कांग्रेस से अलग होते ही नवजोत कौर सिद्धू के बदले तेवर, राहुल गांधी पर किया तीखा हमला; BJP को दे दिया संकेत
पंजाब कांग्रेस में दो महीने से जारी कलह का अंत तब हुआ, जब पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. इसकी घोषणा कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने की. इससे पहले 31 जनवरी को वह इस्तीफा दे चुकी थीं. निष्कासन के बाद उन्होंने राहुल गांधी को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिससे कांग्रेस और सिद्धू परिवार के बीच टकराव और गहरा गया है.
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पंजाब की राजनीति में पिछले दो महीनों से चल रही अनिश्चितता, बयानबाजी और अंदरूनी कलह का अंत आखिरकार एक बड़े राजनीतिक धमाके के साथ हुआ है. पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. इस फैसले की औपचारिक घोषणा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव भूपेश बघेल ने की. हालांकि, इससे पहले 31 जनवरी को नवजोत कौर सिद्धू खुद ही पार्टी से इस्तीफा दे चुकी थीं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के इस कदम ने यह साफ कर दिया कि पार्टी अब सिद्धू परिवार के बयानों और दबाव की राजनीति को और सहन करने के मूड में नहीं है.
नवजोत कौर के तेवर हुए और भी ज्यादा तल्ख
कांग्रेस से निष्कासन के बाद डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के तेवर और भी तीखे हो गए हैं. उन्होंने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर ऐसी टिप्पणी कर दी है. जो आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी और सिद्धू परिवार के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है. उन्होंने राहुल गांधी को 'पप्पू' कहकर संबोधित किया, जो आमतौर पर कांग्रेस विरोधी दलों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इस बयान ने कांग्रेस और सिद्धू परिवार के बीच चल रहे टकराव को सार्वजनिक रूप से चरम पर पहुंचा दिया है. पार्टी के भीतर इसे अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना जा रहा है.
500 करोड़ के सूटकेस से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ें दिसंबर 2024 में दिखाई देती हैं, जब डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री वही बनता है, जो 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देता है. यह बयान न केवल पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला था, बल्कि पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी उजागर करता था. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू तभी सक्रिय राजनीति में लौटेंगे, जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाएगा. नवजोत कौर का कहना था कि कांग्रेस में इतनी गुटबाजी है कि नवजोत सिद्धू को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा. उनके अनुसार, पार्टी में पहले से ही पांच नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और यही कारण है कि कांग्रेस खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है.
क्या बीजेपी में होगी वापसी?
निष्कासन के बाद पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजोत सिंह सिद्धू का अगला कदम क्या होगा. हालांकि सिद्धू अभी औपचारिक रूप से कांग्रेस में बने हुए हैं, लेकिन उनकी पत्नी के हालिया बयान उनके राजनीतिक भविष्य के संकेत माने जा रहे हैं. बीते कुछ हफ्तों में नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की खुलकर तारीफ की. इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि सिद्धू परिवार एक बार फिर बीजेपी में वापसी कर सकता है. यह वही पार्टी है, जहां से नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी.
सिद्धू परिवार का पहले से होता रहा है राजनीतिक टकराव
सिद्धू परिवार का राजनीतिक इतिहास विद्रोह और टकराव से भरा रहा है. वर्ष 2012 में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने भाजपा के टिकट पर अमृतसर पूर्व से चुनाव जीता था. इसके बावजूद उन्होंने अपनी ही अकाली-भाजपा सरकार पर फंड वितरण में भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. 2014 में जब भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर अरुण जेटली को अमृतसर से मैदान में उतारा, तब दोनों के बीच दूरियां और बढ़ गईं. 2016 में यह चर्चा भी चली कि सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी. अंततः 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू दंपती कांग्रेस में शामिल हो गए.
कैप्टन अमरिंदर सिंह से खुली लड़ाई
कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच टकराव जगजाहिर रहा. सिद्धू ने अपनी ही सरकार को बेअदबी के मामलों पर घेरा, जिसके चलते पार्टी की काफी किरकिरी हुई. अंततः कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा. कैप्टन के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब भी नवजोत कौर सिद्धू ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि उनके पति इस पद के लिए ज्यादा बेहतर विकल्प थे.
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बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है. लेकिन राजनीति में चुप्पी अक्सर आने वाले बड़े फैसलों का संकेत होती है. राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमलों के बाद कांग्रेस में उनके लिए रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पंजाब की राजनीति का यह धुरंधर खिलाड़ी एक बार फिर भगवा चोला पहनता है या किसी नई राजनीतिक राह की तलाश करता है. आने वाले दिन पंजाब की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.
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