यूपी में प्राइवेट हॉस्पिटल्स के लिए नया आदेश जारी, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
UP: अगर अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिले, तो इसे मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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CM Yogi: यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. अब निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि सच में एमबीबीएस डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य होगी. अगर अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिले, तो इसे मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी.
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि छोटे निजी अस्पतालों में नोटिस बोर्ड पर तो एमबीबीएस डॉक्टर का नाम लिखा रहता है, लेकिन जांच के समय वे अस्पताल में मौजूद नहीं होते. इससे मरीजों को सही और समय पर इलाज नहीं मिल पाता.
सीएमओ Dr. N. B. Singh के अनुसार, अब यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दोपहर के खाने के समय को छोड़कर सुबह से रात तक पैनल में दर्ज एमबीबीएस डॉक्टर का अस्पताल में रहना जरूरी होगा.
नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?
अगर जांच के दौरान पैनल में दर्ज डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिलते (सर्जन को छोड़कर), तो अस्पताल पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके साथ ही अस्पताल के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की सिफारिश भी की जाएगी.
अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी भी हाल में मरीजों की जान से समझौता नहीं होने दिया जाएगा.
24 घंटे डॉक्टर क्यों जरूरी?
नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी Dr. A. P. Singh ने बताया कि कई बार इलाज के दौरान मरीज की मौत की खबरें सामने आती हैं. जांच में कई मामलों में अस्पताल की लापरवाही सही पाई गई है.
एमबीबीएस डॉक्टर का 24/7 उपलब्ध होना बहुत जरूरी है, क्योंकि वही मरीज की शुरुआती जांच कर सकता है, उसकी हालत को स्थिर कर सकता है और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर को बुला सकता है.
सर्जरी के बाद कई बार मरीज की हालत बिगड़ जाती है. ऐसे समय पर अगर योग्य डॉक्टर मौजूद न हो, तो स्थिति गंभीर हो सकती है.
पांच मार्च से शुरू होगा अभियान
सीएमओ डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि होली के बाद टीमों का गठन किया जाएगा और पांच मार्च से निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा.
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि निरीक्षण के नाम पर किसी को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा. जिन अस्पतालों में नियमों का पालन होगा, उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन जहां नियम तोड़े जाएंगे, वहां सख्त कार्रवाई तय है.
क्या होगा इसका असर?
इस फैसले से मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिलने की उम्मीद है.अस्पतालों में डॉक्टरों की वास्तविक मौजूदगी से इलाज की गुणवत्ता सुधरेगी और लापरवाही के मामलों में कमी आएगी. यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.
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