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कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद बड़ा एक्शन, पुलिस ने VIP पास रद्द किए, आयोजकों के लिए दिशानिर्देश जारी
कोलकाता पुलिस ने भगदड़ के बाद पूजा आयोजकों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इसी कड़ी में VIP पास रद्द कर दिए गए हैं. वहीं सीएम सुवेंदु ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है. वो 20 और 21 अक्टूबर को पीड़ितों के परिवार से मिलेंगे.
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कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ में 19 लोगों की मौत के एक दिन बाद शहर पुलिस ने रविवार को शेष पूजा दिवसों के लिए पुलिसकर्मियों और पूजा आयोजकों के लिए कई निर्देश जारी किए.
कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद एक्शन
इनमें सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि पंडालों में प्रवेश के लिए सभी वीआईपी पास रद्द कर दिए गए हैं. निर्देश दिया गया है कि ऐसे पंडालों के प्रवेश और निकास द्वारों पर किसी भी प्रकार के खाद्य स्टॉल नहीं लगाए जा सकते हैं.
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कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने इस संबंध में कोलकाता के सभी पुलिस थानों को निर्देश जारी किए हैं. इस निर्देश के माध्यम से पुलिस, सुरक्षा कर्मियों और पंडाल अधिकारियों के बीच निरंतर और सुचारू संचार बनाए रखना संभव होगा.
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पूजा पंडालों के लिए VIP पास रद्द
पुलिस आयुक्त ने अपने निर्देशों में कहा है कि अब से पब्लिक एड्रेस सिस्टम का नियंत्रण पुलिस के हाथों में रहेगा. इसके अलावा, पंडालों में न केवल स्वयंसेवक मौजूद रहेंगे, बल्कि कम से कम एक पुलिस कांस्टेबल भी तैनात रहेगा. साथ ही, पंडालों के प्रवेश और निकास द्वार खाली रखने होंगे.
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इस निर्देश में कहा गया है कि पंडाल के अंदर और प्रवेश एवं निकास द्वारों पर पर्याप्त रोशनी की जांच करना भी आवश्यक है. इसके अलावा, कोलकाता पुलिस के सभी निरीक्षकों को मैनपैक रेडियो सेट दिया जाएगा, जिसके माध्यम से पूजा समिति के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना संभव होगा.
पूजा समितियों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी
पुलिस ने रविवार को कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के सिलसिले में आयोजकों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई थी.
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उत्तरी कोलकाता के चोरेबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्तियों के दर्शन के लिए उमड़ी अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हो गए.
पंडाल के निकास द्वार का एक हिस्सा गिरने के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं में तनाव फैल गया. घायलों को तुरंत कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और दो अन्य सरकारी अस्पतालों में ले जाया गया. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लगभग 17 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 25 घायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया. उनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है. रविवार को मृतकों की संख्या 19 हो गई.
मृतकों के परिजनों से 20-21 अक्टूबर को मिलेंगे सीएम अधिकारी
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इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को भवानी भवन में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने घोषणा की कि दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से 20 और 21 अक्टूबर को मुलाकात कर उन्हें मुआवजे के चेक सौंपेंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि भगदड़ में अपनी भूमिका की जांच के लिए गठित होने वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कोलकाता पुलिस, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) और राज्य अग्निशमन सेवा विभाग के कर्मियों को बाहर रखा गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, मृतकों में से एक बिहार का निवासी था.
मुआवजे का चेक सौंपेगें सीएम सुवेंदु अधिकारी
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मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, "मृतकों में से एक बिहार का रहने वाला है. शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आईसीयू में भर्ती दो घायलों की हड्डियों में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि शेष 23 घायलों को अस्पताल से छुट्टी देने के लिए फिट घोषित किया गया है. मैं दो दिनों के भीतर प्रत्येक मृतक के परिवार से मिलूंगा और व्यक्तिगत रूप से मुआवजे का चेक सौंपूंगा."
उन्होंने कहा कि ऐसी घटना के बाद जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. पश्चिम बंगाल 10.5 से 11 करोड़ की आबादी वाला बड़ा राज्य है और यहां सभी लोग दुर्गा पूजा का त्योहार मना रहे हैं. ऐसे में सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. प्रशासनिक चूक की समीक्षा की गई है. भगदड़ में जान गंवाने वाले 19 लोगों में से 18 पश्चिम बंगाल के निवासी थे.
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक मृतक के परिवार के साथ अंतिम संस्कार होने तक नागरिक प्रशासन के एक अधिकारी, पुलिस प्रशासन के एक अधिकारी और स्थानीय विधायक की टीम मौजूद रहेगी.
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दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर क्या बोले सीएम सुवेंदु?
दुर्गा पूजा पंडाल में व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक स्वयंसेवकों की भर्ती 2024-25 में की गई थी. प्रशासन हर साल लोगों को नियुक्त करता है और इस बार पुरानी सूची से ही स्वयंसेवकों को लिया गया था. कोई नया व्यक्ति नियुक्त नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि प्रशासन से सूची मांगी गई है और उसकी जांच की जानी चाहिए. तथ्यों की पड़ताल किए बिना किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा.
उन्होंने बताया कि बारिश शुरू होने के बाद रस्सी छोड़ दी गई थी. वहां दो लेन की उचित व्यवस्था नहीं थी. रस्सियों से अस्थायी रास्ता बनाया गया था और लोगों को रोकने के लिए रस्सियों की एक श्रृंखला बनाई गई थी. यह श्रृंखला टूट गई, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई.
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घटना के बाद की गई कार्रवाई के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत सात लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में रखा गया है. राज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अस्पताल का दौरा किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों की सहायता से स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं.
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उन्होंने कहा कि पूरी सरकार सक्रिय रूप से स्थिति से निपटने में जुटी है. सरकार न तो छुट्टी मना रही है और न ही सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर रही है. किसी अन्य पर आरोप लगाते हुए प्रेस में बयान भी नहीं दिए जा रहे हैं.
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मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी गठित की जा रही है, जो मौजूदा न्यायाधीश के नेतृत्व में काम करेगी. इसके लिए मुख्य सचिव कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखेंगे. अनुमति मिलने पर जल्द से जल्द एसआईटी का गठन किया जाएगा.
अधिकारी ने कहा कि 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विजय सम्मिलनी कार्यक्रम में सरकार भगदड़ में जान गंवाने वाले 19 लोगों को श्रद्धांजलि देगी. इसी कार्यक्रम में घायल हुए 25 लोगों के परिजनों को भी पांच-पांच लाख रुपये के चेक सौंपे जाएंगे.
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अब तक 19 लोगों की मौत हो गई
इससे पहले, रविवार को पुलिस ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के मामले में आयोजकों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया. इस घटना में 19 लोगों की मौत हो गई.
उत्तर कोलकाता स्थित चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण भगदड़ मच गई. श्रद्धालु देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की झलक पाने के लिए पंडाल परिसर में उमड़ पड़े थे. इसी दौरान निकास द्वार की संरचना का एक हिस्सा ढह गया, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई.
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घायलों को तत्काल कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और दो अन्य सरकारी अस्पतालों में ले जाया गया. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में करीब 17 लोगों को मृत अवस्था में लाया गया घोषित किया गया था, जबकि 25 घायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. रविवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई.