है.
15 अप्रैल तक किसान रजिस्ट्री कैंप स्थापित किए जाएंगे
राज्य सरकार के निर्देशानुसार 15 अप्रैल तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसान रजिस्ट्री कैंप स्थापित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को मौके पर ही पंजीकरण की सुविधा मिल सके. इसके साथ ही जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे ऐसे गांवों की पहचान करें जहां रजिस्ट्री का कवरेज कम है और 6 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच विशेष अभियान चलाकर वहां 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करें.
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क्या है किसान रजिस्ट्री का उद्देश्य
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प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी भूमि धारक किसान, चाहे वे पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े हों या नहीं, किसान रजिस्ट्री में शामिल किए जाएं. इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे.
अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए क्या हो रहा?
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जागरूकता को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाते हुए जिलों को निर्देश दिया गया है कि अखबारों में विज्ञापन, लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं और स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए. इसके साथ ही ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके.
कब तक फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से उर्वरक, बीज और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी. इस निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी और बढ़ गई है, ताकि समय सीमा के भीतर अधिकतम किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके.
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सरकार की इस पहल से क्या मदद मिलेगी
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अधिकारियों के अनुसार, यह पहल न केवल योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन में मदद करेगी, बल्कि किसानों के लिए एकीकृत डेटाबेस तैयार कर भविष्य की कृषि नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी.