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बिना धुआं, बिना ओवरहेड तार...ऐसे दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, हरियाणा से होगी शुरुआत, जानिए इसकी अनोखी तकनीक

Hydrogen Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शरूआत नहीं होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक की ओर भारत के बढ़ते कदमों का प्रतीक भी होगी. खास बात यह है कि इस 10 कोच वाली ट्रेन को पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है.

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11 Jul 2026
( Updated: 11 Jul 2026
12:48 PM )
बिना धुआं, बिना ओवरहेड तार...ऐसे दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, हरियाणा से होगी शुरुआत, जानिए इसकी अनोखी तकनीक
Image Source: NayabSaini/x POST
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Hydrogen Train in Haryana: प्रधानमंत्री रेलवे 17 जुलाई को एक ऐसे अध्याय की शरूआत करने जा रहा है, जो देश के परिवहन क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शरूआत नहीं होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक की ओर भारत के बढ़ते कदमों का प्रतीक भी होगी. खास बात यह है कि इस 10 कोच वाली ट्रेन को पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है. इसके संचालन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेनों को भविष्य के परिवहन के रूप में देखा जा रहा है.

जींद से सोनीपत तक दौड़ेगी नई तकनीक की मिसाल

भारतीय रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल सेक्शन को पायलट कॉरिडोर के रूप में चुना है. लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह ट्रेन 1,200 किलोवाट क्षमता वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली से लैस होगी. ट्रेन के संचालन के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा तैयार की गई है. यहीं से ट्रेन में सुरक्षित तरीके से हाइड्रोजन भरी जाएगी. यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी ऐसी ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है.

सुरक्षा और प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर

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नई तकनीक के साथ सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है. यही वजह है कि रेलवे ने शुरुआती चरण में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी की योजन बनाई है. शुरुआत में ट्रेन के साथ केवल विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी ही तैनात रहेंगे. हाइड्रोजन ईंधन भरने वाली पूरी प्रणाली की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी, जबकि इस परियोजना से जुड़े कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाएगा. ट्रेन के नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी शाकूरबस्ती स्थित आधुनिक मेंटेनेंस सुविधा को सौंपी गई है, ताकि संचालन के दौरान किसी भी तकनीकी चुनौती का तुरंत समाधान किया जा सके.

आखिर कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक फ्यूल सेल तकनीक है. इस तकनीक में ट्रेन के ऊपर लगे उच्च दबाव वाले टैंकों में हाइड्रोजन गैस सुरक्षित रखी जाती है. संचालन के दौरान इस गैस को फ्यूल सेल तक पहुंचाया जाता है, जहां बाहर की हवा से प्राप्त ऑक्सीजन के साथ इसकी रासायनिक प्रक्रिया होती है. इस प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है और वही बिजली ट्रेन की इलेक्ट्रिक मोटर को शक्ति देती है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या जहरीली गैसें नहीं निकलतीं. इसके बजाय केवल जलवाष्प, थोड़ी मात्रा में पानी और हल्की गर्मी उत्पन्न होती है. यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेनों को भविष्य का सबसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प माना जा रहा है.

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ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं, फिर भी दौड़ेगी ट्रेन

पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर बिजली के तार या ओवरहेड केबल लगाने की आवश्यकता नहीं होती. पूरी ऊर्जा ट्रेन अपने साथ मौजूद हाइड्रोजन ईंधन से ही प्राप्त करती है. इससे उन रेल मार्गों पर भी आधुनिक और स्वच्छ ट्रेनें चलाई जा सकती हैं, जहां विद्युतीकरण संभव नहीं है या उसकी लागत बहुत अधिक है. यही कारण है कि दुनिया के कई विकसित देश इस तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

हरित भविष्य की ओर भारत का मजबूत कदम

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देश में हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है. डीजल आधारित ट्रेनों की तुलना में यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करती है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है. सरकार का लक्ष्य भविष्य में भारतीय रेलवे को अधिक टिकाऊ, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है. यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश के कई अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों की आवाज सुनाई दे सकती है. यह पहल भारत को हरित परिवहन की वैश्विक दौड़ में एक मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है

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