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'अब कोई गुट बचा नहीं है...', महाराष्ट्र में गरजे अमित शाह ने साधा उद्धव गुट पर तगड़ा निशाना

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में जारी अंदरूनी संकट के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोल्हापुर में बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अब कोई गुट नहीं बचा है और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली शिवसेना है.

'अब कोई गुट बचा नहीं है...', महाराष्ट्र में गरजे अमित शाह ने साधा उद्धव गुट पर तगड़ा निशाना
Image Source: X @AmitShah
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महाराष्ट्र की सियासत इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है. उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना यूबीटी में चल बग़ावत की आहट के बीच शनिवार को केंद्रीय करि मंत्री महाराष्ट्र पहुंचे. इस दौरान उन्होंने ऐसा बयान दिया जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. उनके बयान को केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर का संकेत माना जा रहा है.

शनिवार को कोल्हापुर पहुंचे अमित शाह ने एक धन्यवाद रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अब शिवसेना में कोई गुट नहीं बचा है. उनके अनुसार, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली और इकलौती शिवसेना है. शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं.

अमित शाह ने क्या कहा?

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कोल्हापुर में आयोजित रैली के दौरान अमित शाह ने कहा कि पहले राजनीतिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दल को 'शिवसेना शिंदे गुट' कहना पड़ता था. लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और केवल एक ही शिवसेना बची है. शाह के इस बयान को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर शिवसेना के असली स्वरूप को लेकर चल रही बहस से जुड़ा हुआ है. इस दौरान अमित शाह ने प्रसिद्ध माता अंबाबाई मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. उन्होंने मंदिर परिसर और कॉरिडोर के सौंदर्याकरण कार्य की आधारशिला रखी. शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' विजन का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

'ऑपरेशन टाइगर' ने बढ़ाई बेचैनी

राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में इन दिनों 'ऑपरेशन टाइगर' भी बना हुआ है. बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं. हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों का यह असंतोष खुलकर सामने आता है, तो इसका सीधा असर उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत पर पड़ सकता है. यही कारण है कि पार्टी के भीतर गतिविधियां तेज हो गई हैं और नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

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संसदीय बैठक से गायब रहे छह सांसद

गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक ने इस पूरे विवाद को और हवा दे दी. लोकसभा में पार्टी के कुल 9 सांसद हैं, लेकिन बैठक में केवल 3 सांसद ही पहुंचे. बाकी 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए. बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए, जबकि अन्य छह सांसद मौजूद नहीं रहे. राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और संभावित बगावत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

बागी सांसदों को 24 घंटे का अल्टीमेटम

बैठक से अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ पार्टी ने सख्त रुख अपनाया है. लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप अनिल देसाई ने सभी गैरहाजिर सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है. नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं दिया गया, तो यह माना जाएगा कि संबंधित सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है. ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

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बताते चलें कि महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से बदल रहे घटनाक्रम आने वाले दिनों में और दिलचस्प हो सकते हैं. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बागी सांसद क्या फैसला लेते हैं और उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने में कितने सफल हो पाते हैं.

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