ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, कोयल मलिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से की मुलाकात
टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है. राज्यसभा सदस्य कोयल मलिक ने सांसदी से इस्तीफा दे दिया है. मदन मित्रा के बाद कोयल का इस तरह बाहर जाना ममता के लिए किसी सदमे से कम नहीं है. कोयल ने अप्रैल में ही सांसदी ग्रहण की थी.
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तृणमूल कांग्रेस को गुरुवार को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी की राज्यसभा सदस्य और लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक) ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री और बंगाल बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भी बागी गुट में शामिल होने की आशंका तेज हो गई है.
इससे पहले भी कई राज्यसभा सांसदों ने ममता का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था. सुस्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय, प्रकाश बराइक ने ना सिर्फ अपनी सांसदी से इस्तीफा दिया, बल्कि वो बीजेपी में भी आधिकारिक रूप से शामिल हो गए. इसी बीच ममता की करीबी मदन मित्रा ने भी पार्टी ही छोड़ दी ह और बागी गुट में शामिल हो गए हैं.
जहां तक कोयल मलिक का सवाल है तो उन्होंने 6 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी. उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया था, हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है.
राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय चेहरा रही हैं. उन्हें टॉलीवुड की 'टॉली-क्वीन' भी कहा जाता है. पिछले दो दशकों से वह बंगाली सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं.
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में सुपरहिट फिल्म 'नेटर गुरु' से की थी. इसके बाद 'बंधन' (2004), 'शुभदृष्टि' (2005), 'पागलू' (2011), 'हेमलॉक सोसाइटी' (2012) और 'मितिन माशी' थ्रिलर सीरीज (2019) जैसी कई सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई.
कोयल मलिक को अपने शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं. उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड बांग्ला, दो बीएफजेए अवॉर्ड और साल 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित 'महानायक सम्मान' प्रदान किया गया था.
अगर उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं. फिलहाल उनके इस फैसले ने टीएमसी की राजनीति और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.
इससे पहले भी लगातार टीएमसी में अंदरूनी कलह बढ़ती दिख रही है. 'असली टीएमसी' का मामला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच पार्टी के नाम, सिंबल और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर चल रहा एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद बना हुआ है.
जहां तक मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने का सवाल है तो ये ऐसे समय में आया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके बेटों को समन भेजा था. समन मिलने के बाद मित्रा ने मध्य कोलकाता में दूसरे गुट के विधायक संदीपन साहा के घर जाकर पूर्व तृणमूल विधायक स्वर्ण कमल साहा से मुलाकात की. इसके बाद उनके गुट बदलने की अटकलें तेज हो गईं.
विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हुई टूट के बीच मदन मित्रा का यह कदम ममता बनर्जी के गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे पहले 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो चुके थे, जबकि ममता बनर्जी के साथ अब बहुत कम विधायक बचे हैं.
मदन मित्रा को ममता बनर्जी के भरोसेमंद और वफादार नेताओं में से एक माना जाता था. उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं. इनमें दमदम-बैरकपुर संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष, पार्टी की हॉकर विंग के प्रमुख और विधानसभा में पार्टी के मुख्य संयोजक जैसे पद शामिल थे.
ममता बनर्जी के गुट में अहम पदों पर रह चुके कई वरिष्ठ नेता, जिनमें फरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और ज्योति प्रिया मल्लिक शामिल हैं, पहले ही दूसरे गुट में शामिल हो चुके हैं. मदन मित्रा के गुट बदलने के साथ ही इस सूची में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है.
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