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Kedarnath और Hemkund Sahib जाने वाले श्रद्धालुओं को Modi ने दी सौगात क्या बोले CM Dhami ?

Kedarnath Dham और हेमकुंड साहिब में दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि मोदी सरकार ने ऐसा फैसला ले लिया कि अब घंटों की दूरी महज 36 मिनट में तय कर पाएंगे !

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बाबा केदारनाथ धाम। हो या हेमकुंड साहिब दरबार। इन धार्मिक स्थलों में हर साल लाखों भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा है। देश दुनिया के कोने कोने से श्रद्धालु इन पावन धाम में हाजिरी लगाने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन यहां तक पहुंचना भी इन भक्तों के लिए कितना मुश्किल होता है ये इसी बात से समझ सकते हैं कि पथरीले रास्ते से होकर घंटों तक दूरी तय करनी पड़ती है तब जाकर बाबा केदारनाथ धाम तक श्रद्धालु पहुंच पाते हैं। भक्तों की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया जिससे अब घंटों की दूरी महज 36 मिनट में ही पूरी हो जाएगी।

दरअसल केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।क्योंकि 5 मार्च को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने केदारनाथ दाम और हेमकुंड साहिब दरबार के लिए एक बड़े रोपवे प्रोजेक्ट के फैसले को मंजूरी दे दी है। जिसके तहत श्रद्धालु अब केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब रोपवे के रास्ते जा सकेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी देते हुए खुद पीएम मोदी ने एक ट्वीट में लिखा। "आज कैबिनेट ने दो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए देवभूमि उत्तराखंड में दो नए रोपवे को मंजूरी दी है, सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक इनके निर्माण से जहां श्रद्धालुओं का समय बचेगा, वहीं उनकी यात्रा और सुगम होगी"


मोदी सरकार के इस रोपवे प्रोजेक्ट के बारे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि करीब 13 किलोमीटर लंबे केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट पर 4081 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आएगी जबकि 12.4 किलोमीटर लंबे हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट पर 2730 करोड़ रुपये की लागत आएगी। और ये दोनों ही प्रोजेक्ट पर्वतमाला परियोजना का हिस्सा होंगे।तो वहीं देवभूमि उत्तराखंड को दो रोपवे प्रोजेक्ट की सौगात मिली तो सीएम पुष्कर सिंह धामी भी गदगद नजर आए और उन्होंने सोशल मीडिया पर किये गये एक ट्वीट में पीएम मोदी का आभार जताते हुए लिखा।"बधाई हो उत्तराखण्ड ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्वतमाला परियोजना के तहत 4,081.28 करोड़ की धनराशि से सोनप्रयाग से केदारनाथ और 2,730.13 करोड़ की धनराशि से गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए सभी प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार, यह परियोजनाएं तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी, जिससे यात्रा आसान और सुगम होगी, इससे यात्रा में लगने वाला समय भी बहुत कम होगा जिससे तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी"

उत्तराखंड को मिली दो रोपवे प्रोजेक्ट की सौगात के बारे में आपको बता दें।

केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट

पहला रोपवे प्रोजेक्ट सोनप्रयाग से केदारनाथ को जोड़ेगा। 12.9 किलोमीटर की दूरी रोपवे के जरिये तय की जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर 4 हजार 81 करोड़ रुपये सरकार खर्च करेगी। प्रति घंटे 1800 यात्री सोनप्रयाग-केदारनाथ तक करेंगे सफर।
एक दिन में 18 हजार श्रद्धालु सोनप्रयाग-केदारनाथ जा सकेंगे। एक तरफ की यात्रा 8-9 घंटे से घट कर 36 मिनट हो जाएगा। सरकार के इस रोपवे प्रोजेक्ट से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

आपको बता दें 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ मंदिर की यात्रा गौरीकुंड से शुरू होती है जो 16 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है। जिसे तय करने के लिए श्रद्धालु फिलहाल पैदल, टट्टू, पालकी और हेलीकॉप्टर की मदद लेते हैं। ये रोपवे प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद मंदिर आने वाले तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग और केदारनाथ के बीच की दूरी तय करने में काफी सहूलियत मिलेगी। ये तो रही केदारनाथ-सोनप्रयाग रोपवे प्रोजेक्ट की खासियत। अब आपको हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट के बारे में भी बता दें।

हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट।

गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब जी के बीच होगा ये रोपवे प्रोजेक्ट। 12.4 किलोमीटर तक रोपवे के जरिये तय कर सकेंगे श्रद्धालु। गोविंदघाट से घांघरिया तक 10.55 किमी की दूरी तय करेंगे यात्री। घांघरिया से 1.85 किलोमीटर तक हेमकुंड साहिब की दूरी तय होगी।
प्रतिदिन 11 हजार श्रद्धालुओं को ले रोपवे से ले जाया जाएगा।

आपको बता दें हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा समुद्र तल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है और इसे गुरु गोविंद सिंह और भगवान लक्ष्मी के ध्यान स्थल के रूप में जाना जाता है। हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा मई से सितंबर के बीच साल में लगभग 5 महीने के लिए खुला रहता है और यहां हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख तीर्थयात्री आते हैं। ऐसे में रोपवे बन जाने के बाद इन श्रद्धालुओं को गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बीच 12.4 किलोमीटर की ये दूरी तय करने में सहूलियत होगी। 
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