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MPSC अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, अगस्त 2027 तक ऑफलाइन ही होंगी सभी परीक्षाएं; सीएम फडणवीस का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री ने माना कि अचानक बदलाव से अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए अगस्त 2027 से चरणबद्ध तरीके से नई प्रणाली लागू करने का फैसला लिया गया है. उन्होंने एमपीएससी को इन दिशा-निर्देशों के आधार पर आगे के संस्थागत फैसले लेने के निर्देश दिए. साथ ही आयोग की हाल की कई प्रगतिशील पहलों की भी सराहना की.
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महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को घोषणा की कि एमपीएससी की प्रस्तावित कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा. अब यह नई व्यवस्था अगस्त 2027 से लागू होगी. तब तक आयोग की सभी परीक्षाएं पहले की तरह ऑफलाइन (पेन और पेपर) माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी.
मुख्यमंत्री ने यह फैसला विभिन्न छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों की लगातार उठ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया. सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त समय से छात्रों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को तैयार करने का अवसर मिलेगा, वहीं प्रशासन भी अपनी तकनीकी और संस्थागत तैयारियां पूरी कर सकेगा.
उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला
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यह महत्वपूर्ण फैसला मुंबई स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया. बैठक में एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार, राज्य के मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
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बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण जरूरी है, ताकि पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगे और परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें.
उन्होंने कहा, "सुरक्षित और पारदर्शी चयन प्रक्रिया हमेशा मेरी प्राथमिकता रही है. परीक्षा समय पर हो, पूरी पारदर्शिता के साथ हो और परिणाम भी जल्द घोषित किए जाएं. लेकिन किसी भी नई व्यवस्था में बदलाव धीरे-धीरे और पूरी तैयारी के साथ होना चाहिए. हर प्रणाली को तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी है."
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अचानक बदलाव से बढ़ सकता था दबाव
मुख्यमंत्री ने माना कि अचानक बदलाव से अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए अगस्त 2027 से चरणबद्ध तरीके से नई प्रणाली लागू करने का फैसला लिया गया है. उन्होंने एमपीएससी को इन दिशा-निर्देशों के आधार पर आगे के संस्थागत फैसले लेने के निर्देश दिए. साथ ही आयोग की हाल की कई प्रगतिशील पहलों की भी सराहना की.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोककर आयोग को करीब 13 महीने का अतिरिक्त समय दिया है. इस दौरान महाराष्ट्र के सभी जिलों में मजबूत और तकनीकी रूप से भरोसेमंद डिजिटल परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे. साथ ही अभ्यर्थियों को भी मानसिक और रणनीतिक रूप से नई डिजिटल परीक्षा प्रणाली के लिए तैयार होने का समय मिलेगा.
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छात्रों के विरोध के बाद सरकार का फैसला
मुख्यमंत्री का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पुणे और छत्रपति संभाजीनगर समेत राज्य के कई हिस्सों में छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे थे.
दरअसल, जून 2026 के अंतिम सप्ताह में एमपीएससी ने अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की घोषणा की थी. आयोग ने कहा था कि ग्रुप-सी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से शुरुआत करते हुए प्रारंभिक परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित (सीबीटी) तरीके से आयोजित की जाएंगी. आयोग का उद्देश्य पेपर लीक रोकना, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और साल में कई बार परीक्षा आयोजित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रणाली लागू करना था.
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छात्रों ने उठाए थे कई सवाल
हालांकि इस अचानक हुई घोषणा से अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई. छात्र संगठनों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त और मानक स्तर के डिजिटल परीक्षा केंद्र नहीं हैं, जिससे ग्रामीण छात्रों को बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ेगी. इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अधिकांश छात्र अब तक ओएमआर शीट-आधारित ऑफलाइन परीक्षा की तैयारी करते रहे हैं और उन्हें कंप्यूटर-आधारित परीक्षा का पर्याप्त अनुभव नहीं है.
छात्रों ने सर्वर फेल होने, तकनीकी गड़बड़ियों और प्रस्तावित नॉर्मलाइजेशन मार्किंग सिस्टम को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने इन मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखा. लगातार विरोध-प्रदर्शन और कई दौर की बैठकों के बाद राज्य सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए यह फैसला लिया, ताकि प्रशासनिक अव्यवस्था से बचा जा सके और छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके.
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अगस्त 2027 तक जारी रहेगी ऑफलाइन परीक्षा
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अब अगस्त 2027 तक एमपीएससी की सभी परीक्षाएं पहले की तरह ऑफलाइन माध्यम से ही आयोजित होंगी, जबकि इस दौरान आयोग नई डिजिटल व्यवस्था को पूरी तरह तैयार करने पर काम करेगा.