Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

सहारनपुर PNB में 17 करोड़ के नकली नोटों से हड़कंप, करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची इतनी बड़ी रकम? जांच में हुआ बड़ा खुलासा

यूपी के सहारनपुर के PNB करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकली करेंसी मिलने के बाद पुलिस और RBI जांच में जुटी है. जांच एजेंसियां नकली नोटों के स्रोत और चेस्ट तक पहुंचने की प्रक्रिया खंगाल रही हैं. साथ ही कैश रिकॉर्ड, बंडल नंबर और सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

Image Source: Screengrab
Loading Ad...

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. बैंक में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकली करेंसी मिलने के बाद पुलिस और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की टीमें जांच में जुटी हैं. मंगलवार को भी बैंक में देर शाम तक जांच-पड़ताल का सिलसिला चलता रहा. अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे.

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जांच सिर्फ बरामद नकली नोटों तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसियां अब उस पूरे रास्ते को खंगाल रही हैं, जिससे गुजरकर ये नोट बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंचे. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली करेंसी एक साथ चेस्ट में पहुंची थी या फिर अलग-अलग समय पर बैंकिंग सिस्टम के जरिए धीरे-धीरे यहां जमा होती रही.

करेंसी चेस्ट तक नकदी पहुंचने की तय प्रक्रिया

Loading Ad...

बैंक के करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने और जमा होने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है. नोटों को प्राप्त करने के बाद उनकी गिनती और सत्यापन किया जाता है. इसके बाद नोटों को बंडल के रूप में तैयार कर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है. ऐसे में करोड़ों रुपये की नकली करेंसी का इस पूरी व्यवस्था से गुजर जाना जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम सवाल बना हुआ है. टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध नोट किस तारीख को चेस्ट में पहुंचे. उनका बंडल नंबर क्या था और रकम किस शाखा या करेंसी चेस्ट से आई थी. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि नकदी किस कर्मचारी ने प्राप्त की और उसका सत्यापन किस अधिकारी ने किया था. कैश के आने-जाने से जुड़े रजिस्टर और दूसरे दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है.

Loading Ad...

दूसरी शाखा से नकली नोट आने की भी आशंका

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कहीं नकली नोट किसी दूसरी बैंक शाखा या किसी अन्य करेंसी चेस्ट से तो नहीं आए. अगर ऐसा सामने आता है तो जांच का दायरा सहारनपुर से बाहर भी बढ़ सकता है. इसके अलावा बैंक में नोटों की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों और सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है. जांच एजेंसियां यह समझना चाहती हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोटों की पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी. करेंसी चेस्ट से जुड़े तीन बैंक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है. हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी की वास्तविक भूमिका या नकली नोटों के स्रोत से उसका संबंध तय करना जल्दबाजी होगी. फिलहाल जांच का फोकस इस बात पर है कि नकली नोट बैंकिंग सिस्टम की किन-किन परतों से होकर करेंसी चेस्ट तक पहुंचे.

Loading Ad...

4.30 लाख की कमी से खुला बड़ा मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत एक अपेक्षाकृत छोटी रकम की कमी से हुई, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामला काफी बड़ा निकल गया. करीब 11.50 करोड़ रुपये की करेंसी RBI के जयपुर कार्यालय भेजी गई थी. वहां जांच के दौरान करीब 4.30 लाख रुपये की कमी सामने आई. इसके बाद जब पड़ताल आगे बढ़ी तो करेंसी चेस्ट के भीतर करीब 7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने की बात सामने आई. जांच का दायरा बढ़ने के साथ संदिग्ध नकली करेंसी की कुल मात्रा करीब 17 करोड़ रुपये से ज्यादा तक पहुंच गई. इसके बाद बैंक की कैश गिनती, छंटाई, सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. अब जांच एजेंसियां इसी बात का जवाब तलाश रही हैं कि करोड़ों के नकली नोट इतने लंबे समय तक सिस्टम की नजर से कैसे बचते रहे.

यह भी पढ़े: SCO में पाकिस्तान की फजीहत, जैसे ही आतंकवाद पर दहाड़े PM मोदी, मुंह छिपाते दिखे शहबाज शरीफ

21 सदस्यीय टीम कर रही जांच

Loading Ad...

मामले की गंभीरता को देखते हुए RBI और पंजाब नेशनल बैंक की 21 सदस्यीय संयुक्त टीम मंगलवार को सहारनपुर पहुंची. टीम ने करीब आठ घंटे तक बैंक में जांच-पड़ताल की. अब अधिकारी कैश के पूरे ट्रेल को समझने की कोशिश कर रहे हैं. टीम नकदी की प्राप्ति, गिनती, छंटाई, सत्यापन, बंडल तैयार करने और करेंसी चेस्ट में जमा करने से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. नोटों के सीरियल नंबर, बंडल और सील से संबंधित दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि नकली नोट पहली बार कहां से बैंकिंग सिस्टम में दाखिल हुए और किस स्तर पर उनकी पहचान नहीं हो सकी. इसके साथ ही हाउसकीपर से जुड़े रुपये की कमी के मामले की जांच भी जारी है. दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं, यह भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

आरोपियों के बैंक खाते सीज, हरियाणा तक पहुंची जांच

अब जांच एजेंसियों ने मामले में सामने आए आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर डालनी शुरू कर दी है. आरोपियों के बैंक खाते सीज कराए गए हैं. इन खातों में हुए लेनदेन और पिछले वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध रकम का कहीं आपस में लेनदेन तो नहीं हुआ. मामले की जांच हरियाणा तक पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है और वहां भी दबिश दी गई है.

Loading Ad...

यह भी पढ़े:भारत की GDP ने दुनिया को चौंकाया! 7.8 % ग्रोथ से बनाया रिकॉर्ड, PM मोदी बोले- बड़ी उपलब्धि है

यह भी पढ़ें

बहरहाल, इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकली करेंसी आखिर बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे. जांच एजेंसियां अगर इस सवाल का जवाब तलाश लेती हैं तो पूरे नेटवर्क और बैंकिंग सिस्टम में हुई संभावित चूक की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है. फिलहाल सहारनपुर का यह मामला नकली नोटों के साथ-साथ बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया के लिए भी एक बड़ी परीक्षा बन गया है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...